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विज्ञान की दुनिया: रॉकेट इतनी तेज गति से उड़ान क्यों भरते हैं? चालीस हजार किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार...

Thu, 06 Feb 2025 05:27 AM IST
दीपक कुमार शर्मा बेंजामिन एल. इमर्सन
बेंजामिन एल. इमर्सन Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Thu, 06 Feb 2025 05:27 AM IST
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सार
रॉकेट को पृथ्वी की कक्षा से बाहर जाने के लिए कम से कम चालीस हजार किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार की जरूरत होती है। पृथ्वी छोड़कर अंतरिक्ष में जाने के लिए रॉकेटों को बहुत अधिक बल की जरूरत पड़ती है, इसलिए वे बहुत तेजी से प्रणोदक का उपयोग करते हैं। सौरमंडल के सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति के गुरुत्वाकर्षण से बाहर जाने के लिए रॉकेट को पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से पांच गुना अधिक करीब 2,14,000 किमी प्रति घंटा गति की जरूरत पड़ेगी।
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Science and high speed rockets world 40k kilometers per hour travel speed know reasons
बेंजामिन एल. इमर्सन और सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एक दस वर्षीय बच्चे बो. एच ने मुझसे सवाल किया कि पृथ्वी से दूर जाने के लिए रॉकेट चालीस हजार किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान क्यों भरता है? मैंने उसे बताया कि इसका सबसे बड़ा कारण पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल है, जिससे बचने के लिए रॉकेट को इतनी तेजी से जाना पड़ता है। गुरुत्वाकर्षण वही है, जिसका अनुभव हम अपने दैनिक जीवन में भी करते हैं। यही वह बल है, जो आपको जमीन से जोड़े रखता है, अन्यथा आप अंतरिक्ष में उड़ जाएंगे।



पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण इतना मजबूत है कि यह हमारी धरती के काफी दूर-दूर तक फैला हुआ है। इसलिए अंतरिक्ष में जाने वाले रॉकेट को पृथ्वी की कक्षा को छोड़ना काफी मुश्किल होता है। निश्चित रूप से, रॉकेट को बल पैदा करने आैर गर्म गैस बनाने के लिए प्रणोदक को जलाकर जोर लगाना पड़ता है। इसके बाद यह उन गर्म गैस को नोजल से बाहर निकाल देता है। यह उसी तरह होता है, जैसे-एक गुब्बारे को फुलाकर छोड़ देने पर वह हवा में उड़ता है। रॉकेट प्रणोदक में ईंधन और ऑक्सीडाइजर दोनों होते हैं। ईंधन आम तौर पर ज्वलनशील होता है, सामान्यत: हाइड्रोजन, मीथेन या केरोसिन। ऑक्सीडाइजर आम तौर पर तरल ऑक्सीजन होता है, जो ईंधन के साथ प्रतिक्रिया करता है और इसे जलने देता है। पृथ्वी छोड़कर अंतरिक्ष में जाने के लिए रॉकेटों को बहुत अधिक बल की जरूरत पड़ती है, इसलिए वे बहुत तेजी से प्रणोदक का उपयोग करते हैं। जिस तरह बाइक को दूसरे स्थान पर जाने के लिए कम से कम जिस गति की जरूरत होती है, वैसे ही रॉकेट को पृथ्वी की कक्षा से बाहर जाने के लिए कम से कम 25,020 मील प्रति घंटा (40,000 किलोमीटर प्रति घंटा) गति की जरूरत पड़ती है। वैज्ञानिक इस गति को पलायन वेग कहते हैं। यदि गति इससे थोड़ी भी कम हुई, तो रॉकेट लौटकर पृथ्वी पर गिरेगा।


ग्रह जितना बड़ा होता है, उसके गुरुत्वाकर्षण से दूर जाने के लिए उतने ही बल की जरूरत पड़ती है। जैसे-हमारे सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह बृहस्पति है, यह इतना बड़ा है कि इसमें हमारी एक हजार जैसी पृथ्वियां समा जाएंगी। इसलिए बृहस्पति के गुरुत्वाकर्षण से बाहर जाने के लिए रॉकेट को पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से पांच गुना अधिक करीब 2,14,000 किलोमीटर प्रति घंटा गति की जरूरत पड़ेगी। किसी कक्षा को छोड़ने की चरम गति ब्लैक होल की होगी, एक अरब किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक। चूंकि यह नामुमकिन है, इसलिए ही इसे ब्लैक होल कहते हैं।  -द कन्वर्सेशन से

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