फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Where are the people who are devout

हनुमान जी के दर्शन का यह सबसे आसान उपाय है

Thu, 05 Feb 2015 12:14 PM IST
सुदर्शन चक्र
सुदर्शन चक्र Updated Thu, 05 Feb 2015 12:14 PM IST
विज्ञापन
Where are the people who are devout

समर्थ रामदास के संबंध में कहा जाता है कि उनका अपने इष्ट राम और उनके परिवार से संवाद होता था। हनुमान के संबंध में तो कहते हैं कि वह समर्थ रामदास के प्रति बहुत स्नेह रखते थे। एक बार समर्थ ने हनुमान से आग्रह किया कि जो भी उनके संकीर्तन में आए, उन सभी को वह दर्शन दें। हनुमान ने कहा, जिस दिन आप का शुद्ध कीर्तन होगा, उसी दिन मैं दर्शन देने आ जाऊंगा।

विज्ञापन


आस-पास के इलाकों में संकीर्तन की मुनादी हो गई। बड़ी संख्या में लोग आए। समर्थ ने कीर्तन करने वालों को बताया कि हनुमान जी भी आएंगे। लोग इधर-उधर झांकते रहे, मगर कहीं हनुमान जी नहीं दिखे। थोड़ी देर बाद लोगों को ऊब होने लगी। धीरे-धीरे वे संकीर्तन से उठकर जाने लगे। थोड़ी देर बाद वे लोग भी चले गए, जो हनुमान का नाम सुनकर आए थे।
विज्ञापन


समर्थ रामदास अब भी शुद्ध सत्संग के भाव में थे। उन्हें लोगों के जाने का भान नहीं हुआ। धीरे-धीरे वाद्ययंत्र बजाने वाले भी एक-दूसरे को इशारा करके खिसक गए। अब अकेले समर्थ रामदास बचे, तभी हनुमान जी आ गए।
विज्ञापन
विज्ञापन


अरे हनुमान जी, अब इन सत्संगियों को दर्शन दो- रामदास ने प्रेम भाव से कहा। यह सुनकर हनुमान जी बोले, वे हैं कहां? उन्हें जवाब मिला, सब बैठे हैं न! हनुमान जी ने हंसते हुए कहा, आप आंखें तो खोलो महाराज। मैं तो आ गया हूं, लेकिन आप के भगत कहां है?


समर्थ रामदास ने आंखें खोलीं, तो भौंचक रह गए। उन्होंने पूछा, भक्त कहां गए? हनुमान ने जवाब दिया, शुद्ध भाव नहीं था, तो शुद्ध सत के भाव में टिके नहीं। विषय-विकार और संसार का आकर्षण अशुद्ध है। जिस समय शुद्ध सत्संग होगा, मैं आऊंगा- ऐसा मैंने बोला था। आप के चित्त में शुद्ध विचार हैं, तो मैं आ गया हूं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed