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स्वच्छ भारत अभियान में मच्छर

Wed, 30 Sep 2015 08:34 PM IST
मनु पंवार
मनु पंवार Updated Wed, 30 Sep 2015 08:34 PM IST
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Role of mosquito in clean India mission

ऐसा फिल्मों में ही हो सकता है कि एक मच्छर आदमी को हिजड़ा बना दे। वरना तो हिजड़ा भी उस मच्छर से भयभीत है, जो एक झटके में किसी भी बंदे के खून से लाखों प्लेटलेट्स लूट लेता है। खून चूसना मच्छर की फितरत है। हालांकि हर खून चूसने वाला मच्छर नहीं होता। अब उसके भांति-भांति के अवतार मार्केट में उपलब्ध हैं। दफ्तरों में वह बॉस के रूप में पाया जाता है। कई पति अपनी पत्नियों में उसे पाते हैं, तो कई बहुओं को अपनी सास में ऐसा अवतार दिखता है।

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लेकिन दाद देनी पड़ेगी डेंगू के मच्छर की। वह कोई ऐरा-गैरा नहीं है जी। एकदम सफाई पसंद मच्छर है। उसे साफ जगह, साफ पानी पसंद है। इस पर अरविंद केजरीवाल यह दावा कर सकते हैं कि उनकी सरकार दिल्ली में साफ पानी मुहैया करा रही है। सोचिए, अगर दिल्ली में साफ पानी न मिल रहा होता, तो भला डेंगू का मच्छर पैदा ही कहां से होता? वैसे इसका क्रेडिट केजरीवाल को दें या नजीब जंग को, इस पर कनफ्यूजन है, क्योंकि दोनों के बीच अभी यही झगड़ा नहीं सुलझ सका है कि दिल्ली का असली बॉस है कौन?
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इस बीच, डेंगू के मच्छर ने इतनी सुर्खियां बटोर ली हैं कि अब उसे स्टारडम फील होने लगा है। कल कहीं यह न हो कि डेंगू का मच्छर खुद को स्वच्छ भारत अभियान का ब्रांड एंबेसडर बनाए जाने की मांग करने लगे। इस दलील के साथ कि जब से उसने लोगों को काटना शुरू किया है, तब से लोग सफाई को लेकर सचेत हो गए हैं। यानी स्वच्छ भारत अभियान में मच्छर का भी रोल है।
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वैसे मुझे लगता है कि डेंगू के मच्छर की मूल प्रवृत्ति प्रगति विरोधी और राष्ट्र विरोधी है। देखिए न, कम्बख्त ने देश की राजधानी में ऐसे वक्त पर हमला बोला, जब देश ‘विश्वगुरु’ बनने के मुहाने पर खड़ा है। क्यों न डेंगू के मच्छर को पकड़कर मकोका या राष्ट्रद्रोह जैसे कड़े कानूनों के तहत आजीवन जेल में ठूंस दिया जाए। वैसे भी डेंगू मच्छर किसी को काटने में सेक्यूलर या कम्युनल का भेद नहीं करता। जातिवादी तो यह है ही नहीं।

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