आईएसआई की साजिश को समझें
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कश्मीर घाटी में श्रीनगर के लोकसभा उपचुनाव के मतदान के दौरान भड़की हिंसा वहां अस्थिरता के नए दौर की कहानी बयां कर रही है। इससे करीब दस दिन पहले कुख्यात आतंकी तौसीफ अहमद की मुठभेड़ में मौत हुई थी, जिसे बचाने के लिए स्थानीय लोगों ने पत्थरबाजी तक की थी। उसके एक मकान में छिपे होने की सूचना मिलने के बाद सुरक्षाबलों ने क्षेत्र की घेराबंदी की थी। उसी दौरान पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने सोशल मीडिया के जरिये कश्मीरी जनता को भड़काऊ संदेश भेजकर स्थानीय लोगों को सुरक्षा बलों को बाधित करने के लिए प्रेरित किया। ऐसी ही अफरातफरी का फायदा उठाकर आतंकी सुरक्षा घेरे को तोड़कर भाग निकलते हैं।
कुछ समय पहले छद्म मानवाधिकार समर्थकों ने भारतीय सेना प्रमुख जनरल रावत की उस चेतावनी का भारी विरोध किया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि इस प्रकार की आतंकी घटनाओं में जानबूझकर पत्थरबाजी या प्रदर्शन करके प्रदर्शनकारी सुरक्षाबलों तथा सेना की वैधानिक कार्रवाई में बाधा पहुंचाकर आतंकियों की मदद करते हैं। ऐसे लोगों के बारे में उन्होंने कहा था कि ऐसे प्रदर्शनकारियों को भी आतंकी गतिविधियों में लिप्त मानकर इनके विरुद्ध भी आतंकियों जैसा ही बर्ताव किया जाएगा। बडगाम की उपरोक्त घटना से सेना प्रमुख की चेतावनी कानून की इस कसौटी पर खरी उतरती नजर जाती है।
स्थानीय लोगों की इस कार्रवाई के पीछे आईएसआई है, यह बडगाम की घटना ने फिर साबित किया है। इस घटना ने दिखाया कि कैसे आईएसआई कश्मीर में खरीदे गए एजेंटों के जरिये प्रदर्शन तथा पत्थरबाजी कराकर घाटी की शांति भंग करके दुनिया को यह दिखाना चाहता है कि कश्मीर की जनता भारत के साथ नहीं रहना चाहती, जबकि सचाई इसके विपरीत है। आईएसआई की इस सक्रियता के पीछे एक वजह यह भी है कि पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिली सफलता से पाकिस्तान के राजनीतिक गलियारे में हलचल मच गई है कि प्रधानमंत्री मोदी लगातार मजबूत हो रहे हैं और वह कश्मीर पर कोई सख्त फैसला कर सकते हैं।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने खुलासा किया है कि आईएसआई किस तरह कश्मीरी अलगाववादियों एवं आतंकियों को धन पहुंचा रही है। जांच में उसने पाया है कि उड़ी तथा पुंछ के चक्कनदाबाग शहरों से कुछ भारतीय कंपनियां पाकिस्तानी कंपनियों से सड़क मार्ग से सूखे मेवों और अन्य सामान का व्यापार करती हैं, जिसका टर्न ओवर 3,000 करोड़ रुपये है। इस व्यापार में लगी पांच कंपनियां आईएसआई के इशारे पर अपने मुनाफे का एक हिस्सा घाटी में आतंकी और अलगवादी गतिविधियों में लग रहा है। इसी धन से वहां के बेरोजगार नौजवानों से पत्थरबाजी करवाई जाती है।
कश्मीर की ज्यादातर जनता असलियत जानती है कि पाकिस्तान में किस प्रकार से चारों तरफ आतंकवाद तथा भय का वातावरण है। पाक अधिग्रहित कश्मीर में स्थानीय कश्मीरी जनता दूसरी श्रेणी के नागरिकों की तरह पहचानी जाती है, जबकि वहां पर ज्यादातर कृषि भूमि पर पंजाबी जमींदारों का कब्जा है। कश्मीर का नौजवान देश की मुख्यधारा से जुड़ना चाहता है, इसका प्रदर्शन हाल में वहां सेना तथा अर्धसैनिक बलों की भर्तियों के समय देखा जा चुका है कि किस तरह बड़ी संख्या में जवान भर्ती के लिए आए थे। सरकार को कश्मीर की जमीन तथा साइबर स्पेस पर पूरी निगरानी रखकर आईएसआई के इरादे को ध्वस्त करके कश्मीर में दोबारा अमन शांति का माहौल कायम करना चाहिए।