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भोजन की गारंटी वगैरह-वगैरह...

Wed, 31 Jul 2013 09:08 PM IST
पूरन सरमा
पूरन सरमा Updated Wed, 31 Jul 2013 09:08 PM IST
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right to food

सरकार की ओर से देश की सड़सठ फीसदी जनता को दी गई भोजन की गारंटी से मैं आश्वस्त हूं और खुलेआम कहता हूं कि मेरा वोट और सपोर्ट सरकार को रहेगा। लेकिन मेरा बीपीएल पड़ोसी रामभरोसे पहले से ज्यादा बेचैन हो गया है। सरकार की इस घोषणा के बाद वह सीधे मेरे पास आया और बोला, शर्मा जी, यह भोजन का मतलब क्या होता है? मैंने कहा, रामभरोसे, भोजन करते-करते चालीस साल के हो गए और मतलब मुझसे पूछ रहे हो। भोजन का मतलब दाल, भात, चपाती और सब्जी से है।

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रामभरोसे बोला, गैस और दाल-सब्जियों के भाव आसमान को छू रहे हैं। ऐसे में क्या मैं आपका बताया भोजन कर सकता हूं? मैं बोला, क्यों नहीं! सरकार के चुनावी वर्ष की तुम लाज रख लो और जो सुविधाएं मिल रही हैं, उन्हें स्वीकार कर अपना अमूल्य वोट सरकार को दे दो। कल हो सकता है, सरकार दोनों वक्त का टिफिन घर पर ही पहुंचाने की घोषणा कर दे।
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रहने दो साहब, खामख्वाह सरकार की तारीफें कर रहे हो। उत्तराखंड में इतने लोग मारे गए। क्या सुरक्षा की गारंटी सरकार का दायित्व नहीं है?

मैं बोला, यार, अब कम से कम कोई भूखा तो नहीं सोएगा। मुफ्त दवा, मुफ्त जांच, सीधे बैंक खाते में सब्सिडी, लैपटॉप व साइकिलें-और क्या चाहते हो? कोठी, बंगला, कार और ऐश की जिंदगी चाहते हो, तो वह भी हो जाएगा। लेकिन थोड़ा धैर्य रखो। अभी हमारा रुपया डॉलर के सामने पस्त पड़ा है।
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रामभरोसे बोला, लेकिन सरकार जिस तरह का भोजन दे रही है, उससे तो कोई बात नहीं बन रही। मुझे पीने की आदत है, क्या पीने-पिलाने के नशीले पेय सस्ते हुए? मेरे भोजन में तो यह भी शामिल हैं। इसकी गारंटी कौन लेगा? इस भोजन की गारंटी उन्हें मुबारक, जो कोई काम नहीं करते, जो बीमार रहते हों।

मैंने कहा, घबराओ मत। जिस तरह के गेहूं-चावल खाओगे, उससे वे रोग तुम्हें भी हो जाएंगे। गए मौसम में मलेरिया से तुम लगभग मर चुके थे, लेकिन सरकार की जेनेरिक दवाओं ने तुम्हें तीन महीने में ठीक कर दिया था। इसलिए सरकार पर भरोसा रखोगे, तो ये रोग भी जल्दी ही सौगात में मिल जाएंगे। यह लो पांच सौ का नोट, बच्चों को आज तो गुलाब जामुन खिलाओ।


रामभरोसे की बांछें खिल गईं। जाते-जाते वह बोला, भगवान आपको खुश रखे और सरकार को अभयदान दे। सरकार भोजन कराती रहे और आप गुलाब जामुन खिलाते रहें, यही आरजू है।

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