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अरुणाचल : वह इस समय सशस्त्र बलों के संरक्षण में है और वहां अफ्स्पा लागू है
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टिरोंग अबो की हत्या
- फोटो : Amar Ujala
अरुणाचल प्रदेश की खोंसा पश्चिम विधानसभा सीट से मौजूदा विधायक टिरोंग अबो की हत्या राजनीतिक हत्या भी हो सकती है और राज्य में उग्रवाद के फिर से सिर उठाने का संकेत भी। 41 वर्षीय अबो खोंसा पश्चिम विधानसभा सीट से दोबारा चुनाव लड़ रहे थे, जिसके नतीजे आज आने वाले हैं। यह घटना उस समय हुई, जब संदिग्ध विद्रोहियों ने अबो के वाहन पर गोलीबारी की, जो परिवार के सदस्यों, तीन पुलिसकर्मियों और एक मतदान एजेंट के साथ असम से अपने निर्वाचन क्षेत्र में जा रहे थे।
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हालांकि जिस स्थान पर हमला हुआ, वह इस समय सशस्त्र बलों के संरक्षण में है और वहां अफ्स्पा लागू है। लेकिन हमले के समय सशस्त्र बल वहां नहीं थे। पुलिस ने पहले ही दावा किया है कि यह हमला अरुणाचल प्रदेश के बोगापानी गांव के पास सुबह करीब साढ़े ग्यारह बजे हुआ था, जिसमें नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड (एनएससीएन) के उग्रवादियों के हाथ होने का संदेह है। स्थानीय पुलिस का कहना है कि उसे इस हमले के पीछे एनएससीएन-आईएम के हाथ होने का संदेह है।
एनएससीएन के दो गुट हैं-एनएससीएन-आईएम तथा खपलांग और दोनों ही गुट अरुणाचल प्रदेश में सक्रिय हैं। हालांकि एनएससीएन-आईएम संघर्ष विराम का पालन कर रहा है और केंद्र सरकार के साथ उसकी शांति वार्ता चल रही है। उग्रवाद को समाप्त करने के लिए नगालैंड शांति समझौते पर अगस्त, 2015 में भारत सरकार और एनएससीएन द्वारा हस्ताक्षर किए गए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में सरकार की ओर से नगा शांति वार्ता के केंद्र सरकार के वार्ताकार आर एन रवि ने और एनएससीएन के महासचिव थुइंगालेंग मुइवा ने हस्ताक्षर किए थे।
पिछले महीने एनएससीएन के एक टूटे हुए गुट खपलांग ने भी एक वर्ष के लिए संघर्ष विराम समझौता पर हस्ताक्षर किया। ऐसे में अगर वाकई एनएससीएन के किसी गुट का इस हमले में हाथ है, तो यह केंद्र सरकार के लिए बेहद चिंता की बात है, क्योंकि माना जा रहा था कि एनएससीएन के साथ शीघ्र ही शांति वार्ता पूर्ण हो जाएगी और यह पूर्वोत्तर क्षेत्र में शांति स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। इस घटना से शांति प्रक्रिया को झटका लग सकता है।