फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   shanti nuclear energy act india private participation strategic control Atomic Energy Reform

'शांति' अधिनियम: परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में नया अध्याय, निजी भागीदारी के साथ भी रणनीतिक हितों पर आंच नहीं

Mon, 16 Feb 2026 07:00 AM IST
Vinay Jhelawat विनय झैलावत
Updated Mon, 16 Feb 2026 07:00 AM IST
विज्ञापन
सार
ताजा अधिनियम का मूल उद्देश्य भारत के परमाणु ऊर्जा तंत्र पर रणनीतिक नियंत्रण बनाए रखना है। भले ही यह क्षेत्र निजी भागीदारी के लिए खुल रहा है, अधिनियम यह सुनिश्चित करता है कि महत्वपूर्ण कार्य संप्रभु निगरानी में ही रहें।
loader
shanti nuclear energy act india private participation strategic control Atomic Energy Reform
भारत के परमाणु कार्यक्रम - फोटो : ANI

विस्तार

हाल ही में संसद द्वारा पारित ‘सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (शांति)' विधेयक को मंजूरी दे दी है। विधेयक में असैन्य परमाणु क्षेत्र से संबंधित सभी कानूनों को शामिल किया गया है। भारत का परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम अब तक परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 2010 के अंतर्गत आता रहा है। 1962 के अधिनियम ने भारत के परमाणु कार्यक्रम की नींव रखी थी। इससे सरकार को शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु ऊर्जा को विनियमित करने का अधिकार मिला और परमाणु सामग्री के अनुसंधान, विकास और उपयोग पर कड़ा नियंत्रण सुनिश्चित हुआ। नए अधिनियम में भारत के परमाणु कानूनी ढांचे को सुदृढ़ एवं आधुनिक बनाया गया है। इससे नियामक निगरानी के तहत परमाणु क्षेत्र में सीमित निजी भागीदारी संभव हो सकेगी।


 इसमें परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड को वैधानिक मान्यता प्रदान की गई है। यह अधिनियम निजी कंपनियों को भारत के परमाणु क्षेत्र में, संयंत्र संचालन, बिजली उत्पादन, उपकरण निर्माण और परमाणु ईंधन निर्माण, जिसमें ‘यूरेनियम-235 का रूपांतरण, शोधन और संवर्धन' शामिल है, में भाग लेने की अनुमति देता है। हालांकि, ‘कुछ संवेदनशील गतिविधियां' पूरी तरह से सरकारी नियंत्रण में रहेंगी। यह भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन और 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता प्राप्त करने के दीर्घकालिक लक्ष्य का समर्थन करता है। भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम ने विद्युत मिश्रण में एक स्थिर भूमिका बनाए रखी है और अब विस्तार के लिए तैयार है। वर्तमान परमाणु ऊर्जा क्षमता 8.78 गीगावाट है। अंतरराष्ट्रीय सहयोग से विकसित किए जा रहे स्वदेशी 700 मेगावाट और 1000 मेगावाट रिएक्टरों के साथ, 2031-32 तक क्षमता 22 गीगावाट से अधिक होने का अनुमान है। 'शांति' अधिनियम भारत की परमाणु यात्रा के अगले चरण को आकार देने में एक महत्वपूर्ण कदम है। भारत को उम्मीद है कि वह 2033 तक स्वदेशी लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर) चालू कर देगा। सरकार आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना के तहत इस क्षेत्र को बढ़ावा देने की योजना बना रही है। इस दौरान विदेशी निर्माता नवगठित निजी संस्थाओं को अपनी तकनीकें आक्रामक रूप से बेचेंगे। परमाणु क्षमता स्थापित करने की इच्छुक भारतीय निजी कंपनियां और औद्योगिक उपभोक्ता लगभग एक दशक तक अप्रमाणित स्वदेशी डिजाइनों का इंतजार नहीं करेंगे। उन्हें अन्य बाजारों में पहले से ही व्यावसायिक उपयोग में लाए जा रहे विदेशी विकल्प कम जोखिम भरे प्रतीत हो सकते हैं। एकल-संचालक मॉडल परमाणु ऊर्जा के विस्तार में मूलभूत बाधा रहा है। न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड को अन्य सभी विकास प्राथमिकताओं के साथ पूंजी के लिए प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है। शांति अधिनियम परिष्कृत नीतिगत संरचना का उदाहरण है, जिसमें चार स्तरीय न्यायनिर्णय तंत्र है। यह नियामक निश्चितता सुनिश्चित करता है। यह एक सूक्ष्म दायित्व ढांचा है, जो सार्वजनिक सुरक्षा बनाए रखते हुए निवेश योग्य परियोजनाएं तैयार करता है। इसमंे रणनीतिक सीमांकन है, जो व्यावसायिक अवसरों और सुरक्षा आवश्यकताओं के बीच संतुलन स्थापित करता है।


हालांकि परमाणु परियोजनाओं के समय-सीमा निर्धारण में भारत का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। रिएक्टर निर्धारित समय से वर्षों देरी से चालू होते हैं, जिससे लागत में वृद्धि आम बात है। ‘शांति’ अधिनियम इन चुनौतियों का समाधान नहीं करता, बल्कि दूसरों को उन क्षेत्रों में प्रयास करने के लिए कानूनी गुंजाइश प्रदान करता है। ऊर्जा परिवर्तन के इस चरण में देश अपने परमाणु ढांचे की नींव की समीक्षा कर रहा है, ताकि यह वर्तमान जरूरतों और भावी महत्वाकांक्षाओं के अनुरूप हो सके। दशकों से, भारत के परमाणु कार्यक्रम की तकनीकी क्षमताएं मजबूत हुई हैं। इसके स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य व्यापक हुए हैं। इन सबने एक ऐसे आधुनिक, व्यापक कानून की आवश्यकता पैदा की है, जो आज की वास्तविकताओं और भविष्य की आवश्यकताओं को प्रतिबिंबित करे।

‘शांति’ अधिनियम एक श्रेणीबद्ध जवाबदेही ढांचा स्थापित करता है, जिसके तहत, संचालकों की जवाबदेही की सीमाएं विधेयक की दूसरी अनुसूची में विस्तार से बताई गई हैं। यह अधिनियम स्वास्थ्य सेवा, कृषि, उद्योग, अनुसंधान और अन्य शांतिपूर्ण अनुप्रयोगों में परमाणु और विकिरण प्रौद्योगिकियों के उपयोग के लिए एक नियामक ढांचा प्रदान करता है। यह अनुसंधान, विकास और नवाचार से संबंधित कार्यों जैसी सीमित गतिविधियों के लिए लाइसेंस में छूट प्रदान करता है। यह अधिनियम सुरक्षा, सुरक्षा उपायों, गुणवत्ता आश्वासन और समन्वित आपातकालीन तैयारी और प्रतिक्रिया के लिए प्रणालियों में सुधार करता है। इसके अलावा, यह अधिनियम परमाणु गतिविधियों से संबंधित विशिष्ट मामलों में केंद्र सरकार को अनन्य अधिग्रहण अधिकार प्रदान करता है। अधिनियम विवादों के निवारण के लिए एक परमाणु ऊर्जा निवारण सलाहकार परिषद की स्थापना का प्रावधान करता है। विद्युत अधिनियम, 2003 के तहत स्थापित विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण अपीलीय प्राधिकारी के रूप में कार्य करेगा, जिसे अधिनियम के प्रावधानों और केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किसी भी अतिरिक्त मामले के तहत अपील सुनने का अधिकार है।

यह अधिनियम केंद्र सरकार को परमाणु क्षति से संबंधित मुआवजे के दावों के निपटारे के लिए दावा आयुक्तों की नियुक्ति का अधिकार देता है और गंभीर मामलों को संभालने और समय पर निपटारे के लिए एक समर्पित आयोग का प्रावधान करता है। 

इस अधिनियम का मूल उद्देश्य भारत के परमाणु ऊर्जा तंत्र पर रणनीतिक नियंत्रण बनाए रखना है। भले ही यह क्षेत्र निजी भागीदारी के लिए खुल रहा है, अधिनियम यह सुनिश्चित करता है कि महत्वपूर्ण कार्य संप्रभु निगरानी में ही रहंे। कानूनी ढांचे का आधुनिकीकरण और संस्थागत निगरानी को मजबूत करके यह अधिक कुशल, नवोन्मेषी और सुरक्षित परमाणु ऊर्जा तंत्र की नींव रखता है। यह अधिनियम स्वच्छ और विश्वसनीय ऊर्जा के विस्तार का समर्थन करने के साथ यह सुनिश्चित करता है कि रणनीतिक हित पूरी तरह से सुरक्षित रहें।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed