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नए भारत के साथ बदलता सऊदी अरब

Thu, 21 Feb 2019 06:37 PM IST
salman haidar सलमान हैदर
Updated Thu, 21 Feb 2019 06:37 PM IST
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Saudi Arabia changing with new India
भारत-सऊदी अरब

सऊदी अरब के शहजादे मोहम्मद बिन सलमान का दो दिवसीय भारत दौरा एशिया के दो ताकतवर मुल्कों के बीच संबंधों का नया अध्याय है। मोहम्मद बिन सलमान (एमबीएस) अपने मुल्क को उसकी पुरानी पहचान से निकालकर आधुनिक बनाना चाहते हैं। तरक्की के लिए वह अरब को उसके अब तक केे बने-बनाए दायरे से निकालना चाहते हैं। उन्होंने हाल में कुछ ऐसे सुधारवादी फैसले लिए हैं, जिनके आधार पर ऐसी बातें कही जा सकती हैं। हालांकि उन पर आरोप भी लगते रहे हैं कि वह असल में सुधारवादी नहीं हैं। लेकिन हमें वही मानना चाहिए, जो कि आंखों से स्पष्ट दिखता है।


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अपने इस अभियान में शहजादे एमबीएस नए विदेशी साझेदार की तलाश में हैं। उनका भारत दौरा इस बात की तस्दीक करता है कि उन्होंने भारत को अपना सबसे भरोसेमंद साथी बनाने का फैसला किया है। फिर इस बात पर कोई बहस नहीं होनी चाहिए कि भारत आने से पहले उन्होंने पाकिस्तान का दौरा किया। वह न सिर्फ पाकिस्तान गए, बल्कि उन्होंने वहां की इमरान खान सरकार से करीब बीस अरब डॉलर के निवेश के समझौते भी किए हैं। किसी भी देश को दो अलग-अलग मुल्कों से रिश्ते कायम करने का पूरा हक है, फिर चाहे वे मुल्क आपस में कितने ही बड़े दुश्मन क्यों न हों। और वैसे भी सऊदी अरब और पाकिस्तान के प्रगाढ़ ऐतिहासिक संबंध रहे हैं।

हां, यह जरूर है कि भारत व पाकिस्तान  के उनके दौरे जिस वक्त हुए, वह सामान्य नहीं था। पुलवामा आतंकी हमले के बाद पूरे हिंदुस्तान में पाकिस्तान के खिलाफ वाजिब गुस्सा है। कश्मीर में घटित हुई इस कायराना हरकत की वजह से ही इस यात्रा पर लोगों का अतिरिक्त ध्यान गया। लेकिन हमें समझना होगा कि सऊदी शहजादे की यह यात्रा पूर्व निर्धारित थी। और इतने बड़े आतंकी हमले के बाद भी उन्होंने अपनी भारत यात्रा रद्द नहीं की। यह दिखाता है कि वह खुद आतंकियों को यह संदेश देना चाहते थे कि उनकी भारत यात्रा औपचारिकता से बढ़कर है।

दरअसल एमबीएस भारत की ताकत को बहुत अच्छी तरह से समझते हैं। वह हिंदुस्तान की कामयाबी को सऊदी अरब की आकांक्षाओं के साथ मिलाना चाहते हैं। हमारे प्रधानमंत्री ने भी सऊदी शहजादे का गर्मजोशी से स्वागत किया। प्रधानमंत्री मोदी और एमबीएस के बीच लंबी बातचीत हुई। यकीनी तौर पर इस बातचीत में कश्मीर की दहशतगर्दी को लेकर भी चर्चा हुई होगी। ऐसे में हिंदुस्तान यह चाहता था कि एमबीएस इस मामले पर अपना पक्ष जरूर रखें। वह भी तब, जब अमेरिका से लेकर न्यूजीलैंड तक के दुनिया के दो अलग-अलग छोरों से इस आतंकवादी हमले की कड़ी भर्त्सना की गई, मगर इस मुद्दे पर सऊदी अरब ने साफ जबान से कुछ नहीं कहा। यह माना जा सकता है कि अंतरराष्ट्रीय मसलों पर इस कदर चुप रहना सऊदी अरब का अपना तरीका है। और सिर्फ इस चुप्पी के आधार पर सऊदी अरब से रिश्ते खराब करना कहीं से भी समझदारी नहीं है। अच्छी बात है कि अपने देश की हुकूमत यह अच्छी तरह से समझती है।

सऊदी अरब ने भारत के विभिन्न क्षेत्रों में 100 अरब डॉलर के निवेश की बात कही है। सऊदी अरब की ओर से यह निवेश ऊर्जा, तेल शोधन, पेट्रोकेमिकल्स, आधारभूत ढांचा जैसे क्षेत्रों में किया जाएगा। यह निवेश इसलिए भी हकीकत से दूर नहीं दिखता, क्योंकि 2016 में प्रधानमंत्री मोदी की सऊदी यात्रा के बाद सऊदी अरब भारत में कई अरब डॉलर का निवेश कर चुका है। इसके अलावा भारत के अनुरोध पर सऊदी ने अपनी जेलों में बंद 850 भारतीय कैदियों को रिहा करने का भी फैसला किया है। भारत जल्द ही सऊदी अरब के साथ नौसैनिक अभ्यास भी करने वाला है।
 
साथ ही दोनों देशों ने आतंकवाद से जुड़ी सूचनाओं के अदान-प्रदान की भी बात कही है और मनी लॉन्ड्रिंग को रोकने के बारे में भी कदम उठा रहे हैं। दोनों देशों के बीच कुल पांच समझौते हुए। इनमें नेशनल इन्वेस्टर फंड में निवेश, पर्यटन, हाउसिंग कॉरपोरेशन, प्रसारण जैसे क्षेत्र शामिल हैं। भारत की पहल पर सऊदी अरब के अंतरराष्ट्रीय सोलर अलायंस में भी शामिल होने की बात कही जा रही है। इन्हीं उपलब्धियों का नतीजा है कि हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सऊदी शहजादे की इस यात्रा से काफी खुश दिखे। शहजादे एमबीएस ने भी एक कदम आगे बढ़ते हुए प्रधानमंत्री मोदी को अपना बड़ा भाई बताकर दोनों देशों के रिश्तों में और मिठास घोल दी।

निश्चित रूप से एमबीएस के इस दौरे से हमारी आर्थिक ताकत में इजाफा हुआ है। पाकिस्तान फैक्टर को दरकिनार कर भारत को सऊदी अरब के साथ सकारात्मक रूप से आगे बढ़ना चाहिए। बजाय इस अभिलाषा के कि कोई देश पाकिस्तान के प्रति हमारे रुख का समर्थन करे, हमें अपने स्तर से पूरी दुनिया के सामने पाकिस्तान की काली करतूतें सामने लाने में ऊर्जा लगानी चाहिए। क्योंकि सुबूतों के आधार पर हमारा तर्क और मजबूत होता है। आखिर भारत के दौरे पर आए सऊदी अरब के विदेश मंत्री अदेल-अल-जुबेर ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत का साथ देने की बात कही ही है। उन्होंने साफ तौर पर स्वीकारा है कि अगर जैश-ए-मोहम्मद और उसके प्रमुख मसूद अजहर के खिलाफ सुबूत हैं, तो उसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा वैश्विक आतंकवादी घोषित किया जाना चाहिए।

इस यात्रा से भारत और सऊदी अरब रिश्तों को एक नई ऊंचाई मिली है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच और ज्यादा सहयोग देखने को मिल सकता है। एमबीएस के नेतृत्व में सऊदी अरब हिंदुस्तान से बेहतर ताल्लुक रखना चाहता है, इसमें कोई दो राय नहीं है। ऊर्जा संसाधनों से भरे अरब को बदले में भारत की क्षमताओं का लाभ मिलेगा। जैसा कि प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि हर दो साल में दोनों देशों के बीच साझा सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा, इससे पता चलता है कि इस दोस्ती की जरूरत दोतरफा है।

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