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जीवन का बहुत ही अहम ज्ञान आपको मिल सकता है इन पंक्षियों से
सुदर्शन सिंह
Updated Fri, 20 Mar 2015 03:50 PM IST
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एक व्याध ने पक्षियों को फंसाने के लिए जाल बिछाया। जाल उसने जंगल के पास के इलाके में लगाया था। मगर काफी देर बाद भी उसमें पक्षी नहीं फंसे। दिन ढलने के वक्त जाल में दो पक्षी फंसे जरूर, मगर उन पक्षियों ने झटपट परस्पर सलाह की और जाल को लेकर उड़ने लगे। व्याध को यह देखकर बड़ा दुख हुआ। मगर कुछ क्षण सोचने के बाद वह तत्काल उन पक्षियों के पीछे-पीछे दौड़ने लगा।
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एक ऋषि दूर बठे अपने आश्रम में यह दृश्य देख रहे थे। जब व्याध उनके नजदीक पहुंचा, तो उन्होंने उसे रोकते हुए पूछा, तुम व्यर्थ क्यों दौड़ रहे हो? पक्षी तो जाल लेकर आकाश में उड़ रहे हैं। वे भला क्यों अब तुम्हारे हाथों में आएंगे। व्याध ने रुकते हुए कहा, भगवन, अभी इन पक्षियों में मित्रता है।
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वे परस्पर मेल करके एक दिशा में उड़ रहे हैं। इसी से वे मेरा जाल भी लिए जा रहे हैं। परंतु कुछ देर में उनमें झगड़ा हो सकता है। मैं उसी समय की प्रतीक्षा में उनके पीछे दौड़ रहा हूं। परस्पर झगड़कर जब वे गिर पड़ेंगे, तब मैं इन्हें पकड़ लूंगा।
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व्याध की बात सच साबित हुई। थोड़ी देर उड़ते-उड़ते जब दोनों पक्षी थकने लगे, तब उनमें इस बात को लेकर विरोध शुरू हो गया कि उन्हें कहां ठहरना चाहिए? विरोध होते ही उनके उड़ने की दिशा और पंखों की गति समान नहीं रह गई। इसका फल यह हुआ कि वे उस जाल को संभाले नहीं रख सके।
जाल के भार से वे लड़खड़ाकर गिरने लगे, और एक बार गिरना प्रारंभ होते ही वे जाल में उलझ गए। अब उनके पंख भी जाल में फंस चुके थे। इसका परिणाम यह हुआ कि वे जाल के साथ भूमि पर गिर पड़े। व्याध इसी ताक में उनके पीछे दौड़ रहा था। उसने उन्हें सरलतापूर्वक पकड़ लिया और अपने पिंजरे में डाल दिया।