{"_id":"fe3360a5a7ef14594aceb9495b64f3e3","slug":"such-a-solution-would-not-be-in-balochistan-hindi","type":"story","status":"publish","title_hn":"बलूचिस्तान में समाधान ऐसे नहीं होगा","category":{"title":"Opinion","title_hn":"नज़रिया ","slug":"opinion"}}
बलूचिस्तान में समाधान ऐसे नहीं होगा
कुलदीप तलवार
Updated Sun, 12 Jul 2015 05:40 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पाकिस्तान के हिंसाग्रस्त बलूचिस्तान प्रांत की सरकार ने बलूच राष्ट्रवादियों द्वारा पिछले कई वर्षों से पाक से अलग होने के आंदोलन को खत्म कराने के लिए आंदोलनकारियों को आम माफी देने की घोषणा की है। हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने वाले युवकों को वित्तीय मदद देने की बात कही गई है।
विज्ञापन
लेकिन लगता नहीं कि बलूच राष्ट्रवादी इस प्रलोभन में फंसेंगे। बलूच स्वतंत्रता के लिए लड़ रहे हैं। देश के बंटवारे के समय वे पाकिस्तान में शामिल नहीं होना चाहते थे। लेकिन मोहम्मद अली जिन्ना के दबाव में उन्हें शामिल होना पड़ा। सच यह है कि जब तक सेना, आईएसआई, खुफिया एजेंसी और फ्रंटियर कॉर्प बलूचियों पर जुल्म ढाना बंद नहीं करतीं, तब तक अलग होने के उनके जुनून को खत्म नहीं किया जा सकता। ग्वादर बंदरगाह को चीन को सौंपे जाने पर बलूचियों ने जो आंदोलन शुरू किया है, उससे भी सरकार और फौज परेशान हैं। उन्हें डर है कि अगर वे बलूच लोगों को शांत नहीं कर पाए, तो अरबों डॉलर उनके हाथ से फिसल जाएंगे। एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट वाच जैसे मानवाधिकार संगठन भी बलूचिस्तान में सरकार की दमनकारी नीति के आलोचक हैं।
विज्ञापन
बलूचियों की मांगों पर संजीदगी से विचार करना ही चाहिए। राज्य से फौज और फ्रंटियर कोर को वापस बुलवाने, उनके खिलाफ झूठे मुकदमे वापस लेने और उन करीब बीस हजार लापता लोगों का पता लगाने की, जिन्हें खुफिया एजेंसी उठाकर ले गई थीं, उनकी मांग पुरानी है। हाल यह है कि गायब लोगों को तलाश करके सामने लाने की बात जो करते हैं, उन्हीं की हत्या करा दी जाती है। सबीना महमूद की हत्या इसकी ताजा मिसाल है। पाक संविधान के 18वें संशोधन के तहत जो विशेष अधिकार उन्हें मिले हैं, उनमें बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों पर केंद्र व प्रांत, दोनों का अधिकार है। बलूचिस्तान प्राकृतिक संसाधनों से मालामाल है। वहां से गैस की आपूर्ति पूरे देश में होती है। पर प्रांत को रॉयल्टी की थोड़ी रकम मिलती है। बलूच लोग स्कूल-कॉलेजों में पाकिस्तान के बजाय बलूचिस्तान का इतिहास पढ़ाए जाने की मांग करते हैं। पर इन मांगों पर कोई ध्यान नहीं देता।
विज्ञापन
नवाज शरीफ से उम्मीद थी कि वह बलूचियों की भावना को समझेंगे। पर ऐसा कुछ तो नहीं ही हुआ, उल्टे बलूचिस्तान में अशांति के लिए भारत पर झूठा आरोप लगाया जा रहा है। जबकि इसका कोई सुबूत पाकिस्तान नहीं दे पा रहा है।
थोड़े समय पहले नवाज शरीफ ने कह था कि दुश्मन पाकिस्तान की तरक्की बर्दाश्त नहीं कर पा रहे, इसलिए उसे कमजोर करने की साजिश रच रहे हैं। उनका इशारा भारत की तरफ था। पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ झूठी शिकायत अमेरिका में भी की। पर सुबूतों के अभाव में उन्हें विफलता हाथ लगी। बलूचिस्तान की आग बुझाने के बजाय इस्लामाबाद भारत पर निशाना साध रहा है। बलूचियों कोा एहसास है कि सरकार उनकी समस्याएं हल करने में संजीदा नहीं है। तालिबान और आईएस की मौजूदगी से वहां कानून-व्यवस्था की परेशानी भी है। वहां से पलायन कर गए बलूची नेता व बुद्धिजीवी अंतरराष्ट्रीय बिरादरी से बलूचिस्तान से पाक के परमाणु हथियार हटाने और वहां मानवाधिकारों के हनन की समाप्ति की लगातार मांग कर रहे हैं। ऐसे में, भलाई इसी में है कि पाक सरकार अपनी सोच बदले, भारत पर आरोप लगाना बंद करे और बलूचियों की इच्छाओं के अनुसार हल तलाश करे। डंडा-गोली इसका हल नहीं है।