बदलेगी आर्थिक तस्वीर : अब जम्मू-कश्मीर का विकास भी दिल्ली, नोएडा और चंडीगढ़ जैसा होगा
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कल तक यह कहा जाता रहा है कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के कारण विकास की संभावनाएं धरातल पर नहीं आ पा रही थीं। अब अनुच्छेद 370 के निष्प्रभावी होने के बाद जम्मू-कश्मीर के आर्थिक विकास का परिदृश्य उभरकर दिखाई दे रहा है। देश और दुनिया के अर्थविशेषज्ञ यह कहते हुए दिखाई दे रहे हैं कि अब जम्मू-कश्मीर का विकास भी दिल्ली, नोएडा और चंडीगढ़ जैसा होगा।
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कल तक यह कहा जाता रहा है कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के कारण विकास की संभावनाएं धरातल पर नहीं आ पा रही थीं। अब अनुच्छेद 370 के निष्प्रभावी होने के बाद जम्मू-कश्मीर के आर्थिक विकास का परिदृश्य उभरकर दिखाई दे रहा है। देश और दुनिया के अर्थविशेषज्ञ यह कहते हुए दिखाई दे रहे हैं कि अब जम्मू-कश्मीर का विकास भी दिल्ली, नोएडा और चंडीगढ़ जैसा होगा।
यदि हम अर्थव्यवस्था के आंकड़ों को देखें, तो पाते हैं कि जम्मू-कश्मीर की विकास दर धीमी गति से बढ़ी है। पिछले वर्ष 2018-19 में जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था की विकास दर 6.9 प्रतिशत रही थी। जबकि यह 2017-18 में 8.5 प्रतिशत रही थी। कृषि क्षेत्र में 2018-19 में 6.8 प्रतिशत की वृद्धि रही। मैन्यूफैक्चरिंग, बिजली, जल आपूर्ति, निर्माण और खनन क्षेत्र में छह प्रतिशत की वृद्धि रही। सेवा क्षेत्र जम्मू-कश्मीर राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण रूप से योगदान प्रदान करता है।
इसमें व्यापार, पर्यटन, रियल एस्टेट, ब्रॉडकास्टिंग और वित्तीय सेवाएं शामिल हैं। वर्ष 2018-19 में इस क्षेत्र का योगदान 56 प्रतिशत रहा था। वास्तव में जम्मू-कश्मीर की सबसे बड़ी चुनौती राजस्व की प्राप्ति से संबंधित रही है। इसका सबसे प्रमुख कारण इसका केंद्रीय संसाधनों पर निर्भर होना रहा है।
जम्मू-कश्मीर के कुल राजस्व का 50 प्रतिशत भाग अनुदान के तौर पर केंद्र से आता रहा है। ऐसे में अब अनुच्छेद 370 के निष्प्रभावी होने के बाद राजस्व के नए साधनों से जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकेगी।
कश्मीर के प्रसिद्ध पश्मीना का उत्पादन यहां पाली जाने वाली बकरियों से होता है। रेशम पालन भी कश्मीर में बहुत प्रचलित है। जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था काफी हद तक हस्तकला उद्योगों पर निर्भर है। हस्तशिल्प उद्योग से काफी मात्रा में विदेशी मुद्रा अर्जित होती है। अनुच्छेद 370 के निष्प्रभावी होने के बाद यहां उद्योग-व्यापार की नई संभावनाएं उत्पन्न होंगी। इसमें कोई दोमत नहीं है कि जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था की हालत खराब है।
पिछले 30 वर्षों में जबसे जम्मू-कश्मीर राज्य में आतंकवादी गतिविधियां बढ़ी हैं, तब से राज्य की प्रति व्यक्ति आय में कोई उल्लेखनीय वृद्धि नहीं हुई है। अब उम्मीद है कि शिकारा और हाउसबोट जैसे उद्योगों में दोबारा जान आएगी। कश्मीर में व्यापार और उद्योग के लिहाज से निवेश बढ़ेगा, जो आतंकवाद के माहौल की वजह से नहीं आ रहा था। उद्योग और व्यापार आने से स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। उन्हें अपने घर को छोड़कर दूसरे राज्यों में नौकरी के लिए नहीं जाना होगा।
चूंकि अनुच्छेद 370 के रहने से दूसरे राज्यों के लोग कश्मीर में कोई व्यवसाय नहीं कर सकते थे। इसलिए वहां के बाजार में प्रतिस्पर्द्धा ज्यादा नहीं थी। इसके हटने से देश के अन्य भागों से जम्मू-कश्मीर में निवेश आएगा तथा बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्द्धा का विकास भी होगा। इससे बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य सुविधाओं में इजाफा होगा। अभी कश्मीर में प्रॉपर्टी के दाम बहुत कम हैं, आने वाले समय में इसमें भी उछाल देखने को मिलेगा।