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किसानों की बेहतरी के लिए उठते कदम

Fri, 08 Jul 2016 04:11 PM IST
श्रीकांत शर्मा
श्रीकांत शर्मा Updated Fri, 08 Jul 2016 04:11 PM IST
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welfare initiative for farmer
श्रीकांत शर्मा

किसानों के हित में कई ऐतिहासिक फैसले ले चुकी राजग सरकार ने इस दिशा में एक और महत्‍वपूर्ण कदम उठाया है। दलहन-तिलहन फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में उल्लेखनीय वृद्धि करने के बाद सरकार ने अब खाद की कीमतों में बड़ी कटौती करने का निर्णय लिया है। इससे डीएपी की 50 किलोग्राम की बोरी की कीमत 125 रुपये और एमओपी की बोरी की कीमत 250 रुपये कम हो जाएगी। इससे किसानों को लगभग 4,500 करोड़ रुपये का लाभ होगा। यह फैसला लागत घटाने और 2022 तक कृषि आय दोगुनी करने का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में कारगर साबित होगा। सरकार ने यह फैसला ऐसे समय में किया है, जब किसान खरीफ फसलों की बुआई में जुटे हैं।

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पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के कार्यकाल में महंगाई आसमान पर रहने के कारण खेती की लागत कई गुना बढ़ी थी। किसानों को उनकी उपज का उपयुक्त मूल्य भी नहीं मिल पा रहा था। ऐसे में, राजग सरकार जहां खेती की लागत घटाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है, वहीं खेती के साथ संबद्ध क्षेत्रों को प्रोत्साहन देकर किसानों की आय बढ़ाने के वैकल्पिक उपाय करने में भी जुटी है। हमारे देश में लगभग नौ करोड़ किसान परिवार हैं। मगर प्रति कृषक परिवार की मासिक औसत आय बमुश्किल सवा छह हजार रुपये ही है।
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प्रधानमंत्री ने किसानों की जिंदगी में बदलाव लाने का बीड़ा उठाया है। किसानों को प्राकृतिक आपदा से उबारने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की शुरुआत की गई है। ‘एक राष्ट्र, एक योजना’ तथा 'वन सीजन, वन प्रीमियम’ के सिद्धांत पर आधारित इस योजना के तहत किसानों को अब कम प्रीमियम देना होगा। पहले के 15 फीसदी प्रीमियम के बदले अब उन्‍हें रबी फसलों के लिए 1.5 प्रतिशत, खरीफ फसलों के लिए दो प्रतिशत और बागवानी फसलों के लिए पांच प्रतिशत प्रीमियम ही देना होगा। बीमा में प्राकृतिक और स्थानीय आपदाओं में भी सुरक्षा मिलेगी।
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दरअसल सरकार का ध्येय 'जमीन बचाओ, किसान बचाओ’ के विचार पर आधारित है। इसके तहत लागत कम करने के अलावा जमीन में रासायनिक खादों-कीटनाशकों का कम प्रयोग करने पर जोर दिया जा रहा है। खाद की जरूरत पूरी करने के लिए नीम कोटिंग यूरिया की शुरुआत की गई है, जिससे यूरिया की कालाबाजारी और दुरुपयोग रुका है तथा किसानों को समय पर खाद उपलब्‍ध हुआ है। सॉयल हेल्‍थ कार्ड स्‍कीम भी शुरू हुई है, जिसके तहत किसानों के खेत की मिट्टी की जांच कर उन्‍हें बताया जा रहा है कि यह किन फसलों के लिए उपयुक्‍त है और इसमें उवर्रकों का कितना इस्‍तेमाल किया जाना चाहिए।


कई फसलों के न्‍यूतनम समर्थन मूल्‍य में खासी वृद्धि की गई है। जैसे, दलहन का न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य बढ़ाकर 5,225 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है, जिसमें 425 रुपये बोनस भी शामिल है। तिलहन फसलों का भी समर्थन मूल्य बढ़ाया गया है। इससे इन फसलों की उपज बढ़ेगी और देश को आयात के बोझ से छुटकारा मिलेगा। किसानों को गैरपरंपरागत उपायों के जरिये स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। कुल मिलाकर, केंद्र सरकार 'अन्नदाता सुखी भव:' के नारे को सार्थक करने की दिशा में हरसंभव कदम उठा रही है।

-लेखक भाजपा के राष्ट्रीय सचिव हैं

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