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नए भारत की संकल्पना की विजय: जब 2014 में सत्ता संभाली थी, तब देश में चुनौतियां बहुत बड़ी थीं
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मोदी की जीत
- फोटो : Amar Ujala
लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की जीत 2014 की महाविजय से भी कहीं ज्यादा निर्णायक सिद्ध हुई। ‘विश्वास’ नामक शब्द भारतीय राजनीति के शब्दकोश में कई दशकों बाद वापस लौटकर आया है। पिछले पांच साल में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत में परिवर्तन और प्रगति के आसपास लड़ा गया यह चुनाव सत्ता समर्थक अभियान केंद्रित था, जिसका केंद्रबिंदु परिवर्तन एवं प्रगति रहा। अधिकांश देशवासियों ने इस प्रगति को जारी रखने की इच्छा जताई है, जिसमें नए भारत की संकल्पना, गरीबी मुक्त भारत और ऐसी अर्थव्यवस्था है, जो लोगों को किसी भी आंतरिक एवं बाह्य खतरे से बचाने में सक्षम हो।
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अब चुनाव की गर्मी थम चुकी है। भारतीय राजनीति में रचनात्मक परिवर्तन और भारतीय मतदाताओं की आयु स्थायी है। लाखों भारतीयों का ध्यान इस नए भारत के बेहतर भविष्य के लिए है। विपक्ष के झूठ एवं अपशब्दों से भरे अभियान को सरल एवं शक्तिशाली विचारों से हार मिली, और लोगों ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भरोसा किया।
मैंने पहले भी चुनावों में प्रचार किया है। पर भाजपा कार्यकर्ता के रूप में यह मेरा पहला चुनावी अभियान था, जब मैंने कर्नाटक चुनाव प्रबंधन के सह-संयोजक के रूप में कार्यकर्ताओं एवं नेताओं के साथ कर्नाटक एवं केंद्र में काम किया। सार्वजनिक कार्यक्रमों, रोड शो या छोटे दलों के साथ बातचीत और वोटरों के साथ हर बातचीत में- देश में प्रगति को जारी रखने के लिए उनका विश्वास एवं दृढ़ संकल्प की भावना बहुत स्पष्ट थी। बहुत सारे रोड शो के दौरान दर्शकों की सहज भागीदारी बहुत ही सामान्य थी।