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चिंता मनी-34 : पुराने और नए आयकर स्लैब में बेहतर कौन है?

Sat, 19 Sep 2020 10:36 AM IST
नारायण कृष्णमूर्ति नारायण कृष्णमूर्ति, आर्थिक सलाहकार
नारायण कृष्णमूर्ति, आर्थिक सलाहकार Published by: नारायण कृष्णमूर्ति Updated Sat, 19 Sep 2020 10:36 AM IST
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What is better in the old and new income tax slabs
कर प्रणाली - फोटो : iStock

रोहतक के 36 वर्षीय नवीन कुमार आयकर का नया स्लैब चुनने की सोच रहे थे। कोविड के कारण ऐसा हो तो नहीं पाया, पर वह जानना चाहते हैं कि दो स्लैब में कौन-सा बेहतर है। बजट में जब आयकर के एक नए स्लैब का एलान किया गया, जो मौजूदा 5 फीसदी, 20 फीसदी और 30 फीसदी के स्लैब के विस्तार के रूप में 5, 10, 15, 20, 25 और 30 फीसदी का नया स्लैब है, तो इसका स्वागत हुआ। लोगों को लगा कि नए स्लैब में उनका आयकर कम हो जाएगा।

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आयकर स्लैब (रुपये) टैक्स दर (पुरानी व्यवस्था) टैक्स दर (नई व्यवस्था) 
2.5 लाख तक कुछ नहीं कुछ नहीं
2.5 से 5 लाख 5% 5%
5 से 7.5 लाख 20% 10%
7.5 से 10 लाख 20% 15%
10 से 12.5 लाख 30% 20%
12 से 15 लाख 30% 25%
15 लाख से अधिक 30% 30%


(इन दरों पर सरचार्ज और उपकर लागू।) 

क्या है नया आयकर स्लैब?
सरसरी तौर पर नया स्लैब आयकरदाताओं का बोझ कम करता हुआ लगता है। यह ऐच्छिक है। यानी आप चाहें, तो इसे चुन सकते हैं या पुराने स्लैब में बने रह सकते हैं। पर नया स्लैब चुनने पर आयकर कानून, 1961 के तहत मिलने वाली तमाम छूट और कटौतियां छोड़नी होंगी। कौन-सा स्लैब बेहतर है? नई व्यवस्था में ज्यादा टैक्स स्लैब्स हैं, इसलिए यह बेहतर लगता है, खासकर जब सालाना आय 15 लाख से कम हो। पर इसे चुनने से आप छूट और कटौतियों से वंचित हो जाएंगे। आपको एलटीए (लीव ट्रेवल अलाउंस), एचआरए (हाउस रेंट अलाउंस) आदि छूटों से हाथ धोने के साथ धारा 80सी, 80 सीसीसी, 80 सीसीडी, 80 डी, 80डीडी और 80 ई के तहत मिलने वाली टैक्स छूटों से वंचित होना पड़ेगा। 

धारा 16 के तहत होने वाली 50,000 की मानक कटौती और धारा 24 (बी) के तहत होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली कटौती भी अमान्य हो जाएगी। हालांकि धारा 80 सीसीडी (2) के तहत होने वाली एकमात्र कटौती का, जो नोटिफाइड पेंशन स्कीम के तहत कर्मचारियों के खातों में नियोक्ता का अंशदान होता है, दावा किया जा सकेगा। नए स्लैब में करीब 70 छूट और कटौतियां हटा दी गई हैं। एक बार इसे चुनने पर पुराने स्लैब में नहीं लौटा जा सकेगा।

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टैक्स बचत
अनेक आयकरदाताओं के लिए धारा 80 सी के तहत मिलने वाली टैक्स बचत ही एकमात्र बचत है। नए स्लैब में ज्यादा बचत का तर्क है, पर बचत की आदत न हो, तो टैक्स बचतों से हाथ धोना घातक होगा। 15 लाख या उससे कम की सालाना आय वालों के लिए नया स्लैब पुराने की तुलना में बेहतर होगा, पर छूट और कटौतियों पर विचार करने से पुराना ढांचा प्रभावी साबित होगा। मसलन, 7.5 लाख की सालाना आय पर पुराने स्लैब के 65,000 रुपये की तुलना में नए स्लैब में टैक्स 39,000 रुपये ही होगा, पर अगर आप 50,000 की मानक कटौती, 80 सी के तहत 1.5 लाख की टैक्स बचत और 80 डी के तहत 20,000 की कटौती का दावा करेंगे, तो टैक्स 19,240 रुपये होगा, यानी 45,760 रुपये की टैक्स बचत। लिहाजा नवीन को सोझ-समझकर ही पुराने से नए स्लैब में जाना चाहिए।

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