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अमेरिका बनाम वेनेजुएला: ट्रंप की जिम्मेदारी यहीं खत्म नहीं होती, उन्हें कुछ और भी सुनिश्चित करना होगा

Mon, 05 Jan 2026 07:47 AM IST
पवन पांडेय थॉमस एल फ्रीडमैन, द न्यूयॉर्क टाइम्स
थॉमस एल फ्रीडमैन, द न्यूयॉर्क टाइम्स Published by: पवन पांडेय Updated Mon, 05 Jan 2026 07:47 AM IST
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सार
ट्रंप से पहले भी अमेरिका के राष्ट्रपति दुनिया के विभिन्न देशों में ऐसी कार्रवाइयां करते रहे हैं, पर उन देशों का क्या हाल हुआ, सब जानते हैं। वेनेजुएला पर हमले की वजहें हो सकती हैं, लेकिन ट्रंप को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि यह राष्ट्र अस्थिरता का अड्डा न बन जाए।
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US-Venezuela Row: Trump's responsibility doesn't end here, he needs to ensure something else too
Donald Trump - फोटो : PTI

विस्तार

यह कहना फिलहाल बहुत जल्दबाजी होगी कि वेनेजुएला में आगे क्या होगा, खासकर ट्रंप प्रशासन द्वारा राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करके सुनवाई के लिए अमेरिका ले जाने के बाद। लेकिन अमेरिका द्वारा दूसरे इलाकों में ऐसे दखल के आधार पर मेरे मन में बहुत सारे सवाल हैं।


19 मार्च, 2011 को नाटो के नेतृत्व वाले गठबंधन ने लीबिया के गृहयुद्ध में सिर्फ हवाई ताकत का इस्तेमाल करके सैन्य दखल दिया, जिससे अंततः कर्नल मुअम्मर अल-गद्दाफी की सरकार गिर गई, और उसी साल अक्तूबर में विपक्षी ताकतों ने उन्हें मार डाला। 29 मार्च, 2011 को मैंने लेख लिखा था, जिसका निष्कर्ष था, ‘डियर लॉर्ड, प्लीज मेक प्रेसिडेंट ओबामा लकी।’ उस लेख का विषय यह था कि बराक ओबामा ने अभी-अभी लीबिया के नेता को हटाने में मदद की थी, लेकिन उसके बाद की घटनाओं को संभालने के लिए हमारे पास जमीन पर कोई सेना नहीं थी। तब मैंने लिखा था कि लीबिया में किसी भी अच्छे नतीजे के लिए जमीन पर सैनिकों की जरूरत होगी-या तो जैसा कि हम चाहते हैं, विद्रोहियों को गद्दाफी को हटाने में सैन्य मदद के तौर पर, या गद्दाफी के बाद शांति बनाए रखने वालों व कबीलों व गुटों के बीच रेफरी के तौर पर, ताकि लोकतांत्रिक बदलाव में मदद मिल सके। पता चला कि विद्रोहियों को सिर्फ हवाई सुरक्षा देकर, हमारे दखल ने जमीन पर हालात को स्थानीय ताकतों, कबीलों और लड़ाकों के भरोसे छोड़ दिया, जो तब भी बंटे हुए थे और आज भी बंटे हुए हैं। लगभग 15 साल बाद भी, लीबिया अशांत है, जहां दो सरकारें नियंत्रण के लिए लड़ रही हैं।


मैं वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कब्जे की बात नहीं कर रहा हूं, पर मैं यह सोच रहा हूं कि हम जमीन पर सेना की मौजूदगी के बिना वहां की घटनाओं व रुझानों को अपने और वेनेजुएला के लोगों के हितों के हिसाब से कैसे ढाल सकते हैं। अगर आप खाना खा रहे हैं, तो ग्रैब-एंड-गो (खाओ और खिसको) का आइडिया बढ़िया है, लेकिन भू-राजनीतिक रणनीति के तौर पर इसकी कुछ सीमाएं हैं। एक न्यूज कॉन्फ्रेंस में, राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बात को माना और इससे पीछे नहीं हटे। उन्होंने कहा, ‘हम देश तब तक चलाएंगे, जब तक हम एक सुरक्षित, सही और विवेकपूर्ण बदलाव नहीं कर लेते। हम यह जोखिम नहीं ले सकते कि कोई और सत्ता संभाल ले।’ उन्होंने यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़ी, तो अमेरिका दूसरा बड़ा हमला करने के लिए भी तैयार है। और जरूरत पड़ी, तो अपनी सेना भी वहां भेजेंगे। ट्रंप ने यह कहने में जरा भी गुरेज नहीं किया कि हम इराक और अफगानिस्तान के बाद अमेरिका का सबसे बड़ा राष्ट्र-निर्माण प्रोजेक्ट शुरू कर रहे हैं। क्या उन्हें अंदाजा भी है कि यह कितना मुश्किल और लंबा चलने वाला प्रोजेक्ट हो सकता है?

ट्रंप प्रशासन वेनेजुएला को कैसे चलाने वाला है, यह साफ नहीं है। क्या मादुरो सरकार के बचे हुए लोगों के साथ उनका कोई समझौता हुआ है कि वे हट जाएं? क्या ट्रंप मादुरो की बची हुई टीम को चेतावनी देने की योजना बना रहे हैं कि वे चले जाएं और फिर अमेरिका चुनाव करवाएगा? यह साफ है कि अमेरिका के लिए वेनेजुएला को चलाना एक बहुत बड़ा काम होगा, और ट्रंप के ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ अभियान से जुड़े लोगों का एक बड़ा हिस्सा इसे शायद ही स्वीकार करेगा। मादुरो समर्थक और विरोधी गुटों के बीच सत्ता का संतुलन कैसा होगा और इससे किस हद तक अराजकता फैलेगी? कुछ देश के नेतृत्व को जब आप खत्म कर देते हैं, तो वे अंदर से टूट कर खुद ही बिखर जाते हैं; जैसे यमन के साथ हुआ। लेकिन दूसरे देश विध्वंस फैलाते हैं, जैसे सीरिया ने अपने तानाशाह बशर अल-असद के बाद अपने आसपास के देशों में शरणार्थी, ड्रग्स और अस्थिरता फैला दी। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त के अनुसार, पहले से ही लगभग वेनेजुएला के अस्सी लाख लोग अपना देश छोड़कर जा चुके हैं, जिससे यह दुनिया के सबसे बड़े विस्थापनों में से एक बन गया है, जिससे पूरे क्षेत्र के लिए एक मानवीय चुनौती खड़ी हो गई है। क्या मादुरो को हटाने व उनके समर्थकों और विरोधियों के बीच झड़पों से शरणार्थी समस्या और बढ़ेगी, जिससे लैटिन अमेरिका के और भी देश अस्थिर हो जाएंगे?

अमेरिकी न्याय मंत्रालय ने बताया कि अमेरिका ने वेनेजुएला के नेता पर ड्रग तस्करी के आरोप लगाए हैं, और फिर उसे उसकी राजधानी से पकड़ लिया है। जब नाटो ने लीबिया में गद्दाफी को हटाया था, तो उसने पहले यूएन का प्रस्ताव लिया था। चीन इस अमेरिकी कार्रवाई को एक और मिसाल के तौर पर देख सकता है, जो ताइवान की सरकार को गिराने के समय उसे सही ठहराएगी। चीन इसलिए भी खुश होगा कि अमेरिका पहले से कहीं ज्यादा अपने ही क्षेत्र में व्यस्त रहेगा और उसके पास चीन को रोकने के लिए बहुत कम समय और ऊर्जा होगी। ध्यान रखिए कि वेनेजुएला का ज्यादातर तेल चीन को निर्यात होता है। जहां तक पुतिन की बात है, वह जरूर सोच रहे होंगे कि अगर ट्रंप प्रशासन मादुरो के बाद के वेनेजुएला को संभालने में फंस जाता है, तो उसके पास यूक्रेन के लिए और भी कम समय, ऊर्जा व संसाधन बचेंगे। जेलेंस्की को भी आज इसी बात की चिंता होगी। यूक्रेन और गाजा में शांति प्रक्रिया अब भी अधूरी है, ऐसे में ट्रंप प्रशासन कितने काम एक साथ संभाल पाएगा?

2003 में बुश प्रशासन के इराक पर हमला करने से लगभग एक महीने पहले, मैंने एक लेख में कहा था कि इराक पर किसी भी हमले का पहला नियम मिट्टी के बर्तनों की दुकान का नियम है: अगर आप इसे तोड़ते हैं, तो इसकी जिम्मेदारी आपकी हो जाती है। अगर हम इराक को तोड़ते हैं, तो 2.3 करोड़ लोगों के देश को फिर से बनाने की प्राथमिक जिम्मेदारी हमारी ही होगी। विदेश मंत्री कॉलिन पॉवेल ने सीएनएन के लैरी किंग और बाद में बॉब वुडवर्ड को बताया कि उन्होंने राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश को इराक युद्ध का विकल्प बताते समय मेरे फॉर्मूले को अपनाया था।

आज वही सवाल पूछा जा सकता है। अब वेनेजुएला में आगे जो भी होगा, उसकी जिम्मेदारी ट्रंप की है। अगर इससे वेनेजुएला के लोगों के लिए एक नई और बेहतर सरकार बनती है, तो बहुत बढ़िया। ट्रंप को उस प्रक्रिया को शुरू करने के लिए याद किया जाएगा। पर अगर इससे वेनेजुएला अस्थिरता का एक बड़ा अड्डा बन जाता है, तो ट्रंप को लंबे समय तक उसके लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा। जैसा कि मैंने लीबिया के बारे में ओबामा के लिए पहले कहा था, वैसे ही दुआ करता हूं, कि राष्ट्रपति ट्रंप भाग्यशाली हों। ©The New York Times 2026
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