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सही मायने में नायक

Mon, 04 Dec 2017 06:54 PM IST
क्षमा शर्मा
क्षमा शर्मा Updated Mon, 04 Dec 2017 06:54 PM IST
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क्षमा शर्मा

कम दहेज के कारण अक्सर शादी टूटने की खबरें आती रहती हैं। हिंदुस्तान में दहेज के कारण विवाह को किस कदर व्यापार बना दिया गया है कि देने को अगर दहेज नहीं, तो शादी भी नहीं। यों कहने को दहेज विरोधी कानून है, 498 ए जैसी कठोर धारा भी है। इसके दुरुपयोग की खबरें भी आती रहती हैं। दहेज के विरोध की जितनी खबरें आती हैं, जितनी इसकी निंदा की जाती है, उतना ही यह बढ़ता जाता है। पर कई बार ऐसी खबरें भी आती हैं, जो बहुत सकारात्मक होती हैं। इनके जरिये समाज में बदलाव की दस्तकें सुनी जा सकती हैं।


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ऐसी ही एक दिलचस्प खबर पिछले दिनों पढ़ी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बागपत के एक गांव में एक युवक नितिन की सगाई का मौका था। नितिन सीआईएसएफ में हैं और ओडिशा में कार्यरत हैं। गांव के लोग जमा थे। गीत गाए जा रहे थे। तय कार्यक्रम के मुताबिक सगाई की रस्म होने लगी। फिर नितिन को उनके ससुराल वालों ने पंद्रह लाख रुपये का चेक दिया। लेकिन यह क्या, नितिन ने चेक के टुकड़े-टुकड़े कर दिए। कहा-मेरे लिए तो दुल्हन ही दहेज है। नितिन के माता-पिता तथा अन्य परिजनों ने भी उनसे सहमति जताई। उसके छोटे भाई ने कहा कि वह भी अपनी शादी बिना दहेज के करेगा। निश्चय ही इस लड़के ने जो कुछ किया, वह काबिले तारीफ है।

वर्षों पहले ऐसे नारे सरकार की तरफ से बसों, गाड़ियों और दीवारों पर लिखे दिखाई देते थे। किसी नारे का असर जीवन पर भी पड़ता है, नितिन का उदाहरण वैसा ही है। नितिन ने जो किया, वह एक अनुपम बात है। बेशक आज के दिनों में मीडिया में ऐसी प्रेरणा देने वाली खबरें, नकारात्मक खबरों के मुकाबले कम जगह पाती हैं, पर इससे उनकी अहमियत कम नहीं हो जाती।
 
अपने देश में लड़कियों का जन्म ही किसी मुसीबत की तरह देखा जाता है। इस मुसीबत का बड़ा कारण लड़कियों से जुड़ीं तमाम असुरक्षा के अलावा दहेज भी है। तमाम समाज सेवी संगठन और सरकारों को मालूम है कि लड़कियों को जन्म से पहले ही मार देने, या अल्ट्रासाउंड के जरिये गर्भ में पल रहे बच्चे का लिंग पता करके और लड़की का पता चलते ही उसे खत्म कर देने का बड़ा कारण दहेज ही है।
 
जब से अपने यहां 'पेज थ्री' संस्कृति और ब्रांडस का बोलबाला बढ़ा है, तब से तो शायद दहेज और शादी पर होने वाले खर्चे सैकड़ों गुना बढ़ गए हैं। जिस युवा से पूछिए, उसे दुल्हन तो ऐश्वर्य राय या आलिया भट्ट जैसी चाहिए और शादी ड्रीम वेडिंग होनी चाहिए, जो कभी किसी और की नहीं हुई हो। बढ़ते वैवाहिक मेलों के चलन ने इसे और बढ़ाया है।

एक समय में शादी का मतलब दावत से होता था और लोग शौक से इन दावतों में जाया करते थे। पचफेनी यानी कि पांच व्यंजनों की दावत बहुत अच्छी मानी जाती थी। पर इन दिनों तो शादियों में इतने अधिक व्यंजन होते हैं कि उन्हें खाना तो दूर, देखना भी मुश्किल होता है। जिनके पास धन संपदा है, वे उसे खूब दिखा सकते हैं, लेकिन जिनके पास कुछ नहीं, बेटियां तो उनकी भी होती हैं। उनसे शादी करने वाले लड़के भी ऐसी शादियों के सपने देखते हैं। दहेज का दशकों से हम विरोध सुन रहे हैं, कई बार दहेज विरोधी कसमें भी खाई जाती हैं, लेकिन इधर कसम खाई और उधर उसे भूले।
 
कायदे से तो हमारे समाज के रोल मॉडल्स नितिन जैसे लड़कों को होना चाहिए न कि किसी अभिनेता या रईस को, जिसके पास दिखाने के लिए बड़े विचार के बजाय चकाचौंध पैदा करने वाली धन-संपदा होती है।

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