फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   When Gautama Buddha gave exam

सर्दी की रात में महत्मा बुद्घ ने ठंड से बचने के लिए किया यह काम

Wed, 25 Feb 2015 03:42 PM IST
कल्याण का सत्कथा अंक
कल्याण का सत्कथा अंक Updated Wed, 25 Feb 2015 03:42 PM IST
विज्ञापन
When Gautama Buddha gave  exam

सूर्य अस्ताचल पर अदृश्य होने वाले ही था। भगवान बुद्ध राजगृह में विहार समाप्त कर चारिका के लिए वैशाली के पथ पर थे। उन्होंने देखा कि उनके पीछे-पीछे अनेक भिक्षु चले आ रहे हैं। किसी ने सिर पर, तो किसी ने बगल में चीवरों की गठरी लाद रखी है। तथागत भिक्षुओं की संग्रह वृत्ति पर आश्चर्यचकित थे। कहां तो भिक्षुओं ने जनता के समक्ष त्याग का आदर्श रखा और कहां थोड़े ही समय के बाद उन्होंने संग्रह में आसक्ति दिखाई। तथागत यह देखकर चिंतित हो उठे।

विज्ञापन


रात का पहला पहर था। शीतल समीर ठंडक फैला रहा था। तथागत वैशाली के गौतम-चैत्य में समासीन थे। वह यही सोच रहे थे कि किस प्रकार भिक्षुओं की संग्रह वृत्ति का निवारण हो। उन्होंने चीवरों को सीमित करने का निश्चय किया और खुद को ही इस परीक्षा के लिए तैयार किया।
विज्ञापन


वह गौतम-चैत्य के बाहर आकर जमीन पर संघाटी बिछाकर लेट गए। साधारण ठंडक थी, इसलिए एक चीवर लेकर उन्होंने अपना शरीर ढक लिया। ठंडक का वेग रात में बढ़ गया, तो उन्होंने दूसरा चीवर ओढ़ लिया। तीसरे पहर में आकाश लोहित वर्ण का हो चला। शीत का उत्कर्ष देखकर उन्होंने तब तीसरा चीवर ओढ़ लिया। इस तरह उन्होंने पूरी रात गुजारी।
विज्ञापन
विज्ञापन


सुबह तथागत ने भिक्षुओं को बुलाया और उपदेश देते हुए कहा, प्रत्येक भिक्षु का काम केवल तीन चीवर से चल सकता है। अधिक से अधिक चीवरों के संग्रह से पाप की वृद्धि हो सकती है। इससे संघ में शिथिलता आ जाएगी। भिक्षु अपनी गलती समझ चुके थे। इस तरह संघ की वैराग्य वृत्ति को कलंकित होने से बचाने के लिए खुद गौतम बुद्ध ने परीक्षा दी। उन्होंने अपने जीवन के त्यागमय अनुभव का दूसरों के हित में उपयोग किया।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed