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हम हड़बड़ी में गड़बड़ी नहीं करते
प्रकाश पुरोहित
Updated Thu, 10 Apr 2014 07:24 PM IST
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चीन की बनी चीजों का जब हमें ही भरोसा नहीं है, तो चीनियों ने क्या सोचकर पुल पर चलने का फैसला कर लिया। अब पुल नौ महीने में ही गिर गया है, तो हल्ला मच रहा है, जबकि जांच तो इसकी होनी चाहिए कि नौ महीने तक पुल टिका कैसे रहा। चीनी सामान बेचने-खरीदने वाले के बीच यह आपसी समझ रहती है कि सामान की कोई गारंटी नहीं है। और अब चीन का बना पुल नौ महीने में ही ढह गया, तो उसकी अंतरराष्ट्रीय साख में और इजाफा हो जाएगा।
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हमारे यहां ऐसा नहीं होता। हम या तो पुल कभी पूरा ही नहीं होने देते और यदि हो भी जाए, तो दो-चार साल उद्घाटन के इंतजार में ही निकाल देते हैं। इसका फायदा यह होता है कि बदनामी नहीं होती। चीनी लोग बनाते भी जल्दी हैं और गिराने में भी देर नहीं करते। हम हड़बड़ी में कोई गड़बड़ी नहीं करते। पुल के नक्शे से लेकर टेंडर तक में ही इतना समय लगा देते हैं कि एक पीढ़ी बीच में ही निपट जाती है।
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चीन में गिरा पुल यदि हमारे यहां होता, तो अभी बन ही रहा होता। ऐसा नहीं है कि हमारे यहां पुल नहीं गिरते, लेकिन वे बनने में ही इतना समय खा लेते हैं कि गिर जाने पर किसी को उसकी कमी महसूस नहीं होती। जहां लोग पुल का उपयोग करने में आनाकानी करते हों, वहां पुल बनाया जाना चाहिए, ताकि कम से कम लोग उस पर नजर आएं और उसके गिरने का डर भी नहीं रहे। पुल बनाने के समय नौकरी पर लगा जूनियर इंजीनियर पुल के पूरे होते-होते यदि चीफ इंजीनियर बनकर रिटायर हो जाता है, तो समझ में आ जाना चाहिए कि पुल बनाना कितना मुश्किल काम है।
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हमारे कई पुल हैं, जो पूरे बन गए हैं, मगर आज भी कायम हैं, तो वजह यही है कि जिस तरह हमें चीनी सामान पर भरोसा नहीं है, उसी तरह हमारे लोगों को भी यकीन नहीं होता कि पुल पूरा बन भी गया है। वह तो मंत्री के आने के बाद ही लोगों के हवाले होता है, और ऐसा कभी नहीं हुआ कि पुल के उद्घाटन में ही मंत्री दब गए हों!