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स्वार्थ है पतन का सबसे बड़ा कारण

Mon, 05 Aug 2013 08:43 PM IST
शिवकुमार गोयल
शिवकुमार गोयल Updated Mon, 05 Aug 2013 08:43 PM IST
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Selfishness is the greatest cause of collapse

ईसा मसीह जैतून पहाड़ पर अकेले बैठे हुए थे। अचानक उनके कुछ शिष्य वहां पहुंचे। एक ने उनसे प्रश्न किया, समाज में अधर्म बढ़ता जा रहा है। स्वार्थ भावना पनप रही है। संसार का भविष्य क्या होगा?

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ईसा मसीह ने कहा, वास्तव में मनुष्य स्वार्थ में अंधा होता जा रहा है। इससे एक-दूसरे पर आक्रमण करने की प्रवृत्ति बढ़ेगी। जाति पर जाति और राज्य पर राज्य चढ़ाई करेंगे। जगह-जगह अकाल पड़ेंगे और भूकंप होंगे। परिणामस्वरूप जन-धन की व्यापक हानि होगी। अधर्म के पनपने से नए-नए 'मसीह' पैदा करने की होड़ भी बढ़ेगी।
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बहुत से लोग मेरे नाम से कहेंगे कि मैं ही मसीह हूं। झूठे भविष्यवक्ता भ्रम फैलाते दिखाई देंगे। ऐसी स्थिति में तुम सबको सावधानीपूर्वक इन भ्रमों से दूर रहना चाहिए। यदि तुमसे कोई कहे कि वह (मसीह) जंगल या कोठरियों में है, तो विश्वास न करना। जो अंत तक धीरज धरे रहेगा, अविचल रहेगा, वस्तुतः उसी का उद्धार होगा।
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ईसा ने भविष्यवाणी की, अंतिम समय में कठिन दिन आएंगे। मनुष्य स्वार्थी, लालची, डींगे हांकने वाला और अभिमानी बन जाएगा। वह असंयमी, विश्वासघाती और कृतघ्न बन जाएगा। परमेश्वर से प्रेम करना छोड़कर वह सुख-विलास का दास बन जाएगा। लोग भक्ति का दिखावा तो करेंगे, लेकिन परमेश्वर के आदेश को नहीं मानेंगे। इसलिए ऐसे लोगों से दूर रहना।

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