फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Relief from coronavirus is not easy

आसान नहीं है कोरोना से राहत

Sat, 05 Sep 2020 06:25 AM IST
Satish Singh सतीश सिंह
Updated Sat, 05 Sep 2020 06:25 AM IST
विज्ञापन
Relief from coronavirus is not easy
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : पीटीआई

देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या बेशक शहरों में कम हो रही है, पर ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ रही है। नए मामलों के संदर्भ में ग्रामीण व कस्बाई इलाके या छोटे जिलों की हिस्सेदारी बढ़कर 54 प्रतिशत हो गई है। ऐसे ग्रामीण जिलों की संख्या घटी है, जहां संक्रमितों की संख्या 10 से कम थी।


loader

खासकर आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र ग्रामीण इलाकों में संक्रमण बढ़ने से परेशान हैं। देश के 50 सर्वाधिक संक्रमित जिलों में से 13 जिले आंध्र के हैं, तो 12 जिले महाराष्ट्र के। आंध्र के 13 जिलों में से 11 में ग्रामीण आबादी की बहुलता है, वहीं महाराष्ट्र के 12 में से छह जिलों में ग्रामीण आबादी ज्यादा है।

जिन जिलों में संक्रमितों की संख्या 1,000 से 5,000 है, उनकी संख्या भी जुलाई में बढ़ी है। आंध्र प्रदेश के विजयनगरम और श्रीकाकुलम, महाराष्ट्र के जलगांव, अहमदनगर, कोल्हापुर और सतारा, ओडिशा का गंजाम, कर्नाटक के बेल्लारी और उडुपी तथा उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जैसे जिलों में संक्रमितों की संख्या ज्यादा है।

इन जिलों का अपने राज्य की जीडीपी में करीब दो से चार प्रतिशत का योगदान है, जबकि आंध्र के पूर्वी गोदावरी जिले की राज्य जीडीपी में 11 फीसदी हिस्सेदारी है। जीडीपी के कुल नुकसान में शीर्ष 10 राज्यों की हिस्सेदारी 73.8 फीसदी है, जिनमें महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 14.2 प्रतिशत, तमिलनाडु की 9.2 फीसदी और उत्तर प्रदेश की 8.2 फीसदी है।

इन 10 राज्यों में कुल संक्रमितों की संख्या देश के कुल संक्रमितों की संख्या का 81 प्रतिशत है। कोरोना की वजह से 38 लाख करोड़ रुपये के जीएसडीपी (राज्यों के जीडीपी) का नुकसान हो चुका है, जो छह राज्यों के संचयी जीएसडीपी के बराबर और कुल जीएसडीपी का 16.9 प्रतिशत है। राष्ट्रीय स्तर पर प्रति व्यक्ति नुकसान 27,000 रुपये है, हालांकि तमिलनाडु, गुजरात, गोवा, दिल्ली, तेलंगाना और हरियाणा में प्रति व्यक्ति 40,000 रुपये से अधिक नुकसान होने का अनुमान है।

देश में 30 जुलाई के बाद से औसतन 58,000 संक्रमण के नए मामले आ रहे हैं। यहां रिकवरी दर 71 फीसदी है, फिर भी संक्रमण शिखर (पीक) पर नहीं पहुंचा है, जबकि ब्राजील में 69 प्रतिशत की रिकवरी दर पर संक्रमण शिखर पर पहुंच गया था। भारत में रिकवरी दर के 75 प्रतिशत के स्तर पर पहुंचने के बाद संक्रमण शिखर पर पहुंच सकता है, हालांकि, यह तकनीकी अनुमान है और दुनिया भर में संक्रमण के शिखर पर पहुंचने के मामले अलग-अलग हैं। अपने यहां तो संक्रमितों की संख्या अब भी बढ़ रही है।

अनेक राज्यों में 10 लाख की आबादी में संक्रमण की जांच बहुत ही कम हो रही है। हालांकि दिल्ली, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, त्रिपुरा और तमिलनाडु में संक्रमण शिखर पर पहुंच चुका है, पर महाराष्ट्र, बिहार, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल आदि राज्यों में संक्रमण के पीक पर पहुंचने में कुछ और महीने लग सकते हैं। देश के 27 में से 22 राज्यों में संक्रमितों की संख्या अब भी शिखर पर नहीं पहुंची है।

भारत में संक्रमितों की संख्या दोगुनी होने में 22 दिन लग रहे हैं, जो फिलीपींस और अर्जेंटीना के बराबर है। अमेरिका में 23 दिन में संक्रमितों की संख्या दोगुनी हो रही है। भारत में संक्रमितों की संख्या के 100 से एक लाख होने में 65 दिन लगे, पर एक से 10 लाख होने में महज 59 दिन लगे, जो दुनिया में सबसे कम है।

एशियाई देशों में प्रति 10 लाख की आबादी पर सबसे ज्यादा मृत्यु दर भी भारत में है। देश में पहले जान बचाने के लिए 25 मार्च से लॉकडाउन कर दिया गया, पर अर्थव्यवस्था के बंद होने से लोगों के मरने की नौबत आई, तो जल्दबाजी में अनेक राज्यों ने अपने यहां अनलॉक कर दिया, और फिर जब कोरोना से जान जाने लगी, तो पुनः लॉकडाउन लागू कर दिया।

ऐसी नीतिगत विसंगति से मृत्यु दर में 0.55 से 3.5 फीसदी अतिरिक्त वृद्धि होने का अनुमान है, क्योंकि उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल आदि राज्यों में एक लाख की आबादी पर क्वारंटीन की पर्याप्त व्यवस्था अब भी नहीं है और कोविड अस्पताल भी कम हैं। ऐसे में, भारत को कोरोना महामारी से उबरने में लंबा समय भी लग सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed