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वेंकैया गारू: भारत की सेवा में समर्पित जीवन, राष्ट्र को बनाते हैं बेहतर और अधिक जीवंत

Mon, 01 Jul 2024 06:09 AM IST
Narendra Modi नरेंद्र मोदी
Updated Mon, 01 Jul 2024 06:09 AM IST
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सार
वर्ष 1978 में आंध्र प्रदेश ने जब कांग्रेस के पक्ष में मतदान किया, तब वेंकैया जी प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद युवा विधायक के रूप में जीतकर आए थे। पांच साल बाद भी वह भाजपा विधायक चुने गए। उनकी जीत ने आंध्र समेत दक्षिण में भाजपा के लिए भविष्य के बीज बोए थे।
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Venkaiah Naidu: Dedicated his life to service of India, making the nation better and more vibrant
प्रधानमंत्री मोदी और पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू। - फोटो : पीटीआई

विस्तार

आज भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति और राष्ट्रीय राजनीति में शुचिता के प्रतीक एम. वेंकैया नायडू गारू का जन्मदिवस है। वेंकैया नायडू जी आज 75 वर्ष के हो गए हैं। उन्होंने राष्ट्रसेवा और जनसेवा को हमेशा सर्वोपरि रखा है। मैं उनके दीर्घायु होने और स्वस्थ जीवन की कामना करता हूं। उनका जीवन सेवा, समर्पण और संवेदनशीलता की यात्रा है। अपने प्रारंभिक दिनों से लेकर उपराष्ट्रपति जैसे शीर्ष पद तक, उन्होंने भारतीय राजनीति की जटिलताओं को जितनी विनम्रता से पार किया, वह अपने आपमें एक उदाहरण है। उन्हें दलगत राजनीति से ऊपर हर पार्टी में सम्मान मिला है। हमने लंबे समय तक अलग-अलग दायित्वों को संभालते हुए साथ काम किया है, और मैंने हर भूमिका में उनसे बहुत कुछ सीखा है। जीवन के हर पड़ाव पर आम लोगों के प्रति उनका स्नेह और प्रेम कभी नहीं बदला।



वेंकैया जी सक्रिय राजनीति से आंध्र प्रदेश में छात्र नेता के रूप में जुड़े थे। उन्होंने राजनीति के पहले पड़ाव पर ही प्रतिभा, वक्तृत्व क्षमता और संगठन कौशल की अलग छाप छोड़ी थी। उन्होंने विचार को व्यक्तिगत हितों से ऊपर रखा और जनसंघ एवं भाजपा को मजबूत किया। लगभग 50 साल पहले जब कांग्रेस पार्टी ने देश में आपातकाल लगाया था, तब युवा वेंकैया गारू ने आपातकाल विरोधी आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया और जेल गए। 1980 के दशक के मध्य में, जब एनटीआर सरकार को कांग्रेस ने गलत तरीके से बर्खास्त कर दिया था, तब वह फिर से लोकतांत्रिक सिद्धांतों की रक्षा के लिए हुए आंदोलन की अग्रिम पंक्ति में थे।


वर्ष 1978 में आंध्र प्रदेश ने जब कांग्रेस के पक्ष में मतदान किया, तब वेंकैया जी प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद युवा विधायक के रूप में जीतकर आए थे। पांच साल बाद भी वह भाजपा विधायक चुने गए। उनकी जीत ने आंध्र समेत दक्षिण में भाजपा के लिए भविष्य के बीज बोए थे। उनसे प्रभावित होकर एनटीआर जैसे दिग्गज उन्हें अपनी पार्टी में शामिल करना चाहते थे, पर वह अपनी मूल विचारधारा पर अडिग रहे। उन्होंने आंध्र प्रदेश में भाजपा को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाई। उन्होंने विधानसभा में पार्टी का नेतृत्व किया और आंध्र प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष भी बने।

1990 के दशक में भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने वेंकैया गारू के परिश्रम और प्रयासों को पहचानते हुए उन्हें पार्टी का अखिल भारतीय महासचिव नियुक्त किया। 1993 से राष्ट्रीय राजनीति में उनका कार्यकाल शुरू हुआ था। दिल्ली आने के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। कुछ ही समय बाद वह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बने। वर्ष 2000 में, जब अटल जी सरकार बना रहे थे, तो अटल जी ने उनसे उनकी इच्छा पूछी, तो उन्होंने ग्रामीण विकास मंत्रालय को चुना। एक मंत्री के रूप में ‘प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना’ को जमीन पर उतारने में उनकी अहम भूमिका थी।

2014 में एनडीए सरकार ने सत्ता संभाली, तो उन्होंने शहरी विकास, आवासन एवं शहरी गरीबी उन्मूलन जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों को संभाला। उनके कार्यकाल के दौरान ही हमने ‘स्वच्छ भारत मिशन’ और शहरी विकास से संबंधित कई महत्वपूर्ण योजनाएं शुरू कीं। वह एक प्रभावी संसदीय कार्य मंत्री थे। सदन में पक्ष-विपक्ष की बारीकियों को समझते थे। जब संसदीय मानदंडों और नियमों की बात होती थी, तब वह नियमों को लेकर भी उतना ही स्पष्ट नजर आते थे। वर्ष 2017 में, हमारे गठबंधन ने उन्हें उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में नामित किया। राज्यसभा के सभापति के रूप में उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि युवा, महिला और पहली बार चुने गए सांसदों को बोलने का मौका मिले। उन्होंने सदन में उपस्थिति पर बहुत जोर दिया, समितियों को अधिक प्रभावी बनाया और बहस के स्तर को भी ऊंचा उठाया। जब अनुच्छेद 370 और 35 (ए) को हटाने का निर्णय पटल पर रखा गया, तो वेंकैया गारू ही सभापति थे। वह युवा, जिसने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के 'एक विधान, एक निशान, एक प्रधान' के संकल्प के लिए जीवन समर्पित किया था, जब वह सपना पूरा हुआ, तो वह सभापति के पद पर आसीन था।

काम और राजनीति के अलावा, वेंकैया गारू एक उत्साही पाठक और लेखक भी हैं। आशा है कि युवा कार्यकर्ता, निर्वाचित प्रतिनिधि और सेवा करने का जुनून रखने वाले सभी लोग उनके जीवन से सीख लेंगे और उन मूल्यों को अपनाएंगे। यह वेंकैया गारू जैसे लोग ही हैं, जो हमारे राष्ट्र को बेहतर और अधिक जीवंत बनाते हैं।

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