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सिख सांसदों का विश्व भर में डंका
विवेक शुक्ला
Updated Thu, 22 Nov 2018 06:15 PM IST
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विवेक शुक्ला
यह अब संभव लग रहा है कि आने वाले समय में अमेरिका का राष्ट्रपति या कनाडा का प्रधानमंत्री कोई सिख बन जाए। अगर केन्या मूल के बराक ओबामा अमेरिका के राष्ट्रपति बन सकते हैं, तो भारतीय मूल की निक्की हेली को अमेरिका के अगले संभावित राष्ट्रपति के रूप में देखा जाना समझा जा सकता है। द न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, मूल रूप से पंजाब के अमृतसर से संबंध रखने वाली निक्की हेली अमेरिका के 2020 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की उप राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार होंगी। उन्हें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का करीबी माना जाता है।
निक्की हेली का असली नाम निम्रता रंधावा है, उनका जन्म अमेरिकी राज्य साउथ कैरोलिनी के बैमबर्ग में 1972 में हुआ था। उनके पिता का नाम अजीत सिंह रंधावा और मां का नाम राजकौर रंधावा है। निक्की आज भी खुद को एक भारतीय माता-पिता की गर्वीली बेटी और भारत को दूसरा घर मानती हैं।
उधर, कनाडा में 38 वर्षीय जगमीत सिंह को न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी का नेता चुन लिया गया है। जगमीत कनाडा की एक प्रमुख राजनीतिक पार्टी की अगुवाई करने वाले पहले भारतीय मूल के राजनेता बन गए हैं। ओंटारियो प्रांत के सांसद जगमीत सिंह को वर्ष 2019 के चुनाव में प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की लिबरल पार्टी के खिलाफ दल का नेतृत्व करने के लिए प्रथम मतदान के आधार पर पार्टी का नेता चुना गया है। जीत के बाद उन्होंने ट्वीट किया, धन्यवाद न्यू डेमोक्रेट्स। प्रधानमंत्री की दौड़ अब शुरू हो गई। वर्ष 1979 में ओंटारियो के स्कारबोरो में जन्मे सिंह के माता-पिता पंजाब से यहां आए थे।
भारत के बाद सर्वाधिक सिख सांसद कनाडा में ही हैं। कनाडा के पिछले आम चुनाव में पांच सिख संसद में पहुंचे। और अब वहां पर दो सिख मंत्री हैं। कनाडा की जनसंख्या में सिखों की हिस्सेदारी लगभग 1.4 प्रतिशत है। भारतीय मूल के कनाडाई सिख हरजीत सज्जन को कनाडा का रक्षा मंत्री बनाया गया है। सज्जन का जन्म भारत में हुआ था और जब वह पांच साल के थे, तो उनका परिवार कनाडा चला गया था। इस बीच, आसियान देश मलयेशिया की संसद में दो सिख हैं। हालांकि भारतीय मूल के तो कई सांसद हैं।
वहां के चोटी के भारतीय मूल के नेता कृपाल सिंह का कुछ समय पहले निधन हुआ। गोविंद सिंह देव भी मलयेशिया में सांसद हैं। उनके भाई जगदीप सिंह पेनांग एसेंबली के सदस्य हैं। दरअसल मलयेशिया में भारत वंशियों में सर्वाधिक तमिल हैं। हां, सिखों की भी आबादी खासी है। अब ब्रिटेन का रुख कर लेते हैं। ब्रिटेन की मौजूदा संसद में कोई सिख सांसद नहीं है। इससे पहले की संसद में इंदरजीत सिंह सिखों की नुमाइंदगी कर रहे थे। कंवल सिंह बख्शी न्यूजीलैंड की संसद के सिख सांसद हैं। उनका संबंध नेशनल पार्टी से है। उनका परिवार 2001 में न्यूजीलैंड में जाकर बसा था। उधर, इंदरजीत सिंह भी दिल्ली से हैं। वह सिंगापुर की पार्लियामेंट में हैं। उनकी स्कूली और कॉलेज की पढ़ाई सिंगापुर में ही हुई। वह पेशे से इंजीनियर हैं। प्रीतम सिंह भी सिंगापुर की संसद में हैं। वह पेश से वकील हैं।
परमिंदर सिंह मारवाह अफ्रीका के किसी भी देश की संसद में पहुंचने वाले पहले सिख सांसद हैं। वह युगांडा की पार्लियामेंट में थे। वह बीते साल संसद के चुनाव में हार गए थे। वह भारत आते हैं। वह चाहते हैं कि भारत के निवेशक युगांडा के कृषि क्षेत्र में आएं। उनके परिवार ने 70 के दशक में भी युगांडा को नहीं छोड़ा था, जब ईदी अमीन भारतीयों पर जुल्म ढा रहे थे। अफ्रीका से बाहर निकलने से पहले केन्या भी हो आते हैं। इधर एक सरदारनी सांसद हैं। दिल खुश हो गया न आपका। नाम है सोनिया विरदी। वह पहली एशियाई मूल की महिला सांसद हैं केन्या में। यानी अब सिखों की हो रही है, हर जगह बल्ले-बल्ले।
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निक्की हेली का असली नाम निम्रता रंधावा है, उनका जन्म अमेरिकी राज्य साउथ कैरोलिनी के बैमबर्ग में 1972 में हुआ था। उनके पिता का नाम अजीत सिंह रंधावा और मां का नाम राजकौर रंधावा है। निक्की आज भी खुद को एक भारतीय माता-पिता की गर्वीली बेटी और भारत को दूसरा घर मानती हैं।
उधर, कनाडा में 38 वर्षीय जगमीत सिंह को न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी का नेता चुन लिया गया है। जगमीत कनाडा की एक प्रमुख राजनीतिक पार्टी की अगुवाई करने वाले पहले भारतीय मूल के राजनेता बन गए हैं। ओंटारियो प्रांत के सांसद जगमीत सिंह को वर्ष 2019 के चुनाव में प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की लिबरल पार्टी के खिलाफ दल का नेतृत्व करने के लिए प्रथम मतदान के आधार पर पार्टी का नेता चुना गया है। जीत के बाद उन्होंने ट्वीट किया, धन्यवाद न्यू डेमोक्रेट्स। प्रधानमंत्री की दौड़ अब शुरू हो गई। वर्ष 1979 में ओंटारियो के स्कारबोरो में जन्मे सिंह के माता-पिता पंजाब से यहां आए थे।
भारत के बाद सर्वाधिक सिख सांसद कनाडा में ही हैं। कनाडा के पिछले आम चुनाव में पांच सिख संसद में पहुंचे। और अब वहां पर दो सिख मंत्री हैं। कनाडा की जनसंख्या में सिखों की हिस्सेदारी लगभग 1.4 प्रतिशत है। भारतीय मूल के कनाडाई सिख हरजीत सज्जन को कनाडा का रक्षा मंत्री बनाया गया है। सज्जन का जन्म भारत में हुआ था और जब वह पांच साल के थे, तो उनका परिवार कनाडा चला गया था। इस बीच, आसियान देश मलयेशिया की संसद में दो सिख हैं। हालांकि भारतीय मूल के तो कई सांसद हैं।
वहां के चोटी के भारतीय मूल के नेता कृपाल सिंह का कुछ समय पहले निधन हुआ। गोविंद सिंह देव भी मलयेशिया में सांसद हैं। उनके भाई जगदीप सिंह पेनांग एसेंबली के सदस्य हैं। दरअसल मलयेशिया में भारत वंशियों में सर्वाधिक तमिल हैं। हां, सिखों की भी आबादी खासी है। अब ब्रिटेन का रुख कर लेते हैं। ब्रिटेन की मौजूदा संसद में कोई सिख सांसद नहीं है। इससे पहले की संसद में इंदरजीत सिंह सिखों की नुमाइंदगी कर रहे थे। कंवल सिंह बख्शी न्यूजीलैंड की संसद के सिख सांसद हैं। उनका संबंध नेशनल पार्टी से है। उनका परिवार 2001 में न्यूजीलैंड में जाकर बसा था। उधर, इंदरजीत सिंह भी दिल्ली से हैं। वह सिंगापुर की पार्लियामेंट में हैं। उनकी स्कूली और कॉलेज की पढ़ाई सिंगापुर में ही हुई। वह पेशे से इंजीनियर हैं। प्रीतम सिंह भी सिंगापुर की संसद में हैं। वह पेश से वकील हैं।
परमिंदर सिंह मारवाह अफ्रीका के किसी भी देश की संसद में पहुंचने वाले पहले सिख सांसद हैं। वह युगांडा की पार्लियामेंट में थे। वह बीते साल संसद के चुनाव में हार गए थे। वह भारत आते हैं। वह चाहते हैं कि भारत के निवेशक युगांडा के कृषि क्षेत्र में आएं। उनके परिवार ने 70 के दशक में भी युगांडा को नहीं छोड़ा था, जब ईदी अमीन भारतीयों पर जुल्म ढा रहे थे। अफ्रीका से बाहर निकलने से पहले केन्या भी हो आते हैं। इधर एक सरदारनी सांसद हैं। दिल खुश हो गया न आपका। नाम है सोनिया विरदी। वह पहली एशियाई मूल की महिला सांसद हैं केन्या में। यानी अब सिखों की हो रही है, हर जगह बल्ले-बल्ले।