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वक्त से थोड़ा उधार
स्टीव स्मिथ
Updated Sat, 06 Apr 2013 11:36 PM IST
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लंदन की सुविख्यात लेखिका और कवियत्री फ्लोरेंस मारग्रेट स्मिथ ने स्टीव स्मिथ के नाम से उपन्यास और कविताएं दोनों ही विधा में अपनी कलम चलाई। 1969 में उन्हें कविताओं के लिए क्वीन्स गोल्ड मेडल दिया गया। उनकी कविताओं में ब्रिटिश मध्यवर्गीय जीवन के कई रंग दिखाई देते हैं। इस कविता का अंग्रेजी से अनुवाद किया है हिमानी दीवान ने-
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मैं दया नहीं मांगूंगी
नहीं कहूंगी किसी से
मुझे समझने की कोशिश करो।
नहीं मांगूंगी कुछ पल की शांति
और इन मुश्किल भरे पलों में
मैं मुक्ति की दुआ भी नहीं करुंगी।
नहीं कहूंगी कि ये
दर्द और पीड़ा खत्म हो जाए।
मैं भगवान से मौत की कामना
भी नहीं करुंगी
नहीं कहूंगी कि अपने
सारे कामों से थोड़ा अवकाश लेकर
मेरी इस पुकार पर ध्यान दें।
कुछ भी नहीं बोलूंगी,
कुछ नहीं कहूंगी
सवाल नहीं पूछूंगी
प्रार्थना नहीं करूंगी
जैसा कि मैं उन दिनों करती थी
जब मैं कमजोर थी।
अब मैं मजबूत हूं और
उदासी की छांव में हूं
यह ऐसा ही है जैसे
किसी जादू के परदे में होना
और अब वक्त से मैंने
आज को उधार मांग लिया है
अब मैं कल की चिंता नहीं करती हूं।