बुंदेलखंड में रक्षा गलियारा कब? उत्तर प्रदेश इन्हें आकर्षित करने में विफल रहा
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बुंदेलखंड में प्रस्तावित रक्षा उद्योग गलियारा न केवल इस सूखाग्रस्त इलाके को देश के औद्योगिक नक्शे पर लाएगा, बल्कि इससे मेक इन इंडिया को विस्तार देने की संभावना भी पूरी होगी। उत्तर प्रदेश में वैसे तो हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स आदि सार्वजनिक क्षेत्र के कारखानों के अलावा आयुध बोर्ड के कारखाने कई दशकों से चल रहे हैं, पर अब तक निजी क्षेत्र ने वहां रुचि नहीं ली। तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में निजी क्षेत्र ने भारी निवेश योजनाओं को जमीन पर उतारना शुरू कर दिया है, पर उत्तर प्रदेश इन्हें आकर्षित करने में विफल रहा।
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बुंदेलखंड में प्रस्तावित रक्षा उद्योग गलियारा न केवल इस सूखाग्रस्त इलाके को देश के औद्योगिक नक्शे पर लाएगा, बल्कि इससे मेक इन इंडिया को विस्तार देने की संभावना भी पूरी होगी। उत्तर प्रदेश में वैसे तो हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स आदि सार्वजनिक क्षेत्र के कारखानों के अलावा आयुध बोर्ड के कारखाने कई दशकों से चल रहे हैं, पर अब तक निजी क्षेत्र ने वहां रुचि नहीं ली। तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में निजी क्षेत्र ने भारी निवेश योजनाओं को जमीन पर उतारना शुरू कर दिया है, पर उत्तर प्रदेश इन्हें आकर्षित करने में विफल रहा।
पिछले साल फरवरी में सरकार ने स्वदेशी रक्षा उद्योग खड़ा करने के लिए तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश में रक्षा उद्योग गलियारा बनाने का एलान किया था। विगत फरवरी में प्रधानमंत्री ने बुंदेलखंड में इसकी आधारशिला भी रखी थी। पर सरकार की भ्रामक निवेश नीति के कारण रक्षा उद्योग लगाने का प्रस्ताव कागजों पर ही चल रहा है। चूंकि बुदेलखंड पिछड़ा इलाका है, इसलिए उद्यमियों की मांग है कि उन्हें वहां विशेष सुविधा और छूट दी जाए।
करीब पांच हजार हेक्टेयर में यह गलियारा छह शहरों लखनऊ, कानपुर, आगरा, अलीगढ़, झांसी और चित्रकूट में विकसित होगा। इसमें रक्षा से जुड़े उद्योग लगाने वाले निवेशकों को विशेष रियायत देने की पेशकश की गई थी। पर सरकार ने गलियारे के अंदर ही निवेश करने वालों को कई तरह की छूट देने का प्रस्ताव किया है, इसलिए निवेशकों का यह सवाल जायज है कि जिन उद्योगों ने गलियारे के बाहर रक्षा इकाइयां लगाने के लिए पहले से जमीन खरीदी है, क्या उन्हें रियायतें नहीं मिलेंगी।
कारखानों की स्थापना के लिए रक्षा मंत्रालय ने खास सेक्टर विशेषज्ञों की तलाश शुरू कर दी है, जो रिसोर्स पर्सन की हैसियत से निवेशकों को दिशा-निर्देश देंगे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस गलियारे को जल्दी सक्रिय करने की बात कही है और स्टेक होल्डरों जैसे उद्योग संगठनों के साथ बैठकें की हैं।
इच्छुक निवेशकों को उत्तर प्रदेश सरकार ने कुछ सुझाव दिए हैं, पर निवेशकों का कहना है कि ये काफी नहीं हैं। राज्य सरकार को रक्षा इकाइयां लगाने वालों के साथ बैठकर उनसे सुझाव मांगने चाहिए। यह सुझाव दिया गया है कि उत्तर प्रदेश सरकार निवेशकों को डिफेंस ऑफसेट फेसीलिटेशन एजेंसी के साथ संपर्क और सलाह करने में सहयोग करे, ताकि वे विदेशी कंपनियों के ऑफसेट दायित्व पूरा करने के लिए इकाइयां स्थापित कर सकें। इससे राज्य के रक्षा और अंतरिक्ष वैमानिकी पार्कों में रक्षा इकाइयां निवेश करने को उत्साहित होंगी। अगले एक दशक में सेना को दो सौ अरब डॉलर से अधिक के हथियारों की जरूरत है। इसके एक बड़े हिस्से की मांग देश से और खासकर उत्तर प्रदेश से पूरी हो सके, इसके लिए सरकार को तत्परता से काम करना होगा।