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परमाणु हथियारों का जोखिम

Mon, 04 Mar 2019 06:53 PM IST
Bharat Dogra भारत डोगरा
Updated Mon, 04 Mar 2019 06:53 PM IST
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Risk of nuclear weapons
भारत डोगरा

इस समय दुनिया में 15,000 से अधिक परमाणु हथियार हैं। इनमें से 90 प्रतिशत हथियार अमेरिका और रूस के पास हैं, जबकि शेष 10 फीसदी हथियार ब्रिटेन, फ्रांस, इस्राइल, चीन, पाकिस्तान, भारत और उत्तर कोरिया के पास हैं। अभी तक विश्व में दो परमाणु बमों का उपयोग हुआ है। ये दो बम अगस्त, 1945 में अमेरिका द्वारा जापान के हिरोशिमा और नागासाकी में गिराए गए थे। उन दो बमों से साढ़े तीन लाख लोगों की मौत हुई थी। उनमें से बहुत से लोग भीषण रूप से जल गए थे और उनके जलते शरीर से त्वचा उतर रही थी। लोहे को पिघलाने के लिए जो तापमान चाहिए, उन बमों के गिरने के केंद्रीय क्षेत्र में उससे दोगुना तापमान हो गया था।


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आज विश्व में जो 15,000 परमाणु बम हैं, उनमें से अधिकांश हिरोशिमा और नागासाकी पर गिराए गए बमों से कहीं अधिक विध्वंसक हैं। परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के लिए गठित आयोग ने दिसंबर, 2009 में जारी अपनी रिपोर्ट में बताया है कि आज दुनिया में जो परमाणु हथियार मौजूद हैं, उनकी विध्वंसक क्षमता हिरोशिमा पर गिराए गए एटम बम से डेढ़ लाख गुना ज्यादा है। आयोग ने यह भी बताया है कि अमेरिका और रूस के पास अधिकांश परमाणु हथियार ऐसे हैं, जो बेहद खतरनाक स्थिति में तैनात हैं और मात्र चार मिनट में ये परमाणु हथियार दागे जा सकते हैं। आयोग का कहना है कि जब तक कुछ देशों के पास परमाणु हथियार हैं, तब तक अनेक अन्य देश भी उन्हें प्राप्त करने का प्रयास करेंगे।

मानवीय विकास रिपोर्ट, 1997 के अनुसार, इस समय परमाणु हथियारों के भंडार की विनाशक शक्ति 20 वीं शताब्दी के तीन सबसे बड़े युद्धों के कुल विस्फोटकों की शक्ति से सात सौ गुना अधिक है। टाइम पत्रिका ने लिखा है कि आतंकवादी गिरोह भी ऐसे कामचलाऊ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिससे एक लाख तक लोग मारे जा सकें, खासकर तब, जब उन्हें किसी विदेशी सरकार का समर्थन प्राप्त हो जाए।

हिरोशिमा में जो बम गिराया गया था, उसकी तुलना में हाइड्रोजन बम को कई सौ गुना अधिक विध्वंसक बताया जा रहा है। दूसरी ओर, टैक्टिकल परमाणु हथियार नाम से कम विध्वंसक क्षमता के ऐसे परमाणु हथियार भी बनाए जा रहे हैं, जिनका उपयोग रणक्षेत्र में करने की अधिक आशंका हो। लेकिन अधिकांश विश्लेषक यह मानते हैं कि इनका उपयोग भी शीघ्र ही इससे बड़े परमाणु हथियारों की ओर ही ले जाएगा। जब पाकिस्तान के कुछ अधिकारियों ने कहा कि भारत के सैन्य हमले को वे टैक्टिकल परमाणु हथियारों से रोक देंगे, तो वहां के एक वैज्ञानिक ने समझाया कि इससे पाकिस्तान के अपने पर्यावरण व लोगों को भी बहुत भारी क्षति हो सकती है।

एरिक क्लासर परमाणु हथियारों के विशेषज्ञ हैं, जिन्होंने कमांड ऐंड कंट्रोल नामक पुस्तक लिखी है। उन्होंने अनेक अध्ययनों के आधार पर बताया है कि परमाणु हथियारों का बड़ा युद्ध हुआ, तो एक ओर करोड़ों मारे जाएंगे, तो दूसरी तरफ उससे भी अधिक लोग दीर्घकालीन पर्यावरणीय दुष्परिणामों से अन्य देशों में भी मारे जाएंगे व सभी तरह का जीवन बुरी तरह तबाह हो जाएगा। भारत-पाकिस्तान में परमाणु युद्ध होने पर ऐसा होगा। अमेरिका और रूस में परमाणु युद्ध हुआ, तो इसकी तबाही और भी अवर्णनीय है। अतः किसी भी हालत में परमाणु हथियारों का उपयोग न हो और इन हथियारों को शीघ्र से शीघ्र धरती से हटाया जाए, इसे प्राथमिकता बनाने की जरूरत है।

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