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कमाएं-खाएं और कर्ज चुकाएं
पूरन सरमा
Updated Mon, 01 Jul 2013 10:13 PM IST
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गैस के दाम बढ़ गए? रोजमर्रा की चीजें-सुविधाएं महंगी हो गईं? कोई बात नहीं। हिम्मत को पस्त न होने दें। सरकार कुछ नहीं कर पा रही, कोई मलाल नहीं। जिसने अपनी हिम्मत खो दी, वह जीवन में कुछ नहीं कर सकता।
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सरकार आए दिन बताती है कि वह जन कल्याण के लिए योजनाएं बना रही है। इसलिए पांच वर्ष धैर्य रखें। छोटी-छोटी बातों को आप सलटा लें, बाकी पुल-सड़कें बनाने, कारखाने खोलने तथा अन्य बड़े काम सरकार कर रही है। छोटे कामों में सरकार को मिलता क्या है? वह उसके लिए घाटे का सौदा है। इसलिए आप अपने घर पर मोर्चा संभालें तथा सरकार को देश चलाने दें।
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इधर सरकार ने हर काम के लिए ब्याज के साथ ऋण सुविधा उपलब्ध कराने का नेक कार्य शुरू कर दिया है। आप कर्ज लेकर अपनी समस्याओं का समाधान करें, बाकी कमाएं-खाएं और समय पर ऋण की अदायगी करें।
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पानी, बिजली और टेलीफोन का बिल ज्यादा आ रहा है, गेहूं महंगा हो रहा है या आलू-प्याज के भाव आसमान छू रहे हैं, तो न घबराएं। आजकल आदमी जरा-सी परेशानी से घबरा उठता है। अरे भाई, इसमें घबराने की क्या बात है! मनोबल से आपका बच्चा पढ़ नहीं पा रहा या आप उसे पढ़ा नहीं पा रहे हैं, तो कोई बात नहीं। उसे बाल मजदूरी में लगा दो, इससे घर की आय बढ़ेगी और आपकी हिम्मत भी। माना कि बाल मजदूरी अपराध है, लेकिन इस पापी पेट के लिए मेहनत-मजदूरी करना गलत नहीं है। वैसे भी सरकार ने बाल मजदूरी कराने वालों को कहां दंडित किया है?
आपने बच्चे को पढ़ा दिया, तो वह न घर का रहेगा, न घाट का। मजदूरी के पैसे गिन लेने लायक पढ़ाना-लिखाना है, तो सरकारी स्कूल हैं ही। अपने देश के तमाम महापुरुष इन्हीं स्कूलों से तो निकले हैं। सरकार ने स्कूलों में पैरा टीचर लगा रखे हैं। मिड डे मील में दलिया-घूघरी अलग से मिलती है। अपने बच्चे से कहें कि वह वहां की सुविधाओं का भरपूर लाभ उठाए।
महंगाई अगर ज्यादा परेशान कर रही है, तो पत्नी को भी प्राइवेट फैक्टरी में काम करने भेज दें। वह भी कुछ लेकर आएगी, तो आपमें हिम्मत का संचार होगा तथा राष्ट्रीय आय में भी इजाफा होगा। पत्नी का टाइम टेबिल ऐसा सेट कीजिए कि सुबह तीन बजे उठकर वह घर का काम-काज निपटा ले और सात बजे काम पर निकल जाये। शाम को आकर फिर चौका संभाल ले। फिर देखिए कि गृहस्थी कितनी खुशहाल हो जाएगी!