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आसान नहीं है शशिकला का सफर, 'वापसी का सत्तारूढ़ दल पर कोई प्रभाव नहीं'
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जेल से रिहा होने के बाद शशिकला का काफिला
- फोटो : ANI
हाल ही में जेल से रिहा अन्नाद्रमुक की निष्काषित नेता वीके शशिकला बीस घंटे से अधिक की यात्रा और करीब पचास जगहों पर समर्थकों द्वारा किए गए स्वागत के बाद मंगलवार सुबह बंगलूरू से चेन्नई पहुंचीं। और तमिलनाडु की राजधानी में प्रवेश करने से पहले ही उन्होंने अपने इरादे का इजहार कर दिया। दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की करीबी सहयोगी रहीं शशिकला ने वेल्लोर के नजदीक वन्याम्बडी में कहा कि उन्हें कोई डरा नहीं सकता और उनकी योजना को कोई भी ताकत रोक नहीं सकती।
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अन्नाद्रमुक कार्यकर्ताओं का स्वागत करते हुए और द्रमुक को परोक्ष रूप से चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि हमें विरोधियों के बुरे इरादे को हराने के लिए एकजुट रहना चाहिए। शशिकला के भतीजे टीटीवी दिनाकरन द्वारा गठित (अन्नाद्रमुक से निष्कासित किए जाने के बाद) अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम (एएमएमके) पार्टी के एक करीबी सूत्र ने बताया कि शशिकला की प्रमुख योजनाओं में से एक है-अपने समर्थकों से मिलना और जनता के साथ संवाद करने के लिए राज्य के व्यापक दौरे पर जाना। हालांकि अन्नाद्रमुक के वरिष्ठ नेताओं ने कहा है कि शशिकला की वापसी का सत्तारूढ़ दल पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, जबकि एएमएमके नेताओं का कहना है कि 'चिन्नम्मा' की वापसी से क्या हुआ है, यह बताने के लिए मंत्रियों के बीच मची खलबली ही पर्याप्त है। समर्थक जयललिता को अम्मा (मां) और शशिकला को चिन्नमा (छोटी मां) कहते आए हैं।
एएमएमके के एक वरिष्ठ नेता ने बताया, 'उनके तमिलनाडु लौटने से पहले ही कुछ मंत्रियों ने पुलिस महानिदेशक से उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी कि शशिकला की वजह से कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न होगी। हाल ही में एक प्रेस कांफ्रेंस में स्पष्ट हुआ कि मंत्री अब उनके खिलाफ खुलकर बोलने से भी डरते हैं। शशिकला के राज्यव्यापी दौरे पर निकलने के बाद कई कार्यकर्ताओं द्वारा पाला बदलने की उम्मीद है। उनकी वापसी पर जिस तरह से गर्मजोशी से उनका स्वागत हुआ है, वह एएमएमके सदस्यों के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन है।' इस नेता का तो यह भी दावा है कि तकनीकी रूप से शशिकला अब भी अन्नाद्रमुक की महासचिव हैं, और जल्द ही पार्टी का नेतृत्व करेंगी।
उन्होंने यह भी बताया कि शशिकला के अन्नाद्रमुक मुख्यालय और जयललिता स्मारक का दौरा करने की उम्मीद थी, इसलिए पार्टी मुख्यालय में भारी पुलिस सुरक्षा तैनात की गई थी, जबकि 'अम्मा' स्मारक देखरेख के नाम पर बंद था। एएमएमके कार्यकर्ताओं ने यह भी दावा किया है कि पहले से ही अन्नाद्रमुक के कई जिला पदाधिकारियों ने कहा है कि वे पाला बदलने के लिए तैयार हैं। सोमवार को ही मुख्यमंत्री पलानीस्वामी और उप मुख्यमंत्री पन्नीरसेल्वम ने सत्ताधारी पार्टी के सात सदस्यों को शशिकला का स्वागत करने के चलते निलंबित कर दिया। पलानीस्वामी अभी पार्टी के सह संयोजक और पन्नीरसेलवम पार्टी के संयोजक हैं। जिन सदस्यों को निलंबित किया गया है, उनमें से एक ने शशिकला को अन्नाद्रमुक का झंडा लगी अपनी कार भी उपलब्ध कराई थी, जबकि सत्तारूढ़ दल ने पार्टी के ध्वज का उपयोग करने का विरोध किया है, क्योंकि वह अब पार्टी की सदस्य नहीं हैं। दूसरी ओर, अन्नाद्रमुक कार्यकर्ता महसूस कर रहे हैं कि वर्तमान परिदृश्य में शशिकला का अन्नाद्रमुक पर बहुत कम असर पड़ेगा।
अन्नाद्रमुक के एक नेता कहते हैं कि जो लोग अभी पार्टी में हैं, वे तो शशिकला के बिना पिछले चार सालों से सत्ता का सुख भोग ही रहे हैं और पार्टी तथा पार्टी के मौजूदा नेतृत्व (ईपीएस और ओपीएस) के प्रति वफादार हैं। केवल थोड़े से ऐसे लोग, जिन्हें अन्नाद्रमुक में कोई पद नहीं मिला, वही एएमएमके में जाने की सोच सकते हैं। इसके साथ ही वह यह भी दावा करते हैं, 'ऐसे लोग भी अन्नाद्रमुक नेताओं से आश्वस्त हो जाएंगे। आखिर शशिकला और दिनाकरन ने पहले ही लोगों को अपने पाले में लाने के लिए सारी कोशिशें कर लीं, लेकिन वे अब तक विफल रहे। एएमएमके कई झूठे दावे कर सकता है, जैसे कि पार्टी में 'स्लीपर सेल्स' होने का दावा, लेकिन इनमें से किसी का भी पार्टी पर असर नहीं पड़ेगा।'
अन्नाद्रमुक के नेता और कार्यकर्ता यह भी कहते हैं कि 'एएमएमके के लिए कोई जनसमर्थन नहीं है, यह हाल में संपन्न हुए उप-चुनावों से स्पष्ट हो गया। इस पार्टी के किसी भी प्रत्याशी को अच्छे वोट नहीं मिले। इससे पता चलता है कि अन्नाद्रमुक का वोट बैंक अभी बरकरार है। अन्नाद्रमुक के एक नेता कहते हैं, 'एएमएमके ने झूठी कहानी गढ़ने के लिए काफी पैसा खर्च किया कि शशिकला को अब भी पार्टी सदस्यों का समर्थन प्राप्त है। यह पूरी तरह से झूठ है और आने वाले दिनों में यह और स्पष्ट हो जाएगा।' अन्नाद्रमुक प्रवक्ता और वरिष्ठ मंत्री डी. जयकुमार कहते हैं, अन्नाद्रमुक नेतृत्व उत्सुकता से उन लोगों पर नजर रख रहा है, जो शशिकला को अपना समर्थन दे रहे हैं और उन्हें पार्टी से निकाला जा रहा है। इससे कार्यकर्ताओं को अपने नियंत्रण में रखने की उम्मीद है। हम किसी से नहीं डरते। शशिकला के आगमन का अन्नाद्रमुक पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। एक-दो लोग उनके पाले में जा सकते हैं, लेकिन मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्री के नेतृत्व में पूरी पार्टी मजबूत है।' उन्होंने यह भी कहा कि शशिकला और दिनाकरन एम के स्टालिन की पार्टी द्रमुक की बी टीम हैं।
राजनीतिक विश्लेषक एम भरत कुमार कहते हैं कि 'अन्नाद्रमुक और एएमएमके के बीच झगड़े और शशिकला की वापसी से द्रमुक को ही फायदा होगा। आगामी विधानसभा चुनाव में अन्नाद्रमुक का वोट बंट सकता है और पार्टी में भ्रम से लोगों के लिए मुश्किल हो जाएगी कि दोनों धड़ों में से किस धड़े का चयन करें। यह एक तरह से द्रमुक को फायदा पहुंचाना ही होगा।' हालांकि दो दशकों से तमिलनाडु की राजनीति पर नजर रखने वाले प्रोफेसर एस रवितेजा कहते हैं, यह सही है कि शशिकला कभी अन्नाद्रमुक में एक महाशक्ति थीं। लेकिन उनके जेल जाने के बाद पलानीस्वामी ने स्पष्ट तौर पर एक दुर्जेय नेता के रूप में अपनी छवि बना ली है और पूरी पार्टी तथा सरकारी मशीनरी आज उनके पीछे खड़ी है। राज्य की वर्तमान राजनीतिक स्थिति को देखते हुए शशिकला और दिनाकरन के लिए उन्हें सत्ता से हटाना इतना आसान नहीं है।