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सक्रिय होने से ही बचेगी छवि

Fri, 26 Jun 2015 08:44 PM IST
एम के वेणु
एम के वेणु Updated Fri, 26 Jun 2015 08:44 PM IST
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This silence can not change the image

कुछ ही हफ्ते पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गर्व से घोषणा कर रहे थे कि राजग सरकार ने अपने कार्यकाल का एक साल पूरा किया, लेकिन उसके दामन पर भ्रष्टाचार का दाग नहीं है। मोदी और अरुण जेटली, दोनों ने कई बार सार्वजनिक बयानों में जोर देते हुए इसे सरकार की बड़ी 'उपलब्धि' बताया। लेकिन आज यह दावा दरकता प्रतीत होता है, क्योंकि प्रवर्तन निदेशालय ने जिस भगोड़े पर काले धन को वैध करने का आरोप लगाया है, उसके कारण भाजपा नीत राजग सरकार कई विवादों में घिरती दिख रही है। पिछले हफ्ते सरकार ने यह साबित करने के लिए ललित मोदी के खिलाफ कई नोटिस जारी किए कि वह एक हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के मनी लांड्रिंग मामले की गंभीरता से जांच कर रही है। ये मामले और प्रवर्तन निदेशालय व सीबीआई द्वारा जांच किए जा रहे मनी लांड्रिंग के अन्य मामले काले धन पर प्रहार की भाजपा की घोषित प्रतिबद्धता के लिए परीक्षा हैं।

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इस बीच मीडिया ललित मोदी के साथ सुषमा स्वराज और वसुंधरा राजे जैसे वरिष्ठ भाजपा नेताओं के संबंधों को बेनकाब कर रहा है, पर इस संकट से निपटने में भाजपा पूरी तरह से नुकसान में है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस मामले पर चुप्पी साध रखी है, जो पार्टी की साख को नुकसान पहुंचा रहा है। सुषमा स्वराज या वसुंधरा राजे के पक्ष में बोलने के लिए कोई भी वरिष्ठ भाजपा नेता टीवी पर नहीं आया। जो छोटे प्रवक्ता टीवी बहस में शामिल होते हैं, वे कमजोर दिखाई देते हैं और गलतबयानी कर अपनी बात खत्म करते हैं कि अब तक ललित मोदी के खिलाफ कोई आरोप ही नहीं लगाया गया है। भाजपा के एक प्रवक्ता ने कहा कि इसलिए अभी उन्हें अपराधी नहीं कहा जा सकता। भाजपा को समझना होगा कि कानून से भागे व्यक्ति की रक्षा करना काले धन के प्रसार के आरोपी की रक्षा के समान है।
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प्रधानमंत्री ने समय रहते प्रतिक्रिया न जताकर इस मामले को इतना आगे बढ़ने दिया। अब लगता है कि वह एक ही कदम उठाने के प्रति दृढ़ हैं। और वह कदम है, कोई कार्रवाई न करना। प्रधानमंत्री और संघ के नेताओं ने कदाचित मान लिया कि यह मामूली समस्या है, जो जल्दी खत्म हो जाएगी। यह मामला सामने आने के बाद संघ ने सुषमा का समर्थन करते हुए कहा था कि ललित मोदी को अपनी बीमार पत्नी के पास पुर्तगाल जाने में मदद करना मानवीय कदम था। पर जल्दी ही साफ हो गया कि इस घपले के अन्य आयाम भी हैं, क्योंकि ललित मोदी को सुषमा स्वराज के वकील पति ने सलाह दी थी। ललित मोदी ने स्वराज कौशल को धन्यवाद का ई-मेल भेजा था। सुषमा की बेटी भी ललित मोदी के वकीलों की टीम में थी। इसलिए कानून से भागे व्यक्ति की मदद करना गैरकानूनी और हितों के टकराव का मामला लगता है। तथ्य यह है कि विदेश मंत्री ने यह सब विदेश सचिव और लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग की जानकारी के बगैर किया, जो और भी गंभीर मामला है।
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राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी स्वीकार किया कि उन्होंने ललित मोदी के आव्रजन आवेदन की पुष्टि के लिए व्यक्तिगत रूप से एक शपथ पत्र पर हस्ताक्षर किए थे। इससे यह राजनीतिक विवाद और बढ़ गया। बहुत से ऐसे दस्तावेज हैं, जो बताते हैं कि ललित मोदी ने वसुंधरा राजे के बेटे और भाजपा सांसद दुष्यंत सिंह की कंपनी में निवेश किया। ललित मोदी ने दुष्यंत सिंह की कंपनी के दस रुपये कीमत के शेयर का दस गुने से भी अधिक भुगतान कर अत्यधिक उदारता का परिचय दिया। वह भी तब, जब विशेषज्ञों के मुताबिक, कंपनी में पैसों का कोई लेन-देन नहीं हो रहा था, और कंपनी घाटे में थी। इसकी भी प्रवर्तन निदेशालय द्वारा जांच की जा रही है।

मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल की शुरुआत में ही उसे उसके खिलाफ विरोध के लिए ऐसा मुद्दा मिलेगा। कांग्रेस ने सुषमा और वसुंधरा, दोनों के इस्तीफे के साथ-साथ मनी लांड्रिंग एवं काले धन के सभी मामलों की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में व्यापक एसआईटी जांच की मांग की है। इससे मोदी सरकार की मुश्किलें और बढ़ सकती है, क्योंकि ऐसी जांच में संभवतः अडानी समूह (जिनके खिलाफ मनी लांड्रिंग के आरोप हैं) जैसे कॉरपोरेट से जुड़े अन्य लंबित मामलों को भी शामिल किया जा सकता है।

इस बीच दिल्ली की एक अदालत ने मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी के खिलाफ शिकायत स्वीकार कर भाजपा को बैकफुट पर ला दिया है। स्मृति ईरानी ने दरअसल चुनाव आयोग के समक्ष अलग-अलग मौकों पर अपनी शैक्षणिक योग्यता के बारे में अलग-अलग दावे किए थे।

बहरहाल, इस समय भाजपा और संघ का नेतृत्व बुरी स्थिति में है, और वह मोदी कांड से उपजे कई मुद्दों पर जवाब नहीं दे पा रहा। जेटली और गडकरी जैसे मंत्री कहते हैं कि कुछ भी गलत नहीं किया गया है और सुषमा स्वराज व वसुंधरा राजे ने ललित मोदी की मदद व्यक्तिगत तौर पर की है। एक सीमा से आगे इस स्पष्टीकरण में दम नहीं है। भाजपा में इस बात को लेकर पहले से ही अफवाहें हैं कि इस मामले को ठीक से नहीं निपटाया जा रहा है। पूर्व गृह सचिव और अब बिहार के भाजपा सांसद आर के सिंह ने कहा कि ललित मोदी जैसे भगोड़े की मदद करना गलत और गैरकानूनी है।


साख बचाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी को शीघ्र ही कुछ ठोस कार्रवाई करनी होगी। ज्यादा दिनों तक चुप रहना अच्छा नहीं होगा, क्योंकि विपक्ष मानसून सत्र में संसद के कामकाज को बाधित करेगा। इस समय भाजपा के पास कोई जवाब नहीं है, जो यूपीए शासन के दौरान हुए घोटाले को याद करने की उम्मीद करती है। नरेंद्र मोदी को यह एहसास होना चाहिए कि कांग्रेस को जनता ने 2014 के चुनाव में गंभीर दंड दिया। भाजपा की लोकसभा में 282 सीटें हैं, लिहाजा प्रधानमंत्री ने अगर अपनी सरकार के मौजूदा संकट पर चुप्पी नहीं तोड़ी, तो राजग का भी वही हाल होगा, जो यूपीए का हुआ।

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