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'सिक्स ग्रेव्स टू म्यूनिख'
ओम गुप्ता
Updated Sat, 22 Nov 2014 10:18 PM IST
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गॉडफादर केवल एक उपन्यास का नाम नहीं है, यह एक संदर्भ ग्रंथ है, इटली के भयानक माफिया संसार का। इतालवी शब्द 'माफिया' आज लगभग सभी भाषाओं में एक अपराध की तरह प्रवेश कर चुका है। इसका प्रयोग एक ऐसी गिरोहबंदी के लिए किया गया, जिसमें सनसनीखेज ढंग से लूटपाट और हत्याओं को सिलसिलेवार तरीके से अंजाम दिया जाता है। उसी 'गॉडफादर' के अमेरिकी लेखक 'मारियो पूजो' ने अपनी उस विख्यात रचना से एक साल पहले एक उपन्यास लिखा था। 'सिक्स ग्रेव्स टू म्यूनिख'।
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जर्मनी का शहर म्यूनिख, कई बदनाम कारणों की वजह से भी जाना जाता है। मसलन हिटलर के नाजीवाद की नींव और जर्मनी पर अपने पंजे गड़ाने का सपना। ओलंपिक खेलों के दौरान आतंकवादियों का हमला। उसी म्यूनिख के बारे में पूजो ने एक काल्पनिक नाम मारियो क्लेरी के नाम से यह कहानी लिखी है। कथासार कुछ इस प्रकार है। द्वितीय विश्वयुद्ध के पूर्व के दशक में एक गुप्त पुलिस संगठन का गठन किया गया था। उसका नाम था गैस्टापो। इसका उद्देश्य था एक बर्बर नाजी राजतंत्र की स्थापना करना। खासकर यहूदी समुदाय के लोग इसके निशाने पर थे। यहूदियों के अलावा हर उस नागरिक को लपेटे में लिया गया, जो सरकार के काम करने के तरीकों पर अलग राय रखता था। जैसे कि बुद्धिजीवी, कम्यूनिस्ट, लेखक, पत्रकार और यहां तक की कलाकार भी। इस कृति का अभागा नायक है कप्तान माइकल रोगान।
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गैस्टापो के सात निरंकुश अफसर रोगान की गर्भवती पत्नी की हत्या कर देते हैं और उसके साथ अत्याचार करने के बाद मरी जानकर लाशों के ढेर में छोड़कर चले जाते हैं। वक्त बदलता है और विश्वयुद्ध के अंत के बाद वे सातों अफसर अपने अतीत को छिपाकर एक नई पहचान के साथ भीड़ में कहीं गुम हो जाते हैं। विश्वयुद्ध के बाद जर्मनी को दो हिस्सों में बांट दिया जाता है। पूर्वी और पश्चिमी। जैसे कि लूट का माल आधा-आधा कर लिया जाता है। पूर्वी जर्मनी रातों-रात रूसी खेमा मान लिया जाता है। जबकि पश्चिमी हिस्से को अमेरिका का पूंजीवादी रंग दे दिया जाता है। अधिकांश यहूदी अमेरिका पलायन कर जाते हैं आैर पश्चिमी देश उनके लिए इस्राइल नामक एक नए देश को नक्शे पर बिठा देते हैं, पड़ोस के अरब राष्ट्रों की छाती पर मूंग दलने के लिए। खैर वापिस इस हफ्ते के उपन्यास पर लौटते हैं।
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माइकल रोगान लाश के ढेर से बाहर निकलता है। लेकिन क्षत-विक्षत, जो अब जीवन भर उसे सताने वाली थी। लेकिन अब उसके पास जीवन जीने का एक मकसद था। उसे उन सात निर्दयी अत्याचारियों को ढूंढना और उनसे अपना प्रतिशोध लेना है। उन्हें ढूंढना आसान नहीं था। अब उन्होंने नए मुखौटे पहन लिए थे। वे अपने काले अतीत को सामने नहीं आने देना चाहते थे। पर तभी उसके जख्मों पर मरहम की तरह एक खूबसूरत परी ने प्रवेश किया, उसका नाम था रोजाली। रोगान के सामने एक दुविधा खड़ी थी। बदला या नए जीवन की आशा। उसका प्यार उसकी जोड़ीदार बन जाता है, उसके खूनी संकल्प को पूरा करने के लिए। पूरा नॉवेल एक हिंदी फिल्म की तर्ज पर शिकार को ढूंढ-ढूंढकर खत्म करने के सफरनामे जैसा है। मारियो पूजो एक क्रूर रोजनामचा लिखने वाले सिपाही के अंदाज में हत्याओं का ब्यौरा पेश करते हैं, मानो किसी शतरंज की बिसात पर हाथी-घोड़ों को मरते हुए दिखा रहे हों। इस शैली को स्पष्ट करने के लिए उपन्यास के आवरण पर सज्जाकार ने शतरंज की बिसात का सहारा लिया है।
उपन्यासकार पूजो अमेरिका में जन्मे अवश्य थे, लेकिन उनके माता-पिता इतालवी मूल के थे और वहां से आकर अमेरिका में बसे थे। उन्होंने स्कूल कॉलेज में समाजशास्त्र का अध्ययन किया था। हर इतालवी की तरह वे भी माफिया संस्कृति से भली-भांति परिचित थे, लेकिन उनका दावा था कि उन्होंने अपने जीवन में कभी किसी लामबंद गिरोह से मुलाकात नहीं की थी। इसके बावजूद उन्हें माफिया कथा-साहित्य का बेताज बादशाह माना जाता है। इस किताब में पूजो की विवरणात्मक शैली की एक बानगी देखिए- ‘गैंका बारी अचानक खड़ा हो गया। रोगान से मिलने के बाद पहली बार उसकी आवाज में तल्खी और चेहरे पर गुस्सा था। 'अबे गधे क्या तुम अब तक नहीं समझे कि मैं चाहता हूं कि तुम मेरी हत्या कर दो। तुम मेरे मुक्तिदाता हो, मेरे हत्यारे नहीं। मैं हर रोज दर्द से तड़पता हूं, लेकिन कोई दवा काम नहीं आती। कैंसर मेरे रोम-रोम में फैल चुका है, लेकिन यह मुझे नष्ट नहीं कर पा रहा। हम भी तुम्हें म्यूनिख की उस अदालत में खत्म नहीं कर पाए थे। शायद मैं अपने ईश्वर को कोसता हुआ, कई और बरस तक कहता रहा। मैं पहले दिन ही समझ गया था कि तुम मुझे मारने आए हो। मैंने भरसक कोशिश की कि तुम्हें मौका मिल जाए।' वह रोगन को देखकर मुस्कुराया।
'मैं तुम्हें तुम्हारी बीवी के बारे में सब कुछ बता दूंगा। बशर्ते तुम वायदा करो कि तुम मुझे मार दो।' और रोगन ने अपने पिस्तौल निकाली और बारी के सीने में गोली दाग दी। इस किताब को पढ़ते हुए लगता है मानो सब एक-दूसरे के जाल में फंसे हुए हैं।