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गरीब को आत्मसम्मान देने वाले सात साल

Sun, 30 May 2021 05:45 AM IST
अनिल बलूनी अनिल बलूनी
अनिल बलूनी Published by: अनिल बलूनी Updated Sun, 30 May 2021 05:45 AM IST
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Seven years of self-respect for the poor, read Anil Baluni article
नरेंद्र मोदी-अमित शाह-राजनाथ सिंह (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

मोदी सरकार के सात वर्ष पूरे हो रहे हैं। इन सात वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी ने शासन में ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ सरकार चला कर देश की आम जनता का विश्वास जीता है। हमारी सरकार सबका साथ, सबका विकास की बात करती है, वोट बैंक के लिए जाति-पाति या भेदभाव की राजनीति नहीं करती। यह मोदी सरकार की नीतियों, योजनाओं और अभियानों का असर है कि तेजी से देश की गरीबी खत्म हो रही है। पिछले साढ़े चार साल में पांच करोड़ लोग लोग गरीबी रेखा से ऊपर हो गए हैं।


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कोरोना के कारण पैदा हुई स्थितियां अभूतपूर्व हैं। सरकारों को तो छोड़िए, अनेक पीढ़ियों के लिए भी ये बिल्कुल नया अनुभव है। कोरोना ने समाज के हर वर्ग को बुरी तरह से प्रभावित किया है, लेकिन गरीब के लिए तो ये मानो अस्तित्व का संकट था। कमाएगा नहीं तो भूख से जान जाएगी, कमाने निकलेगा तो वायरस मार डालेगा। ऐसी स्थिति में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना और गरीब कल्याण योजना के तहत लगभग 80 करोड़ देशवासियों तक मुफ्त राशन पहुंचाना- ये देश ही नहीं, दुनिया के इतिहास में भी किसी सरकार ने पहली बार किया है।  

गरीब तो आजादी के बाद राजनीति के केंद्र में हमेशा ही रहा है। गरीब के नाम पर बातें, वादे, योजनाएं बहुत बनीं, लेकिन गरीब तक कितना पहुंचा, इसका आकलन होता रहता है। गरीब के जीवन में असली परिवर्तन का असली पैमाना ये है कि क्या सरकार उस तक पहुंच पाई है? क्या गरीब की बातें सरकार तक पहुंच पाती हैं? क्या सरकारी लाभ उस गरीब तक पहुंचता है, जिसके लिए वह दिया गया है? गरीब को सिर्फ मदद नहीं चाहिए, उसको गरिमा चाहिए और गरीबी से बाहर निकलने के लिए प्रोत्साहन चाहिए।

2014 से पहले और 2014 के बाद में गरीब से जुड़ी नीतियों, कार्यक्रमों और गवर्नेंस में यही आधारभूत परिवर्तन आया है। दिल्ली से निकली पाई-पाई गांव-गरीब तक पहुंचती है, ये विश्वास देश में पहली बार जागा है। गरीब के लिए बनी योजनाओं का जमीन पर पहुंचना और गरीब के जीवन में आत्मविश्वास भरना, ये मोदी सरकार की बहुत बड़ी उपलब्धि है। गरीब को क्या चाहिए? अपना घर, बिजली, पानी, राशन, इलाज, ऐसी छोटी-छोटी जरूरतें गरीब की है। गरीबी हटाओ, जैसी व्यर्थ की नारेबाज़ी से बचते हुए मोदी सरकार ने इंपेक्ट पर ध्यान दिया। पहली बार गरीब को उसकी मर्जी का सिर्फ घर ही नहीं, मिल रहा बल्कि बिजली, पानी, गैस, शौचालय जैसी सुविधाएं भी घर पर मिल रही हैं। रिसर्च से ये भी सिद्ध हुआ है कि खुले में शौच से मुक्ति के कारण गरीबों में गंदगी और पानी से जुड़ी बीमारियां बहुत कम हो गई हैं। हर घर जल पहुंचाने वाली योजना तो गरीब के स्वास्थ्य, सुविधा और सम्मान को नया आयाम देने वाली है।

गरीब परिवार में जब कोई गंभीर बीमारी का शिकार होता है, तो ये मान लिया जाता है कि उसकी रक्षा सिर्फ ऊपर वाले के ही हाथ में है। स्थिति ये थी कि गरीब सरकारी अस्पताल जाने तक की नहीं सोचता था, निजी अस्पताल तो कल्पना से भी परे थे। ये एक बहुत बड़ा कारण है कि गरीब तंत्र-मंत्र के चक्कर में सबसे अधिक पड़ता है। इलाज के लिए अपनी जमीन, अपना घर गिरवी रखकर कर्ज भी ये देखकर लिया जाता है कि मरीज की उम्र क्या है। ऐसी स्थिति में जब गरीब परिवारों को पांच लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज का भरोसा मिल जाता है, तो ये कितना बड़ा संबल उसके जीवन में होगा, ये अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। जरा सोचिए, जिन पौने दो करोड़ से ज्यादा मरीजों को अभी तक इसका लाभ मिल चुका है, उनके अनुभवों से क्या बाकी गरीब परिवारों को भी संबल नहीं मिलता?

40 करोड़ से ज्यादा लोगों को बैंक से जोड़ने भर से ही गरीब को बहुत बड़ी ताकत मिली है। पहली बार गरीब को ये एहसास हुआ है कि वह भी सिस्टम का हिस्सा है। कोरोना काल में इसकी उपयोगिता सिद्ध भी हुई है, जब करोड़ों परिवारों तक सरकार की सीधी मदद पहुंची है। बीते सालों में लाखों करोड़ रुपये से ज्यादा सरकारी मदद सीधी लाभार्थियों तक पहुंची है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा पहले किसी और की जेब में पहुंचता था। पारदर्शिता को बढ़ाने के लिए मोदी सरकार ने टेक्नॉलॉजी का भरपूर उपयोग किया है। जनधन बैंक खाते, आधार और मोबाइल फोन, इनकी साझा शक्ति ने आज भारत को डिजिटल गवर्नेंस के अग्रणी देशों में खड़ा कर दिया है। गरीब के हक का राशन लूटा जा रहा था, वह अब बंद हुआ है।

किसी भी विकसित देश में बीमा और पेंशन जैसे सामाजिक सुरक्षा कवच पर बहुत बल दिया जाता है लेकिन भारत में पेंशन तो छोड़िए, बीमा जैसी योजनाएं मध्यम वर्ग तक की पहुंच से बाहर थीं। पर, मोदी सरकार ने पहली बार 90 पैसे प्रतिदिन और एक रुपया महीना के मामूली प्रीमियम पर 2-2 लाख रुपए की जीवन बीमा और दुर्घटना बीमा की योजनाएं चलाई हैं। पहली बार गरीब को तीन हजार रुपए मासिक पेंशन का एक सहारा भी उपलब्ध हो पाया है।

ऐसे ही अनेक काम हैं, जो मीडिया की हेडलाइंस नहीं बनते हैं, लेकिन गरीब, उनका असर अनुभव कर रहा है। बीते सात साल में पहली बार गरीब को ये लग रहा है कि उसकी पहुंच सरकार तक है। यही कारण है कि विपक्ष और मोदी विरोधियों की तरफ से अपनाए गए हर हथकंडे और दुष्प्रच्रार के बावजूद गरीबों के बीच पीएम मोदी के प्रति समर्थन निरंतर बढ़ रहा है।

 

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