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घोटाले में घिरते शरीफ

Thu, 03 Nov 2016 05:29 PM IST
मरिआना बाबर
मरिआना बाबर Updated Thu, 03 Nov 2016 05:29 PM IST
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Sharif surrounded in scandal
मरिआना बाबर

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने अंततः लोकतंत्र के तीसरे स्तंभ के रूप में दखल देते हुए नवाज शरीफ सरकार को कुछ राहत दी और कहा है कि वह पनामा पेपर्स मामले में खुद जांच के लिए तैयार है, जिसमें प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के बेटे हसन और हुसैन शरीफ तथा उनकी बेटी मरियम शरीफ समेत सैकड़ों पाकिस्तानियों के नाम शामिल हैं। पनामा पेपर्स में पाकिस्तान तहरीक-ए इंसाफ पार्टी के नेता इमरान खान और उनकी पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं के अलावा दर्जनों ऐसे ताकतवर लोगों के भी नाम हैं, जिनकी टैक्स हेवन देशों में अपनी कंपनियां हैं। पाकिस्तान के कानून के मुताबिक, विदेशी कंपनियों में धन होना अवैध नहीं है। पर इन लोगों को यह साबित करना होगा कि उनका पैसा उन कंपनियों में कैसे गया। क्या उन पैसों पर आयकर चुकाया गया और धन को हस्तांतरित करने के लिए कौन-सी विधि अपनाई गई?

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नवाज शरीफ की संतानें अब तक विदेशी कंपनियों में धन के इस हस्तांतरण के बारे में अपनी सफाई से लोगों को संतुष्ट नहीं कर पाई हैं। बीते मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय पीठ ने पांच विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई की, जिसका नेतृत्व मुख्य न्यायाधीश अनवर जहीर जमाली कर रहे थे। अदालत ने कहा कि यह पीठ पनामा पेपर्स लीक मामले के निपटारे के लिए रोज सुनवाई करेगी।
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सुप्रीम कोर्ट ने शरीफ सरकार के प्रति अपने गुस्से का भी इजहार किया कि कोई भी केंद्रीय जांच एजेंसी इस मामले की जांच करने के लिए तैयार नहीं है। अदालत ने पिछले महीने एक याचिका स्वीकार की थी, पर मंगलवार को ही उसने अपना बयान जारी किया। गौरतलब है कि इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए इंसाफ ने दो नवंबर को इस्लामाबाद बंद का आह्वान किया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद इमरान खान ने न केवल इस बात की घोषणा की कि सुप्रीम कोर्ट पंजाब और खैबर पख्तुनख्वा के गृहयुद्ध जैसे हालात से मुल्क को बचा रहा है, बल्कि अपने प्रस्तावित इस्लामाबाद बंद और धरने को भी उन्होंने रद्द कर दिया।
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भले ही सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से नवाज शरीफ को थोड़ी राहत मिल गई हो, लेकिन पनामा पेपर्स लीक मामले में अपने बच्चों के नाम की सफाई को लेकर उन पर दबाव बना हुआ है। इस बात की भी आशंका है कि सुप्रीम कोर्ट उन्हें इस्तीफा देने के लिए कहे और जब तक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ अपने बच्चों के नाम को लेकर कोई सफाई नहीं दें, सदन में नए नेता की नियुक्ति करें।

सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को पेश किए गए प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के बयान में कहा गया है कि यदि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप अदालत के अंतिम फैसले में सही साबित होते हैं, तो वह आगामी कानूनी परिणाम भुगतने के लिए तैयार हैं। उनके बयान में आगे कहा गया है- मैं कोर्ट से दरख्वास्त करते हुए उम्मीद करता हूं कि इसी तरह के आरोप याचिकाकर्ता (इमरान खान), उनकी बहन (पीटीआई नेता) जहांगीर तरीन और अन्य लोगों के खिलाफ भी हैं, इसलिए उन मामलों को भी उतने ही महत्व के साथ उसी न्यायिक आयोग को सौंपा जाएगा। हालांकि प्रधानमंत्री के वकील से मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अगर वह इन लोगों का नाम भी शामिल करना चाहते हैं, तो इस मामले में याचिका दाखिल कर सकते हैं।

सवाल यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस्लामाबाद में अराजकता रोकने के लिए अंतिम क्षण तक इंतजार क्यों किया। पाकिस्तान में आम तौर पर जब किसी निर्वाचित सरकार को हटाने के लिए लोग सड़कों पर उतरते हैं, तो निर्वाचित सरकार को हटाने का काम सेना करती है और मुल्क में मार्शल लॉ की घोषणा करती है।

पनामा गेट घोटाले के उजागर होने के बाद सरकार ने प्रधान न्यायाधीश से दरख्वात किया था कि वह इस मामले की जांच के लिए एक आयोग का गठन करे। पर पाकिस्तान के प्रधान न्यायाधीश ने 13 मई को जांच करने से इन्कार कर दिया था, क्योंकि वह नवाज शरीफ द्वारा सौंपे गए दस्तावेजों से संतुष्ट नहीं थे। पाकिस्तानी अवाम को, जो सुप्रीम कोर्ट का काफी सम्मान करती है, इस हस्तक्षेप से स्वतंत्र जांच की उम्मीदें मजबूत हुई हैं, लेकिन क्या नवाज शरीफ और विपक्षी दल इस जांच के संदर्भ शर्तों (टीओआर) को मानेंगे?

अंग्रेजी दैनिक द डॉन ने इस पर टिप्पणी करते हुए लिखा है,' राजनीति के सभी खिलाड़ियों को न्यायपालिका के सामने खुद को पेश करना चाहिए। अगर गलत हुआ है, तो इसे निश्चित रूप से विधिपूर्वक स्थापित किया जाना चाहिए और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। यदि मुल्क एक अलग राजनीतिक दिशा चाहता है, तो यह निश्चित रूप से चुनाव के जरिये होना चाहिए। एक लोकतांत्रिक शासन केवल कानून के राज पर आधारित होता है और उसी रास्ते आगे बढ़ता है।'

नवाज शरीफ ने धरना के लिए जमा हो रहे पीटीआई के कार्यकर्ताओं के खिलाफ जिस तरह बल प्रयोग किया, उसके लिए उनकी आलोचना हो रही है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसी कठोरता के लिए कोई जगह नहीं होती। इमरान खान की भी, जिन्हें अब यू-टर्न खान कहा जाता है, क्योंकि वह कभी भी अपना मन बदल लेते हैं, इस बात के लिए आलोचना हो रही है कि उन्होंने राज्य व्यवस्था के खिलाफ अपने कार्यकर्ताओं के जरिये हिंसा का प्रयोग किया। पीटीआई के दो नवंबर के विरोध प्रदर्शन को स्थगित करने की घोषणा के बाद क्रिकेट की शब्दावली का प्रयोग करते हुए एएनपी प्रमुख अस्फंदयार वली ने कहा कि इमरान खान नो बॉल पर आउट होते रहे हैं। लेकिन आज उनका यू-टर्न बताता है कि प्रधानमंत्री ने उन्हें नो बॉल पर क्लीन बोल्ड कर दिया है।


बहरहाल, जहां नवाज शरीफ अदालत में अपना मामला जीतने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं सबकी निगाहें प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ लगी हैं, जहां किसी भी दिन नए सेना प्रमुख के नाम की घोषणा हो सकती है। नए नाम की घोषणा से ही पता चलेगा कि नवाज अपने किसी पसंदीदा व्यक्ति को चुनते हैं या कानून का सख्ती से पालन करते हुए किसी वरिष्ठ सेना नायक को।

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