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एक सड़क, अनेक सड़कें!

Thu, 04 Jul 2013 09:02 PM IST
प्रकाश पुरोहित
प्रकाश पुरोहित Updated Thu, 04 Jul 2013 09:02 PM IST
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satire on road

पूरा अमला परेशान, हैरान! क्या करें...क्या न करें! भविष्य अंधकार में नजर आ रहा है। सभी के चेहरे धुआं-धुआं। ऐसा लग रहा था, जैसे केंद्र ने मदद रोक दी हो। तब भी ऐसी घबराहट नहीं थी। अपनी कमाई पर भरोसा जो है।

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लाख रुपये खर्च कर चुनाव जीतने वाली, लाखों रुपये लगाते हुए करोड़ के सपने देखने वाली आंखें पनीली हो चली हैं, पास का भी ठीक से नजर नहीं आ रहा। सड़क पर चलते हुए लगने वाले धक्के भी उन्हें खुश नहीं कर पा रहे, वरना तो सड़क का एक-एक गड्ढा उन्हें कमाई के बढ़ते आंकड़े का मजा देता था।
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आज हम यहां जिस मुसीबत से निपटने के लिए इकट्ठा हुए हैं, उस तरह से तो पार्टी-व्हिप के बाद भी कभी एक साथ नजर नहीं आए। यानी मामला कितना गड़बड़ है कि हम आपसी रंजिश भुलाकर भी एक साथ, एक टेबल पर बैठे हैं। लेन-देन को लेकर हममें भले ही मनमुटाव हो जाए, मगर लेन-देन से परहेज करने वाला विभीषण हमारे बीच नहीं है, यही हमारी ताकत है।
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तो बात यह है कि इस शहर में दो किलोमीटर की एक सड़क ऐसी पाई गई है, जिस पर बारिश का जरा भी असर नहीं हुआ।

नगर-भ्रमण के दौरान माननीय सदस्यों ने पाया कि उस सड़क पर एक भी गड्ढा नहीं है। ऐसा भी नहीं है कि वहां कोई आता-जाता न हो। दिन-रात चलने वाली सड़क है यह। परेशानी की बात यह है कि यदि ऐसी सड़कें और बनने लगीं, तो हमारे ठेकेदार-मित्र क्या छाता सुधारने का काम करेंगे? बरसात में सड़क से ही तो उम्मीद रहती है। देखिए, अग्रवालजी ने जो सड़क बनाई थी पिछले साल, टैंकर के पानी से ही उखड़ गई... (तालियां)। इतने साल हो गए। एक भी सड़क कभी साबुत नहीं बची बरसात में।


मगर इस सड़क ने हमें बता दिया है कि गलत काम की शुरुआत हमारे यहां भी हो चुकी है। कोई विरोधी ठेकेदार घुस आया है और कुछ इंजीनियर भी उसका साथ दे रहे हैं, वरना ऐसी पक्की सड़क कैसे बन सकती है हमारे रहते हुए। आज एक बनी है, कल दो और फिर ऐसा भी हो सकता है कि पूरे शहर की ही सड़कें ऐसी बनने लगें। यह हमारी लापरवाही है कि हम ईमानदारी से काम नहीं कर रहे। मेरा आप लोगों से यही कहना है कि पहले तो नर्मदा पाइप लाइन के बहाने उस सड़क को खोद दिया जाए और फिर अग्रवालजी से बनवाई जाए। आज हम इतना ही कर लें, तो आइंदा के लिए खतरा टल सकता है।’

सभी के चेहरे फिर सड़क पर गड्ढों की तरह खिल उठे!

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