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अगर आप भी गायत्री मंत्र जपते हैं तो जानें यह काम की बातें

Thu, 28 May 2015 04:17 PM IST
ओशो
ओशो Updated Thu, 28 May 2015 04:17 PM IST
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the meaning of the Gayatri Mantra is according to Seeker

संस्कृत काव्य-भाषा है। उसमें एक शब्द के अनेक अर्थ होते हैं। गायत्री मंत्र में आए 'धी' शब्द का एक अर्थ तो बुद्धि होता है। और धी से ही बनता है, ध्यान। ध्यान दूसरा अर्थ हुआ। यह अजीब लग सकता है कि इतनी तरल है संस्कृत। बुद्धि में भी थोड़ी-सी 'धी' है; ध्यान में बहुत ज्यादा। ध्यान शब्द भी 'धी' से ही बनता है।

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गायत्री मंत्र का सामान्य अर्थ है, परमात्मा (ओम) सबके रक्षक हैं, प्राणों से भी प्रिय (भू), दुख दूर करने वाले (भुव), सुखरूप (स्व), सृष्टि के सर्जक और चलाने वाले (तत्सवितुर), दिव्यगुणों से युक्त (देवस्य), प्रकाश (तेज), प्राकट्य (भर्ग), का वरण करने योग्य स्वरूप (वरेण्य) का हम ध्यान (धीमहि) करें, वह हमें प्रेरित करे।
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गायत्री मंत्र के एक-एक शब्द के बड़े गहरे अर्थ हैं। यह अर्थ शब्द के अनुसार है। किसी शब्द का एक अर्थ होता है, भाव के अनुसार। जो प्रेम का पथिक है, उसके लिए दूसरा अर्थ है। ज्ञान के मार्ग पर चलने वाले के लिए अन्य अर्थ होगा। अर्थ बंधा हुआ नहीं है, तरल है। वह सुनने वाले के साथ बदलेगा। उसके अनुकूल हो जाएगा। उसे गिलास में ढालेंगे, तो गिलास जैसा हो जाएगा, लोटे में ढालेंगे, तो लोटे जैसा या जमीन पर फैला देंगे, तो वह बह जाएगा।
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भाव के अर्थ से देखें, तो गायत्री मंत्र का अर्थ हुआ, यह सब परमात्मा है। उमड़ते-घुमड़ते बादल, झरने, फूल, पत्ते, पक्षी, पशु- सब तरफ वही झांक रहा है। सब तरफ झांकते उस परमात्मा के ध्यान में हम डूबें। और यह नहीं कह रहा हूं कि इनमें कोई भी एक अर्थ सच है और दूसरा अर्थ गलत। तुम्हारी सीढ़ी पर, तुम जहां हो, वैसा अर्थ कर लेना। लेकिन उससे ऊपर के अर्थ को भूल मत जाना।

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