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दो राज्य, दो हत्याएं

Thu, 07 Jun 2018 06:44 PM IST
सुभाषिनी सहगल अली
सुभाषिनी सहगल अली Updated Thu, 07 Jun 2018 06:44 PM IST
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Two states, two murders
सुभाषिनी सहगल अली
केरल के कोट्टायम जिले में विगत 29 मई को एक युवक की लाश खेत में मिली। उसका नाम केविन था। केविन और नीनू प्रेम करते थे और  उन्होंने शादी करने का फैसला भी कर लिया था। पर नीनू के परिवार को यह शादी मंजूर नहीं थी। दोनों ईसाई थे, पर नीनू सीरियन ईसाई थी, जो ईसाइयों में ‘ब्राह्मण’ माने जाते हैं और उसका परिवार पैसे वाला भी था। जबकि केविन दलित ईसाई था और उसका परिवार गरीब था। हमारे समाज में जाति व्यक्ति के साथ परछाईं की तरह चिपकी रहती है।

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और फिर अमीर-गरीब के बीच की खाई तो बहुत ही गहरी है। केविन और नीनू के लिए जाति और धर्म के फासले ऐसे थे, जिन्हें पार करना बहुत मुश्किल था। नीनू के परिवार वालों ने स्थानीय पुलिस को अपनी तरफ करके दोनों को थाने बुलवाया और बहला-फुसला कर नीनू को अपने घर ले आए। उसके बाद नीनू के परिवार के मर्दों ने केविन के घर पर जाकर उसे जबर्दस्ती बाहर निकाला और बेरहमी से मार डाला। इस घटना पर कोहराम मच गया। भाजपा ने जिले में बंद की घोषणा कर डाली। हालांकि शव मिलने के तुरंत बाद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। थानेदार को निलंबित कर दिया गया। पुलिस कप्तान का तबादला हो गया और जिन दो पुलिसकर्मियों ने हत्यारों की मदद की थी, उन्हें भी जेल भेज दिया गया। 

नीनू अब केविन के परिवार के साथ रह रही है। दूसरी घटना उत्तर प्रदेश में उन्नाव जिले के माखी गांव की है, जहां दो परिवार आसपास रहते हैं। एक सेंगर परिवार है, जो राजनीतिक ताकत, धन की ताकत और दबंगई की ताकत रखता है। उसके बगल में उस लड़की का परिवार रहता है, जो गरीब है और जो भाजपा के विधायक सेंगर को भैया पुकारती थी। पर चार जून, 2017 को सब कुछ बदल गया, जब वह लड़की एक अन्य महिला के साथ उनके घर नौकरी की तलाश में गई। लड़की बताती है, 'मुझे एक कमरे में जाने के लिए कहा गया और वहां उन्होंने मेरे साथ बलात्कार किया।

बाद में मुझसे कहा गया कि अगर मैंने मुंह खोला, तो मेरे परिवार और पिता को मार डाला जाएगा। मुझे उसके लोगों ने 11 जून को उठा लेने के बाद कुछ दिन तक सामूहिक बलात्कार किया और फिर किसी के हाथ बेच दिया। वहीं से मुझे बरामद किया गया।' उसके बाद पीड़िता अपने चाचा के साथ मुख्यमंत्री आवास गई और ज्ञापन दिया, पर कुछ नहीं हुआ। पुलिस कहती रही कि विधायक का नाम लेना बंद कर दो। फिर लड़की के पिता पर झूठा मुकदमा दर्ज कर दिया गया और उन्हें पीटा भी गया। तब पीडिता फिर मुख्यमंत्री आवास पहुंची और उसने अपने ऊपर मिटटी का तेल छिडक कर आग लगा दी।

पुलिसकर्मियों ने आग बुझाकर उसे वहां से हटा दिया। उसके पिता भी गांव छोड़ चुके थे, पर अपनी मां को दवा देने वह गांव आए। उनकी मां कहती है ‘मैं उसकी मौत के लिए जिम्मेदार हूं। उसके पैरों को पकड़कर वे उसे घसीटकर ले गए।' पीड़ित लड़की की ग्यारह वर्षीय बहन कहती है, ‘मेरे पापा को खूब मारा। पानी डाल-डालकर मार रहे थे नीम के पेड़ से बांधकर।' उसके बाद लड़की के पिता को फर्जी मुकदमे के तहत जेल भेज दिया गया। दो-चार दिनों के बाद उनकी मौत हो गई और विधायक के भाई समेत तीन पुलिसकर्मी जेल भेज दिए गए। 

इस सबके बाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने यह कहते हुए सीबीआई को यह मामला सौंपा, कि उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था खत्म हो चुकी है, और विधायक की गिरफ्तारी के आदेश पारित किए। उसके बाद ही-घटना के नौ महीने बाद-विधायक को जेल भेजा गया। 

-लेखिका माकपा पोलित ब्यूरो की सदस्य हैं।
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