{"_id":"f33669539b51b2c66b133211564bcb66","slug":"sachin-as-a-prime-minister","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रधानमंत्री सचिन","category":{"title":"Opinion","title_hn":"नज़रिया ","slug":"opinion"}}
प्रधानमंत्री सचिन
आलोक पुराणिक
Updated Mon, 02 Dec 2013 07:13 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जी, सचिन तेंदुलकर इस कदर सम्मानित, इस कदर सर्व-स्वीकार्य हैं, उन्हे पीएम बन जाना चाहिए।
विज्ञापन
अजी, कैसी बात कर रहे हैं, कितने इज्जतदार आदमी, कितनी डायनामिक पर्सनल्टी और आप कह रहे हैं कि उन्हे पीएम बन जाना चाहिए।
जी, पीएम बन जाएं, तो चख-चख खत्म हो जाए। आराम से सब इज्जत करेंगे पीएम की।
अजी, कैसी बात कर रहे हैं, पीएम बन गए सचिन तेंदुलकर, तो करेंगे क्या।
जी, पीएम बन गए, बस इतना काफी है, कुछ करने की शर्त कहां है पीएम बनने में।
अजी, कैसी बात कर रहे हैं कि सचिन पीएम हो जाएं और बस पीएम रहें, यह मतलब है आपका।
जी, पीएम बनने में सिर्फ पीएम बनना होता, कुछ करना थोड़े ही होता है। कुछ करना ही होता, तो बताओ पीएम क्यों बनते। फिर तो चैयरमैन या उपाध्यक्ष टाइप कुछ बनते।
अजी, कैसी बात कर रहे हैं, पीएम बनने के लिए देश, विदेश, अर्थशास्त्र की जानकारी जरूरी होती है।
जी, आप निहायत अहमकाना बातें कर रहे हैं। जिनके पास जानकारी होती है, वे हद से हद प्रोफेसर बन जाते हैं। जानकारी का पीएम बनने से ज्यादा कुछ खास रिश्ता नहीं है।
विज्ञापन
अजी, कैसी बात कर रहे हैं। सचिन पीएम बन गए और फिर पीएम बनकर यहीं कोल्ड ड्रिंक, इंश्योरेंस पॉलिसी वगैरह बेचते पाए गए, तो कैसा लगेगा।
जी, अरे कोई कुछ बेचो, किसी भी पोस्ट पर बेचो। क्या बुरा लगने की बात है? एक मिनिस्टर तमाम पदों को बेचते पकड़े गए, सीबीआई इंक्वॉयरी के अलावा कुछ न हुआ। अब तो हाल यह है कि घोटालेबाज घोटाले करने से पहले ही मांग करने लगते हैं कि जांच शुरू कर दी जाए, ताकि बाद में कहने को हो जाए कि लो जी, हमने तो पहले ही जांच शुरू कर दी थी। फिर सचिन कोई चोरी-छुपके थोड़े ही बेचेंगे। वह खुलेआम बेचते हैं- यह वाला कोल्ड ड्रिंक, वह वाला ड्रिंक, खुलेआम बेचा-बेची से दूसरे मिनिस्टरों को भी प्रेरणा मिलेगी कि जो भी बेचो, खुलेआम बेचो।
विज्ञापन
जी, कैसी बातें कर रहे हैं आप सचिन पीएम बनेंगे, तो मतलब कहीं बोलना पड़े, जैसे भारत-चीन संबंधों पर बोलना पड़े। बजट पर बोलना पड़े, तो क्या बोलेंगे।
अजी, हद कर दी आपने। पीएम बनकर भी बोलेंगे, तो पीएम क्यों बनें। बिना पीएम बने ही अच्छे थे।