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चीन को किससे खतरा है?
रवींद्र दुबे, वरिष्ठ पत्रकार
Updated Sun, 22 Apr 2018 07:43 PM IST
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चीनी जासूस
चीन ने विदेशी जासूसों के खिलाफ अपना अभियान तेज कर दिया है। 'समाजवादी व्यवस्था का तख्तापलट करने' जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा के खतरों की सूचना देने हेतु प्रोत्साहित करने के लिए चीन ने मंदारिन और अंग्रेजी में एक वेबसाइट शुरू की है। चीन के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्रालय द्वारा शुरू की गई इस वेबसाइट में किसी को भी चीनी नागरिकों या विदेशियों द्वारा सरकारी या सैन्य अधिकारियों को रिश्वत देने, सशस्त्र दंगे भड़काने या जातीय अलगाववाद के लिए उकसाने के प्रयासों की सूचना देने पर जोर दिया गया है।
विदेशियों द्वारा चीन में ऐसे किसी भी व्यक्ति से मुलाकात करने को गंभीरता से लिया जाएगा, जो देश की सुरक्षा को खतरे में डालने वाली गतिविधियों में संलिप्त रहा हो या फिर जिस पर ऐसा करने का जबर्दस्त संदेह हो। वेबसाइट के अनुसार, जासूसी के उपकरणों को खोज निकालने वाले या ऐसे किसी व्यक्ति के बारे में बताने वाले, जिस पर देश के रहस्यों को खरीदने का शक हो, व्यक्ति को पुरस्कृत किया जाएगा। शिकायतें चीनी और अंग्रेजी, दोनों भाषाओं में की जा सकती है। इस वेबसाइट में इनाम की तफसील नहीं दी गई है। पिछले साल सरकारी समाचारपत्र बीजिंग डेली के अनुसार बीजिंग सिटी नेशनल सिक्योरिटी ब्यूरो ने जासूसों की जानकारी देने के लिए दस हजार से पांच लाख युआन तक देने की पेशकश की थी। अमेरिकी डॉलरों में यह राशि 1,500 से लेकर 73,000 तक होती है।
विगत 15 अप्रैल को चीन के राष्ट्रीय सुरक्षा शिक्षा दिवस के अवसर पर किसी के प्रश्नवाचक व्यवहार को समझाने के लिए मंत्रालय ने एक कार्टून भी जारी किया, जिसमें एक दोस्त को नकाब पहने दिखाया गया है। यह कार्टून किसी अंतरराष्ट्रीय अशासकीय संगठन के एक विदेशी की कहानी सुनाता है, जो एक चीनी प्रतिनिधि को कर्मचारियों द्वारा अपने अधिकारों के लिए लिए विरोध हेतु संगठित कर सेमिनार आयोजित करने के लिए रिश्वत देता है। कार्टून के अनुसार, ऐसा सार्वजनिक विरोध गैरकानूनी है और एक सतर्क कर्मचारी विदेशी के इस 'असंतोष’ के पीछे होने की जानकारी देता है।
वर्ष 2016 में मंत्रालय द्वारा प्रकाशित कार्टूनों की दूसरी शृंखला में चीनी नागरिकों को विदेशियों के साथ रूमानी रिश्ते बनाने के खिलाफ चेतावनी दी गई थी, क्योंकि यह देश के रहस्यों को निकालने का एक संभव तरीका हो सकता है। साम्यवादी चीन अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति अत्यधिक कड़ा रवैया अख्तियार किए हुए है। चीनी मीडिया ने पूर्व में देश के वेब उपयोगकर्ताओं को उनकी दोस्तों और नौकरियों की ऑनलाइन तलाश के दौरान विदेशी जासूसों द्वारा भरमाए जाने की कहानियां प्रकाशित की हैं।
सवाल यह है कि चीन को आखिर एकाएक इस सब की क्या जरूरत पड़ गई। चीनी जासूसों का लोहा तो सारी दुनिया मानती है! जासूसी की दुनिया में काफी मजे ले-लेकर एक बात कही जाती है। वह यह कि अगर यह पता लग जाए कि मियामी समुद्र तट की रेत में कोई रहस्य छिपा हुआ है, तो हजारों चीनी पर्यटकों के रूप में मियामी बीच पर टूट पड़ेंगे। हरेक चीनी चंद मुट्ठी रेत अपनी जेबों में भर लेगा। ऐसे में एक स्थिति ऐसी आ जाएगी, जब बीच पर रेत का एक कण भी नहीं बचेगा!
जब चीनी जासूसों की ऐसी छवि है, तो फिर अब ऐसे कौन-से हालात पैदा हो गए हैं कि चीन को अपने नागरिकों से अपील करनी पड़ रही है? अंतरराष्ट्रीय खुफियागीरी के पर्यवेक्षकों के अनुसार, चीन अपनी इंसानी खुफियागीरी को (जिसे खुफियागीरी की भाषा में ह्यूमन इंटेलिजेंस या ह्यूमिंट कहा जाता है) बढ़ाकर काफी ऊंचे स्तर पर ले जाने की कोशिश कर रहा है।
पिछले कुछ वर्षों में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने साफ तौर पर अपना ध्यान सैन्य और नागरिक खुफियागीरी के सुधार पर केंद्रित किया है, जिसमें विदेशी खुफियागीरी पर फोकस करती एक इकाई का गठन भी शामिल है। अब तक विदेशियों के प्रति ह्यूमिंट की गतिविधियां ऐतिहासिक रूप से काफी सीमित थीं। चीनी खुफिया सेवाओं ने विदेशों में बसे और विदेश यात्रा कर रहे चीनियों की काफी मदद ली। ढेर सारे लोगों को जानकारी के छोटे-छोटे टुकड़े बटोरने में लगाने से उनके पकड़े जाने और दंडित होने का खतरा काफी कम हो जाता है।
जानकारों का कहना है कि पिछले एक दशक में चीन और अमेरिका के बीच एशिया-प्रशांत में वर्चस्व को लेकर रणनीतिक प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ी है, जिसे दोनों ही पक्षों ने व्यापार, उत्तर कोरिया, दक्षिण चीन सागर, ताइवान और अन्य के बारे में टकराव भरे बयानों से रेखांकित किया है।
दक्षिण चीन सागर में चीनी सैन्य अड्डों की स्थापना, अमेरिका नौसेना के फ्रीडम ऑफ नेविगेशन अभियान, चीन की एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन की घोषणा, अमेरिका द्वारा ताइवान को हथियारों की बिक्री और उत्तर कोरिया में संभावित अमरीकी सैन्य कार्रवाई आदि से चीन इस बात पर तुल गया है कि उसे अमेरिकी सैन्य क्षमताओं, तैयारियों और इरादों को बेहतर ढंग से समझना है, ताकि भविष्य में आने वाले किसी भी संकट के लिए निर्णय लेने में कोई समस्या न हो। इसके लिए उसने अपने प्रयास पहले की तुलना में कई गुना बढ़ा दिए हैं। और इरादों का पता लगाने और सही फैसले ले सकने के लिए ह्यूमन इंटेलिजेंस से ज्यादा कारगर कुछ नहीं है।
चूंकि सबसे पहले अपना घर मजबूत करना जरूरी है, इसलिए चीन में यह वेबसाइट शुरू की गई है, जिससे देश से हो सकने वाले संभावित रिसाव को रोका जा सके। हालांकि इस वेबसाइट को चीन की जनता ने किस तरह से लिया है, इस बारे में अभी कोई जानकारी सामने नहीं आई है।
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विदेशियों द्वारा चीन में ऐसे किसी भी व्यक्ति से मुलाकात करने को गंभीरता से लिया जाएगा, जो देश की सुरक्षा को खतरे में डालने वाली गतिविधियों में संलिप्त रहा हो या फिर जिस पर ऐसा करने का जबर्दस्त संदेह हो। वेबसाइट के अनुसार, जासूसी के उपकरणों को खोज निकालने वाले या ऐसे किसी व्यक्ति के बारे में बताने वाले, जिस पर देश के रहस्यों को खरीदने का शक हो, व्यक्ति को पुरस्कृत किया जाएगा। शिकायतें चीनी और अंग्रेजी, दोनों भाषाओं में की जा सकती है। इस वेबसाइट में इनाम की तफसील नहीं दी गई है। पिछले साल सरकारी समाचारपत्र बीजिंग डेली के अनुसार बीजिंग सिटी नेशनल सिक्योरिटी ब्यूरो ने जासूसों की जानकारी देने के लिए दस हजार से पांच लाख युआन तक देने की पेशकश की थी। अमेरिकी डॉलरों में यह राशि 1,500 से लेकर 73,000 तक होती है।
विगत 15 अप्रैल को चीन के राष्ट्रीय सुरक्षा शिक्षा दिवस के अवसर पर किसी के प्रश्नवाचक व्यवहार को समझाने के लिए मंत्रालय ने एक कार्टून भी जारी किया, जिसमें एक दोस्त को नकाब पहने दिखाया गया है। यह कार्टून किसी अंतरराष्ट्रीय अशासकीय संगठन के एक विदेशी की कहानी सुनाता है, जो एक चीनी प्रतिनिधि को कर्मचारियों द्वारा अपने अधिकारों के लिए लिए विरोध हेतु संगठित कर सेमिनार आयोजित करने के लिए रिश्वत देता है। कार्टून के अनुसार, ऐसा सार्वजनिक विरोध गैरकानूनी है और एक सतर्क कर्मचारी विदेशी के इस 'असंतोष’ के पीछे होने की जानकारी देता है।
वर्ष 2016 में मंत्रालय द्वारा प्रकाशित कार्टूनों की दूसरी शृंखला में चीनी नागरिकों को विदेशियों के साथ रूमानी रिश्ते बनाने के खिलाफ चेतावनी दी गई थी, क्योंकि यह देश के रहस्यों को निकालने का एक संभव तरीका हो सकता है। साम्यवादी चीन अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति अत्यधिक कड़ा रवैया अख्तियार किए हुए है। चीनी मीडिया ने पूर्व में देश के वेब उपयोगकर्ताओं को उनकी दोस्तों और नौकरियों की ऑनलाइन तलाश के दौरान विदेशी जासूसों द्वारा भरमाए जाने की कहानियां प्रकाशित की हैं।
सवाल यह है कि चीन को आखिर एकाएक इस सब की क्या जरूरत पड़ गई। चीनी जासूसों का लोहा तो सारी दुनिया मानती है! जासूसी की दुनिया में काफी मजे ले-लेकर एक बात कही जाती है। वह यह कि अगर यह पता लग जाए कि मियामी समुद्र तट की रेत में कोई रहस्य छिपा हुआ है, तो हजारों चीनी पर्यटकों के रूप में मियामी बीच पर टूट पड़ेंगे। हरेक चीनी चंद मुट्ठी रेत अपनी जेबों में भर लेगा। ऐसे में एक स्थिति ऐसी आ जाएगी, जब बीच पर रेत का एक कण भी नहीं बचेगा!
जब चीनी जासूसों की ऐसी छवि है, तो फिर अब ऐसे कौन-से हालात पैदा हो गए हैं कि चीन को अपने नागरिकों से अपील करनी पड़ रही है? अंतरराष्ट्रीय खुफियागीरी के पर्यवेक्षकों के अनुसार, चीन अपनी इंसानी खुफियागीरी को (जिसे खुफियागीरी की भाषा में ह्यूमन इंटेलिजेंस या ह्यूमिंट कहा जाता है) बढ़ाकर काफी ऊंचे स्तर पर ले जाने की कोशिश कर रहा है।
पिछले कुछ वर्षों में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने साफ तौर पर अपना ध्यान सैन्य और नागरिक खुफियागीरी के सुधार पर केंद्रित किया है, जिसमें विदेशी खुफियागीरी पर फोकस करती एक इकाई का गठन भी शामिल है। अब तक विदेशियों के प्रति ह्यूमिंट की गतिविधियां ऐतिहासिक रूप से काफी सीमित थीं। चीनी खुफिया सेवाओं ने विदेशों में बसे और विदेश यात्रा कर रहे चीनियों की काफी मदद ली। ढेर सारे लोगों को जानकारी के छोटे-छोटे टुकड़े बटोरने में लगाने से उनके पकड़े जाने और दंडित होने का खतरा काफी कम हो जाता है।
जानकारों का कहना है कि पिछले एक दशक में चीन और अमेरिका के बीच एशिया-प्रशांत में वर्चस्व को लेकर रणनीतिक प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ी है, जिसे दोनों ही पक्षों ने व्यापार, उत्तर कोरिया, दक्षिण चीन सागर, ताइवान और अन्य के बारे में टकराव भरे बयानों से रेखांकित किया है।
दक्षिण चीन सागर में चीनी सैन्य अड्डों की स्थापना, अमेरिका नौसेना के फ्रीडम ऑफ नेविगेशन अभियान, चीन की एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन की घोषणा, अमेरिका द्वारा ताइवान को हथियारों की बिक्री और उत्तर कोरिया में संभावित अमरीकी सैन्य कार्रवाई आदि से चीन इस बात पर तुल गया है कि उसे अमेरिकी सैन्य क्षमताओं, तैयारियों और इरादों को बेहतर ढंग से समझना है, ताकि भविष्य में आने वाले किसी भी संकट के लिए निर्णय लेने में कोई समस्या न हो। इसके लिए उसने अपने प्रयास पहले की तुलना में कई गुना बढ़ा दिए हैं। और इरादों का पता लगाने और सही फैसले ले सकने के लिए ह्यूमन इंटेलिजेंस से ज्यादा कारगर कुछ नहीं है।
चूंकि सबसे पहले अपना घर मजबूत करना जरूरी है, इसलिए चीन में यह वेबसाइट शुरू की गई है, जिससे देश से हो सकने वाले संभावित रिसाव को रोका जा सके। हालांकि इस वेबसाइट को चीन की जनता ने किस तरह से लिया है, इस बारे में अभी कोई जानकारी सामने नहीं आई है।