फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   west asia conflict Crisis and Signals India focus on alternative energy sources weak rupee spoils the math

संकट और संकेत: वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर भारत का फोकस, कमजोर रुपये ने बिगाड़ा गणित

Tue, 10 Mar 2026 06:54 AM IST
Nitin Gautam अमर उजाला, नई दिल्ली
अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Nitin Gautam Updated Tue, 10 Mar 2026 06:54 AM IST
विज्ञापन
सार
तमाम एशियाई शेयर बाजारों के साथ भारतीय शेयर बाजार में आई गिरावट, अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों का बढ़ना और डॉलर की तुलना में रुपये का और गिरना पश्चिम एशियाई संकट के गहराने के ही संकेत हैं।
loader
west asia conflict Crisis and Signals India focus on alternative energy sources weak rupee spoils the math
पश्चिम एशिया संकट ने बढ़ाई परेशानी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और भू-राजनीतिक तनाव से एशियाई व घरेलू शेयर बाजारों में आई बड़ी गिरावट तथा डॉलर की तुलना में रुपये का और गिरना महज बाजार की हलचल नहीं, बल्कि एक गहरे संकट का संकेत भी हो सकता है। कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं तथा आने वाले समय में इसके और बढ़ने की चेतावनी भी दी जा रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य के तकरीबन बंद होने और अमेरिका-इस्राइल के हमलों के जवाब में ईरान द्वारा कतर, सऊदी अरब व कुवैत की तेल रिफाइनरियों पर हमलों को इसकी वजह बताया जा रहा है।


भारत करीब 83 फीसदी एलपीजी और 56 फीसदी एलएनजी का आयात होर्मुज मार्ग से करता है। भारत अपने कुल एलपीजी आयात का अधिकतर हिस्सा पश्चिम एशिया से प्राप्त करता है। उल्लेखनीय है कि देश में करीब 33 करोड़ लोग अब भी एलपीजी इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में, तेल कंपनियों द्वारा घरेलू व वाणिज्यिक गैस सिलिंडर की कीमतों में बढ़ोतरी से अब वैश्विक संघर्ष का असर घर की रसोई तक पहुंचना चिंताजनक है। गौरतलब है कि भारत में पिछले करीब चार वर्षों से पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। लेकिन, फिलहाल जो स्थितियां बन रही हैं, उनसे जाहिर है कि भारत के लिए तेल की कीमत से कहीं अधिक महत्वपूर्ण सवाल तेल की निरंतर आपूर्ति का भी है।


कुछ ही दिन पहले अमेरिका की ओर से कहा गया कि भारत को अगले 30 दिनों के लिए रूस से तेल खरीदने की छूट दी जा रही है, जबकि सच तो यह है कि भारत पहले से ही रूस से तेल खरीद रहा था। केंद्रीय पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री का यह आश्वासन महत्वपूर्ण है कि भारत होर्मुज जलडमरूमध्य के अलावा अन्य मार्गों से भी कच्चे तेल का आयात करता है, इसलिए फिलहाल आपूर्ति पर संकट नहीं है। कतर, जिससे भारत अपने कुल एलएनजी आयात का 40 फीसदी हिस्सा प्राप्त करता है, द्वारा एलएनजी उत्पादन रोके जाने और पश्चिम एशिया का संकट जल्दी खत्म न होने की सूरत में भारत को तात्कालिक तौर पर ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे दूसरे एलएनजी निर्यातकों पर ध्यान देना चाहिए। लेकिन दीर्घकाल में हमें बायो गैस उत्पादन पर भी ध्यान देना होगा।

इस क्षेत्र में भारत के लिए इतनी संभावनाएं हैं कि वह गैस की अपनी कुल जरूरत को कृषि व शहरी कचरे से ही प्राप्त कर सकता है। पश्चिम एशिया की अस्थिरता ने दुनिया को फिर याद दिलाया है कि ऊर्जा केवल ईंधन नहीं, बल्कि आर्थिक स्थिरता और राष्ट्रीय सुरक्षा का आधार भी है। भारत अगर इस संकट को अवसर में बदलते हुए दीर्घकालिक ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस कदम उठाता है, तो भविष्य के ऐसे झटकों का असर काफी हद तक सीमित किया जा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed