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भिखारी का यू टर्न

Mon, 16 Sep 2013 06:46 PM IST
अरविंद तिवारी
अरविंद तिवारी Updated Mon, 16 Sep 2013 06:46 PM IST
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U turn of begger

कल एक भिखारी ने मुझे मेरी औकात बता दी। जब मैंने उसे एक रुपया दिया, तो वह बोला, लगते तो पढ़े-लिखे हो, मगर अक्ल से पैदल हो। जानते हो रुपया कितना नीचे चला गया। तुम्हारी तरह अगर सब मुझे एक ही रुपया देने लगें, तो सौ आदमियों से भीख मांगने के बाद ही मैं अच्छे ढाबे पर खाना खा सकूंगा? मैंने कहा, तुमने सरकार का वह विज्ञापन जरूर देखा होगा, जिसमें लिखा है कि भूख अब इतिहास बनेगी। जाहिर है, आने वाले समय में आप जैसे लोग इतिहास बन जाएंगे। सरकार के सौजन्य से सभी भूखे लोग ‘भूतकाल’ को प्राप्त हो जाएंगे।

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भिखारी मेरा रुपया फेंककर बोला, ढाबों से प्याज गायब हो गया है। काजू-बादाम के भाव आसमान छू रहे हैं। रुपया जैसे-जैसे गिर रहा है, ड्राई फ्रूट्स महंगे हो रहे हैं। हमारे जैसे भिखारी कुपोषण के शिकार हो रहे हैं! आप जैसे कड़के एक रुपया फेंकते रहे, तो हम जैसे भिखारी सस्ता सरकारी राशन कैसे खरीद पाएंगे? आज रुपया पूरी तरह डॉलर की गिरफ्त में है। अमेरिका का अंधानुकरण विकास नहीं है। सरकार कारों की बिक्री और शेयर मार्केट को देखकर खुश होती है। वह भिखारियों की संख्या नहीं देखती। वह गुब्बारे में हवा तो भरती है, पर उसके लीकेज पर ध्यान नहीं देती। अमेरिका के भरोसे जो रहता है, अमेरिका ही उसे नंगा करता है...।
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मुझे लगा वह कुछ ज्यादा ही बोल रहा है। सरकार की आलोचना तो ठीक है, मगर भारत के स्वाभिमान पर उंगली उठाने वाले को जवाब देना चाहिए। मैंने उसे तत्काल सौ का नोट थमाया, तो उसका चेहरा पीएम इन वेटिंग की तरह खिल गया। वह बोला, भाई साहब, मैं कल की बात कर रहा था। आज तो अपना रुपया चैन्नई एक्सप्रेस की तरह आगे बढ़ रहा है। निर्यात में जबर्दस्त वृद्धि हुई है। सेंसेक्स नई-नई ऊंचाइयां छू रहा है। अपने पीएम जैसा नेता देश को सौभाग्य से मिल पाता है। वित्तमंत्री जी काफी मेहनत कर रहे हैं। रिजर्व बैंक के नए गवर्नर ने मोर्चा संभाल रखा है। देश की अर्थव्यवस्था पटरी पर आ रही है।
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मैंने कहा, माननीय भिखारी जी, आपने तो सियासी लोगों को भी मात कर दिया। सौ का नोट मिलते ही ऐसा यू टर्न लिया कि मेरी बोलती बंद हो गई। वह बोला, भाई साहब क्या करूं, मेरे रसरंजन का समय था और जेब एकदम खाली थी। यह सब नहीं कहता, तो आप अपनी जेब कैसे ढीली करते। इतना कहकर वह देसी शराब के ठेके की ओर बढ़ गया।

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