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मंडेला के उत्तराधिकारी

Mon, 01 Jul 2013 09:13 PM IST
बिल केलर
बिल केलर Updated Mon, 01 Jul 2013 09:13 PM IST
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successor of nelson mandela

नेल्सन मंडेला के गंभीर रूप से बीमार होने और प्रिटोरिया अस्पताल में भर्ती होने के अगले ही दिन मैंने उन पर केंद्रित सामग्रियां इकट्ठा करनी शुरू कीं। इसी क्रम में मंडेलाज वे  नाम की एक छोटी किताब मेरे हाथ लगी। इसके 2010वें संस्करण में रिक स्टेंगल, जो मंडेला की जीवनी के छद्मलेखक हैं, तीन वर्ष मंडेला को करीब से देखने के बाद इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं कि मंडेला 'जीवन, प्यार और साहस का सबक' हैं।

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टाइम पत्रिका के प्रबंध संपादक स्टेंगल अपने नायक की तुलना अफ्रीका के ही दूसरे बेटे बराक ओबामा से करने से खुद को नहीं रोक सके, जो उतने ही शांत, लंबी कद-काठी के और उम्मीदों से भरे हैं।
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वह लिखते हैं, ओबामा का आत्मानुशासन, उपलब्धियों का श्रेय खुद न लेने का स्वभाव, अपने प्रतिद्वंद्वियों को भी अपने प्रशासन में शामिल करने की उदारता और उनका यह विश्वास कि आम लोग पारदर्शिता में भरोसा करते हैं-इन सभी से ऐसा लगता है, मानो बराक ओबामा नेल्सन मंडेला के मूल्यों और उनकी शख्सियत के 21वीं सदी के संस्करण हैं। वह आगे लिखते हैं, अब भले ही मंडेला इस अश्वेत अमेरिकी राष्ट्रपति के विषय में जो भी सोचें, लेकिन यह सच है कि बराक ओबामा वैश्विक मंच पर कई मामलों में नेल्सन मंडेला के वास्तविक उत्तराधिकारी लगते हैं।
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दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद को समाप्त करने के कारण जिस नोबल समिति ने मंडेला को 'शांति के नोबल' से सम्मानित किया था, उसी ने ओबामा को भी पुरस्कृत किया, क्योंकि वह जॉर्ज डब्ल्यू बुश नहीं थे। बल्कि यह कहना ज्यादा सही होगा कि शायद मंडेला, जो दक्षिण अफ्रीका पर शासन करने के बजाय उसको आजादी दिलाने के लिए ज्यादा सफल और चर्चित हैं, उम्मीदों के इतने बोझ के बीच ओबामा की तरह खरे नहीं उतर पाते। लेकिन यह कल्पना भी दिलचस्प है कि अगर ओबामा ने मंडेला की कार्यशैली अपनाई होती, तो उनका कामकाज अब की तुलना में कितना अलग होता।

अपने सक्रिय राजनीतिक जीवन में मंडेला आत्मानुशासन का पालन करते थे। लेकिन कूटनीतिक लाभ के लिए अपनी नैतिक आभा का असरदार तरीके से इस्तेमाल करना वह बखूबी जानते थे। देशद्रोह को लेकर चल रहे रिवोनिया मुकदमे के दौरान वह प्रिटोरिया के अदालत-कक्ष में खोसा तेंदुए से बने पारंपरिक वस्त्र पहनकर आए थे, ताकि बता सकें कि वह एक अफ्रीकी हैं, जो गोरे लोगों की अदालत में प्रवेश कर रहे हैं। वर्ष 1995 में मंडेला एक ऐसे देश के राष्ट्रपति बने, जो गहरे रूप से विभाजित था। उन्होंने अपने दम पर उस रग्बी विश्व कप को नस्लीय सद्भाव के त्योहार में बदल दिया, जो दक्षिण अफ्रीका में गोरों का खेल था।

दूसरी ओर, ओबामा ने शायद ही कभी यह स्थापित करने की कोशिश की कि वह अमेरिका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति हैं। द न्यूयॉर्क टाइम्स के मेरे सहयोगी पीटर बेकर ने लिखा भी है, 'ओबामा खुद महसूस करते हैं कि उनकी जिम्मेदारी मंडेला से अलग है, और उनका अश्वेत होना कोई मुद्दा नहीं है। तभी उनकी उपलब्धि ज्यादा अर्थपूर्ण होगी।' नेल्सन मंडेला ने यह समझ लिया था कि राजनीति दिमागी खेल नहीं है।

इसके बजाय यह चापलूसी करने, प्रतीकात्मक संकेतों को समझने, धैर्य के साथ सुनने और दूसरों के छोटे-मोटे काम करने का व्यापार है। कुल मिलाकर, यह संवेदना का कारोबार है। श्वेतों का दिल जीतने के लिए उन्होंने डच बोली सीखी और उनका राष्ट्रगान बरकरार रखा। उन्होंने गोल्फ खेलना सीखा और मेरलॉट (एक विशेष तरह का पेय पदार्थ) पीना शुरू किया। अपने सहयोगियों से उन्होंने कहा था, 'आप उनका दिमाग नहीं बदल सकते'।

मंडेला एक अद्भुत मध्यस्थ थे। बातचीत की मेज से वह कभी खाली हाथ नहीं लौटे। उनको पता होता था कि तर्कों की कसौटी पर दूसरा पक्ष कितनी दूर तक जा सकता है। वह ऐसे अवसरवादी थे, जो हर संकट का अपने हित में बेहतर इस्तेमाल करना जानते थे। वह जोखिम लेने को हमेशा तैयार रहे। मैं रिपब्लिकन्स और फायदा मांगते अपने समर्थकों के साथ डील करने की ओबामा की क्षमता को कमतर करके नहीं आंक रहा, लेकिन अफ्रीकी आतंकवादियों, जुलू राष्ट्रवादियों और 27 साल तक कैद रखने वाली श्वेत हुकूमत के साथ सौदेबाजी करने में मंडेला का कोई सानी नहीं था।

राष्ट्रपति के तौर पर मंडेला का जीवन अपेक्षाकृत शांत रहा, मानो जीवन का अब अंत होने वाला है। ऐसा इसलिए, क्योंकि आंदोलन ही उनका जीवन था।

अमेरिका को बिल क्लिंटन और रोनाल्ड रीगन जैसे जीवंत राष्ट्रपति मिले हैं। इसके इतर ओबामा आमतौर पर ऐसे दिखे, मानो राष्ट्रपति का काम किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं। जबकि मंडेला को स्वतंत्रता, समानता, कानून का राज जैसे अपने बुनियादी सिद्धांतों की समझ रही है। उन्होंने रणनीति बदली, गठबंधन बदला (एक दिन वामपंथी पार्टियों के साथ, तो दूसरा दिन व्यापारिक कुलीन वर्गों के साथ), लेकिन नहीं बदला, तो अपना एकमात्र लक्ष्य। ओबामा के बनिस्बत मंडेला नैतिक रूप से ज्यादा स्पष्ट रहे।


अमेरिकी राष्ट्रपति को मंडेला की तरह नित नई समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ा है। और अगर ओबामा सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा और आप्रवास सुधार जैसे दो मुद्दों का हल निकाल पाते हैं, जो उनके पूर्ववर्ती राष्ट्रपतियों के हार के कारण बने हैं, तो यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं होगी। लेकिन यहां सवाल यही है कि क्या हम-आप यह आसानी से समझते हैं कि हमारे राष्ट्रपति किन नैतिक मूल्यों से चालित होते हैं।

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