फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Voices rising against conversion

धर्मांतरण के खिलाफ उठती आवाजें

Thu, 28 Mar 2019 07:11 PM IST
mariana babar मरिआना बाबर
Updated Thu, 28 Mar 2019 07:11 PM IST
विज्ञापन
Voices rising against conversion
विरोध

इन दिनों पाकिस्तान में यह सवाल कई लोग पूछ रहे हैं, हिंदू लड़कों का अपहरण क्यों नहीं होता, उन्हें इस्लाम में धर्मांतरित करके मुस्लिम लड़कियों से शादी क्यों नहीं कराई जाती? हमेशा हिंदू लड़कियों का ही अपहरण करके, उन्हें इस्लाम में धर्मांतरित कर मुस्लिम लड़कों से शादी क्यों कराई जाती है? ये सवाल उस विवाद के संदर्भ में पूछे जा रहे हैं, जो सिंध के भीतरी इलाके दहारकी में दो हिंदू लड़कियों को उनके अपने घरों से कथित अपहरण और जबरन धर्मांतरण के बाद शादी से उठे हैं।


loader

दशकों से दहारकी में मुस्लिमों की बड़ी आबादी हिंदुओं, सिखों और ईसाइयों की छोटी-सी आबादी के साथ सद्भाव में जीती रही है। लोग यहां अपनी आस्था के अनुसार इबादत और पूजा करने के लिए स्वतंत्र हैं। लेकिन इस क्षेत्र की शांति तब भंग हुई, जब इन पीड़ित हिंदू लड़कियों के परिवारों ने इन इनके अपहरण, जबरन इस्लाम में धर्मांतरण और मुस्लिम लड़कों से शादी कराने का विरोध किया।
 
दिलचस्प बात यह है कि ठीक इसी समय भारत में हिंदू होली का त्योहार मना रहे थे, खबरें हैं कि उस दौरान गुरुग्राम में एक मुस्लिम परिवार को नृशंसतापूर्वक पीटा गया। आखिर इस उपमहाद्वीप के लोगों को आस्था के नाम पर क्या हो गया है? धर्म के नाम पर आखिर इतनी असहिष्णुता क्यों?

उन लड़कियों के परिवारों ने जोर देकर कहा कि वे लड़कियां नाबालिग हैं और इसे अदालत में चुनौती दी जाएगी कि जब तक कोई नागरिक बालिग नहीं हो जाता, तब तक धर्मांतरण अवैध होना चाहिए। पाकिस्तान के लोगों ने आवाज उठाई और इन हिंदू लड़कियों के धर्मांतरण के खिलाफ सोशल मीडिया पर जबर्दस्त अभियान छेड़ा गया, जिसने सरकार को हरकत में आने पर मजबूर किया है। वे लड़कियां तब तक सरकार के संरक्षण में रहेंगी, जब तक अदालत उनके मामले का फैसला नहीं करेगा।

उनके मामले की सुनवाई न तो पंजाब में होगी, जहां से उन्हें बरामद किया गया और न ही सिंध में, जो उनका पैतृक प्रांत है, बल्कि सरकार ने महसूस किया कि इस्लामाबाद हाई कोर्ट में सुनवाई होने से न केवल वे सुरक्षित रहेंगी, बल्कि उनके मामले की निष्पक्ष सुनवाई भी होगी।

कई वर्ष पहले मैंने सिंध में इस तरह के अपहरण और जबरन धर्मांतरण पर शोध के लिए कुछ हफ्ते बिताए थे, जहां ऐसे मामले होते रहते हैं। मैंने पीड़ित लड़कियों, उनके परिजनों और उन मुसलमानों से बातें की थीं, जिनके ऊपर ऐसे धर्मांतरण का आरोप लगा था। इनमें से ज्यादातर आरोपी निरक्षर और गरीब थे। कई मामलों में मैंने देखा कि स्थानीय पीरों का इनमें हाथ होता था, जिनके अनुयायियों की संख्या काफी ज्यादा है। इस क्षेत्र में सभी धर्मों में व्याप्त भयानक गरीबी के कारण ये पीर बहुत प्रभावी होते हैं। अब पूरे पाकिस्तान में यह आवाज उठ रही है कि जबरन धर्मांतरण इस्लाम में अवैध है और इनमें शामिल पीरों और अन्य लोगों को कठोर दंड मिलना चाहिए। चूंकि समृद्ध हिंदू महिलाओं या पुरुषों के इस्लाम में धर्मांतरण के मामले दुर्लभ हैं, इसलिए अब यह प्रमाणित हो गया है कि ज्यादातर धर्मांतरण अत्यधिक गरीबी में जी रहे लोगों का होता है।

कुछ युवा लड़कियों ने यह भी बताया कि ये शादियां उनकी मर्जी से हुई हैं, क्योंकि दोनों के अभिभावक एक-दूसरे को पसंद करते थे और चूंकि मुस्लिम लड़कों को हिंदू समुदाय में स्वीकार नहीं किया जाता, तो नए जीवन की शुरुआत के लिए इस्लाम में धर्मांतरण उन्हें आसान लगा। हालांकि जबरन धर्मांतरण की घटनाओं को अब प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा गंभीरता से लिया जा रहा है, जिन्होंने सरकार गठन के बाद से ही पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों के हित में कदम उठाए हैं। वह व्यक्तिगत रूप से करतारपुर गलियारे के निर्माण में दिलचस्पी ले रहे हैं और यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि इस साल नवंबर तक यह काम पूरा हो जाए।

पाकिस्तान के मीडिया में भी जबरन धर्मांतरण का मुद्दा सुर्खियों में है। उदाहरण के लिए, अंग्रेजी दैनिक द डॉन ने इस तरह की घटनाओं के पीछे सत्ता की साठगांठ-राजनीतिक रूप से प्रभावशाली परिवारों, मौलवियों और मदरसों की भूमिका को रेखांकित किया है, जो सर्वज्ञात है, जबकि पाकिस्तान के धार्मिक अल्पसंख्यकों ने बार-बार पुलिस और न्यायिक अधिकारियों की उदासीनता को रेखांकित किया है।

हालांकि इन दो हिंदू लड़कियों का मामला अभी गर्म है, लेकिन नेशनल एसेंबली में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। पाकिस्तान तहरीक-ए इंसाफ ने दो विधेयक पेश किए हैं, जिनमें ऐसे अपराधों में शामिल लोगों के लिए सजा बढ़ाने और बाल विवाह को संज्ञेय अपराध बनाने की मांग की गई है। इन दोनों विधेयकों-बाल विवाह निरोधक अधिनियम (संशोधन) विधेयक, 2019 और आपराधिक कानून (अल्पसंख्यकों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 के अलावा तहरीक-ए-इंसाफ के सांसद डॉ. रमेश कुमार वंकवाणी ने सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के अल्पसंख्यक सांसदों के समर्थन से ऐसी घटनाओं की निंदा करते हुए एक प्रस्ताव भी पेश किया। पांच सूत्री इस प्रस्ताव में जबरन धर्मांतरण के खिलाफ बिल को तत्काल पारित करने का आह्वान किया गया, जिसे 2016 में सिंध एसेंबली द्वारा सर्वसम्मति से पारित किया गया था और बाद में कट्टरपंथियों के दबाव के बाद सभी विधानसभाओं से वापस ले लिया गया था।

इन विधेयकों में से एक में जबरन धर्मांतरण करवाने वाले व्यक्ति को पांच साल से लेकर आजीवन कारावास के प्रावधान का प्रस्ताव है।

प्रस्ताव में मियां मिठू भरचूंडी और पीर अयूब जन सरहिंदी के नाम का उल्लेख है, जो जबरन धर्मांतरण के लिए कुख्यात हैं। प्रस्ताव में मांग की गई है कि धर्म की आड़ में नफरत फैलाने वालों के खिलाफ प्रतिबंधित संगठनों की तरह पेश आया जाए। सिंध प्रांत की इन दोनों हिंदू लड़कियों से संबंधित मामले की सच्चाई तो जांच के बाद सामने आएगी, लेकिन इमरान खान का यह बयान भरोसा दिलाता है कि उनकी सरकार उन व्यवस्थागत खामियों को दूर करेगी, जिनके कारण धार्मिक उत्पीड़न के ऐसे मामले पनपते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed