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तिजोरी का सोना बैंक में

Thu, 21 May 2015 08:36 PM IST
अमर उजाला, नई दिल्ली
अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 21 May 2015 08:36 PM IST
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Safe gold in Bank

अपना इस्तेमाल न होने वाला सोना सरकार के पास रखने और बदले में निश्चित ब्याज हासिल करने की योजना अपने यहां हालांकि नई नहीं है, और इस तरह की पिछली कोशिशें विफल ही हुई हैं, बावजूद इसके नई गोल्ड मॉनिटाइजेशन स्कीम आकर्षित करती है, तो इसकी वजहें हैं। इस योजना का सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि अब कोई 30 ग्राम सोना भी बैंक में रखकर इसका लाभ ले सकता है।

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दरअसल अपने यहां लोगों का सोने से भावुक रिश्ता है, इसलिए वे न सिर्फ सोना बचाकर रखते हैं, बल्कि बुरे से बुरे समय में भी इसे बेचने में यथासंभव बचते हैं। इसी तरह अनेक मंदिरों में चढ़ावे के तौर पर सोने का भंडार मौजूद है। देश में विपुल मात्रा में सोना होने के बावजूद हम 800 से 1,000 टन सोना सालाना आयात करते हैं, जो चालू खाते का घाटा बढ़ने का एक बड़ा कारण है। इसके बजाय लॉकरों और तिजोरियों में रखा सोना अगर बैंकों में जमा करा दिया जाए, तो इससे सोने को सुरक्षित रखने की चिंता कम होगी, साथ ही, सालाना ब्याज भी मिलेगा। इसी तरह बाजार में सोने की उपलब्धता बढ़ने से इसका आयात हतोत्साहित होगा, चालू खाते का घाटा कम होगा और सोने की तस्करी पर भी अंकुश लगेगा। यानी इससे सोना बैंक में रखने वालों को तो फायदा होगा ही, अर्थव्यवस्था को भी लाभ होगा।
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पर लोगों की कुछ आशंकाएं अब भी कम नहीं हो रहीं। जैसे इस योजना में जमा सोने को गलाने का प्रावधान है, जो कुछ लोगों को पसंद नहीं आ रहा। उन्हें वही सोना वापस चाहिए, जो वे जमा कराएंगे। अपने सोने के प्रति अत्यधिक भावुक लोग इस तथ्य की अनदेखी कर रहे हैं कि सोने को गलाकर उसे समान रूप दिया जाएगा, तो यह राष्ट्रीय स्तर पर पीली धातु की शुद्धता और मानकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम होगा। पर दो आशंकाएं अब भी हैं, जिनका निराकरण हो जाना चाहिए। एक तो यही कि जमा सोने पर निर्धारित ब्याज इतना होना चाहिए, जिससे लोग इस योजना के प्रति उत्साहित हों। एक बड़ा सवाल यह भी है कि सोना जमा कराने वालों को उसका स्रोत बताना होगा या नहीं, क्योंकि केंद्र की इसी सरकार ने आय छिपाने पर सख्त सजा का प्रावधान किया है।
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जाहिर है, अगर निष्क्रिय सोने को बाजार में लाकर अर्थव्यवस्था को गति देने का उद्देश्य है, तो सरकार को कुछ लचीलापन दिखाना ही होगा।

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