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रूस-यूक्रेन : युद्ध से और बढ़ सकती है महंगाई, चुनावों के बीच भारत पर कैसा होगा असर

Tue, 01 Mar 2022 04:54 AM IST
Satish Singh सतीश सिंह
Updated Tue, 01 Mar 2022 04:54 AM IST
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सार
युद्ध की वजह से भारत में सीएनजी की कीमत में 15 से 20 रुपये प्रति किलो तक वृद्धि हो सकती है। ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने वर्ष 2020 में यूक्रेन से 1.45 अरब डॉलर का खाद्य तेल आयात किया था। युद्ध शुरू हो जाने से आपूर्ति शृंखला बाधित हो गई है और भारत में खाद्य तेल की कीमत में उछाल आने की आशंका है। इधर, भारत में वर्ष 2020 की तुलना में वर्ष 2021 में खाद्य तेल की कीमत में दोगुनी से भी ज्यादा की वृद्धि हो चुकी है। 
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Russia Ukraine Conflict : War may increase inflation, India will also be affected amid elections in five states
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

विस्तार

भारत का रूस और यूक्रेन, दोनों के साथ कारोबारी संबंध है। साथ ही, हजारों की संख्या में भारतीय भी वहां रहते हैं। यूक्रेन में ज्यादातर लोग पढ़ाई करने जाते हैं, जबकि रूस में भारतीय पढ़ाई, नौकरी और कारोबार करने जाते हैं। यूक्रेन में फिलहाल लगभग 20 हजार छात्र फंसे हुए हैं, जिनमें अधिकांश मेडिकल के छात्र हैं, वहीं रूस में लगभग 14 हजार भारतीय फंसे हुए हैं।



भले ही रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया है, लेकिन अभी इस युद्ध में अमेरिका या अन्य देश सीधे तौर पर शामिल नहीं हुए हैं। सीधे युद्ध की जगह अमेरिका और नाटो ने रूस पर प्रतिबंध लगाने का रास्ता चुना है, लेकिन रूस पर लगाए गए प्रतिबंध बहुत प्रभावशाली नहीं हैं। रूस और प्रतिबंधों का सामना करने के लिए तैयार है। ऐसा लग रहा है कि रूस ने पूरी तैयारी के बाद ही यूक्रेन पर हमला करने का फैसला किया है। 


ऐसे में वैश्विक स्तर पर तनाव बने रहने और विभिन्न उत्पादों की आपूर्ति बाधित रहने की आशंका है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमत में लगभग 17 प्रतिशत की वृद्धि हो चुकी है, लेकिन भारत में पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों की वजह से अभी तेल की कीमतों में वृद्धि नहीं की जा रही है, लेकिन चुनाव परिणाम के बाद इसकी कीमत में निश्चित रूप से वृद्धि की जाएगी। 

अनुमान के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमत में बढ़ोतरी के अनुरूप भारत में भी तेल की कीमत में 15 से 20 रुपये तक की वृद्धि की जा सकती है। उल्लेखनीय है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमत में एक डॉलर प्रति बैरल की वृद्धि से भारत में आयात होने वाले तेल की कुल लागत में लगभग 8,000 से 10,000 करोड़ रुपये की वृद्धि होती है।

रूस और यूक्रेन की लड़ाई से भारत के तेल आयात का आंशिक रूप से प्रभावित होना तय है और इससे भारत के तेल आयात की लागत में बढ़ोतरी होगी, जिससे देश की विदेशी मुद्रा भंडार में कमी आ सकती है। हालांकि, भारत के पास अभी पर्याप्त मात्रा में विदेशी मुद्रा का भंडार है, लेकिन अगर युद्ध कुछ और दिनों तक या महीनों तक चलता है, तो उसके लिए मुश्किलें बढ़ जाएंगी।

भारत की कुल ईंधन खपत में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी लगभग छह प्रतिशत है और इसकी आपूर्ति के लिए वह पूरी तरह से आयात पर निर्भर है। भारत लाकर इसे पीएनजी और सीएनजी में परिवर्तित किया जाता है। फिर इसका इस्तेमाल कारखानों, बिजली घरों, सीएनजी वाहनों और रसोई घरों में होता है। घरेलू प्राकृतिक गैस की कीमत में एक डॉलर की बढ़ोतरी होने पर सीएनजी की कीमत भारत में लगभग पांच रुपये प्रति किलो बढ़ जाती है। 

युद्ध की वजह से भारत में सीएनजी की कीमत में 15 से 20 रुपये प्रति किलो तक वृद्धि हो सकती है। ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने वर्ष 2020 में यूक्रेन से 1.45 अरब डॉलर का खाद्य तेल आयात किया था। युद्ध शुरू हो जाने से आपूर्ति शृंखला बाधित हो गई है और भारत में खाद्य तेल की कीमत में उछाल आने की आशंका है। इधर, भारत में वर्ष 2020 की तुलना में वर्ष 2021 में खाद्य तेल की कीमत में दोगुनी से भी ज्यादा की वृद्धि हो चुकी है। 

ऐसे में आम जनता की मुश्किल बढ़ सकती है। अलबत्ता युद्ध के कारण भारत से गेहूं का निर्यात बढ़ सकता है। रूस दुनिया के सबसे बड़े गेहूं निर्यातक देशों में से एक है, जबकि यूक्रेन विश्व में गेहूं का चौथा सबसे बड़ा निर्यातक देश है। दोनों देशों के गेहूं निर्यात को मिला दें, तो यह कुल वैश्विक निर्यात का लगभग एक चौथाई हिस्सा है। वहीं, भारत विश्व में गेहूं उत्पादन के मामले में दूसरा सबसे बड़ा देश है। 

इसलिए, कयास लगाए जा रहे हैं कि जो देश अभी रूस एवं यूक्रेन से गेहूं आयात कर रहे थे, वे अब भारत से गेहूं का आयात कर सकते हैं। रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा युद्ध जल्द खत्म होता नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में भारत की मुश्किलें आगामी दिनों में बढ़ने की आशंका है। खास करके आम भारतीयों के लिए, क्योंकि वे पहले से ही महंगाई से त्रस्त हैं और मौजूदा युद्ध से देश में ईंधन की कीमत के साथ-साथ खाद्य उत्पादों, सब्जियों और अन्य सभी उत्पादों की कीमत में इजाफा होने की आशंका है।

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