फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Sheikh Hasina returns as PM of Bangladesh challenge to bring political stability amid foreign exchange crisis

परिदृश्य: शेख हसीना की वापसी, विदेशी मुद्रा संकट के बीच राजनीतिक स्थिरता लाने की चुनौती

Tue, 09 Jan 2024 07:46 AM IST
Anand Kumar आनंद कुमार
Updated Tue, 09 Jan 2024 07:46 AM IST
विज्ञापन
सार
संसदीय चुनाव में दो तिहाई से ज्यादा सीटें जीतकर सत्ता में फिर से लौटीं शेख हसीना विपक्ष की योजनाओं से परेशान नहीं हैं और कहती हैं कि उनकी जिम्मेदारी बांग्लादेश के लोगों के प्रति है, न कि विपक्षी पार्टी बीएनपी के प्रति। बांग्लादेश का करीबी साझेदार होने के लिए उन्होंने भारत की सराहना भी की है।
loader
Sheikh Hasina returns as PM of Bangladesh challenge to bring political stability amid foreign exchange crisis
शेख हसीना - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

बीते रविवार यानी सात जनवरी को बांग्लादेश में संसदीय चुनाव के लिए मतदान हुआ, जिसमें शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग एक बार फिर विजयी हुई है। चुनावी नतीजे काफी हद तक उम्मीद के मुताबिक रहे और सत्तारूढ़ दल ने संसद में दो तिहाई बहुमत हासिल किया। मुख्य विपक्षी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी), जिसने चुनाव का बहिष्कार किया था, अपना विरोध जारी रखने की योजना बना रही है। हालांकि, हसीना विपक्ष की योजनाओं से परेशान नहीं हैं और कहती हैं कि उनकी जिम्मेदारी बांग्लादेश के लोगों के प्रति है, न कि विपक्षी पार्टी बीएनपी के प्रति, जो उनके अनुसार, गुंडों की पार्टी है। उन्होंने बांग्लादेश का करीबी साझेदार होने के लिए भारत की सराहना भी की है।



बांग्लादेश के चुनावी नतीजे के आंकड़े बताते हैं कि मतदान में मात्र 40 प्रतिशत मतदाताओं ने ही भागीदारी की, जबकि विपक्ष को इस पर भी भरोसा नहीं है। जिन 61 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है, उन्हें भी अवामी लीग का ही छद्म उम्मीदवार बताया जाता है। जातीय पार्टी को सिर्फ 11 सीटों पर जीत मिली है। मुख्य विपक्षी पार्टी बीएनपी के नेताओं ने कहा कि उनकी पार्टी मंगलवार से शांतिपूर्वक अपने विरोध आंदोलन को तेज करने की योजना बना रही है। बीएनपी ने इस चुनाव को 'फर्जी' बताया है।


बांग्लादेश के चुनाव आयोग के अनुसार, 42,000 से अधिक मतदान केंद्रों पर मतदान हुआ, जिनमें 27 राजनीतिक दलों के 1,500 से अधिक प्रत्याशी मैदान में थे। 436 निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनाव लड़ रहे थे। भारत के तीन पर्यवेक्षकों समेत 100 से अधिक विदेशी पर्यवेक्षक बांग्लादेश के चुनाव की निगरानी कर रहे थे। मतदान के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए 7.5 लाख से अधिक कर्मियों की तैनाती की गई थी।

विश्लेषकों का मानना है कि शेख हसीना की सत्ता में वापसी भारत के लिए फायदेमंद है, क्योंकि उनका रुख हमेशा से भारत समर्थक रहा है, जबकि बीएनपी के शासन के दौरान भारत के अलगाववादियों को वहां सुरक्षित पनाह मिलती रही है और बीएनपी का रुख भारत विरोधी रहा है। बांग्लादेश का राजनीतिक परिदृश्य शेख हसीना और खालिदा जिया के बीच तीव्र प्रतिद्वंद्विता के लिए जाना जाता है। शेख हसीना बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर्रहमान की बेटी हैं, जबकि खालिदा जिया बांग्लादेश के पूर्व तानाशाह शासक जिया उर रहमान की विधवा हैं।

इस राजनीतिक परिदृश्य में अचानक लोगों का ध्यान नोबेल विजेता अर्थशास्त्री मुहम्मद यूनुस की ओर चला गया, जिन्हें हाल ही में बांग्लादेश की एक श्रम अदालत ने छह महीने जेल की सजा सुनाई है। हालांकि इस फैसले के खिलाफ यूनुस को ऊपरी अदालत में अपील करने की इजाजत दी गई है, जबकि कुछ लोगों का मानना है कि अदालत का यह फैसला नोबेल विजेता मुहम्मद यूनुस के खिलाफ राजनीतिक बदले की कार्रवाई का हिस्सा है। हालांकि अवामी लीग सरकार ने इससे इन्कार किया है।

मुहम्मद यूनुस बांग्लादेश में ग्रामीण बैंक के माध्यम से अपने सूक्ष्म-ऋणों के लिए जाने जाते हैं। इस कार्यक्रम को बड़ी संख्या में बांग्लादेशी महिलाओं के उत्थान का श्रेय दिया जाता है, जिन्होंने लघु व्यवसाय शुरू किया। कुछ लोगों का मानना है कि यूनुस का कार्यक्रम उस देश के लिए चमत्कार की तरह है, जो पहले अत्यंत गरीबी के लिए जाना जाता था। मगर उनके विरोधियों का मानना है कि वह उधारकर्ताओं से भारी ब्याज वसूलते हैं, वे इसे सीधे कानूनी मामले के रूप में देखते हैं।

दूसरी तरफ, यूनुस और उनके उपक्रम ग्रामीण टेलिकॉम के तीन निदेशकों को दोषी ठहराए जाने को कुछ लोग सरकार द्वारा विरोधी आवाजों को दबाने के एक और प्रयास के रूप में देखते हैं। उनका तर्क है कि इससे स्वतंत्रता और कम होगी। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत और एमनेस्टी इंटरनेशनल की पूर्व महासचिव आइरिन खान ने इसे न्याय का मखौल बताया है। उनका आरोप है कि न्यायिक व्यवस्था को हथियार बनाया जा रहा है। बांग्लादेश में श्रम कानूनों के उल्लंघन के कई मामले हैं, लेकिन सरकार श्रमिकों का शोषण रोकने के लिए व्यवसायियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करती। वह कहती हैं कि यूनुस के खिलाफ मुकदमा और आरोप तुच्छ एवं हल्के प्रतीत होते हैं।

कुछ लोगों को यह भी संदेह है कि पद्मा नदी पर पुल बनाने की परियोजना के लिए विश्व बैंक के वित्त पोषण को रद्द करवाने के पीछे मुहम्मद यूनुस का हाथ था। हालांकि यह आरोप कभी साबित नहीं हो सका, लेकिन उन्हें अवामी लीग सरकार की दुश्मनी झेलनी पड़ी। पद्मा नदी पुल परियोजना को शेख हसीना सरकार की मुख्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से एक माना जाता है और इसने बांग्लादेश के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 1.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है।

मुहम्मद यूनुस की सजा पर बहस हो सकती है, पर एक बात निश्चित है कि उन्हें पश्चिम में बहुत लोग पसंद करते हैं। कुछ लोगों को डर है कि उनकी सजा से बांग्लादेश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का प्रवाह प्रभावित हो सकता है। एफडीआई एक सफल विकास रणनीति का प्रमुख तत्व है, क्योंकि यह आर्थिक बदलाव लाने के लिए आवश्यक पूंजी और तकनीकी हस्तांतरण को संभव बनाता है। कई वजहों से बांग्लादेश का एफडीआई प्रवाह हमेशा काफी कम रहा है। लाल फीताशाही और भ्रष्टाचार के अलावा, बहुराष्ट्रीय कंपनियों को उनका मुनाफा वापस देने से रोकने का सरकार का निर्णय उनमें से एक है।

बांग्लादेश अपने निर्यात के लिए भी पश्चिमी देशों पर बुरी तरह से निर्भर है। करीब 40 अरब डॉलर मूल्य के बांग्लादेशी निर्यात का एक बड़ा हिस्सा अमेरिका एवं यूरोपीय संघ जाता है। यदि वहां हुए चुनाव को स्वतंत्र, निष्पक्ष और भागीदारीपूर्ण नहीं माना जाता है, तो यह अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। इस बार बांग्लादेश के चुनाव पर पश्चिमी देशों की तीखी नजर रही। अब यह देखना है कि चुनाव के बाद बांग्लादेश राजनीतिक गतिरोध से कैसे निपटता है। यदि शेख हसीना सरकार मुल्क में राजनीतिक स्थिरता लाने में विफल रहती है, तो यह पश्चिमी देशों को नई कठिनाइयां पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करेगा, जो शायद बांग्लादेश को पसंद न आए, खासकर तब, जब वह विदेशी मुद्रा के संकट का सामना कर रहा है।
(-लेखक एमपी-आईडीएसए में एसोसिएट फेलो हैं।)

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed