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भरोसे का सवाल: चढ़ावे की चोरी का विवाद सिर्फ शर्मनाक नहीं, देश की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है

Tue, 16 Jun 2026 06:46 AM IST
Devesh Tripathi अमर उजाला
अमर उजाला Published by: Devesh Tripathi Updated Tue, 16 Jun 2026 06:46 AM IST
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सार
देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की चोरी को लेकर उठा विवाद शर्मनाक है। आस्था के ऐसे केंद्रों में लोगों को निजी लाभ के लिए नैतिक सीमाएं लांघने में आखिर संकोच क्यों नहीं होता? दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, क्योंकि सवाल भरोसे का है।
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राम मंदिर - फोटो : X-ShriRamTeerth

विस्तार

जिस श्रीराम जन्मभूमि मंदिर को देश के करोड़ों लोग सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक चेतना और भरोसे के प्रतीक के रूप में देखते हैं, उसके चढ़ावे की चोरी को लेकर उठा विवाद शर्मनाक तो खैर है ही, यह पूरे राष्ट्र की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला भी है। इस मामले में सवाल तो उठ ही रहे थे, लेकिन जांच के दौरान मंदिर के चढ़ावे की गिनती में शामिल एक कर्मचारी के घर से दस लाख रुपये नकद गोबर के ढेर के नीचे से बरामद होने से एक तरह से संदेह की पुष्टि ही हुई है। श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों और ट्रस्टियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। हैरत की बात है कि इतने गंभीर मामले में ट्रस्ट के पदाधिकारियों की तरफ से जो शुरुआती प्रतिक्रियाएं मिलीं, वे बेहद अगंभीर किस्म की थीं। यहां तक कि एफआईआर दर्ज कराने की भी जरूरत नहीं समझी गई। जिस मंदिर में रोज लाखों का चढ़ावा चढ़ता हो, वहां धन के संग्रह, गिनती और लेखे-जोखे में किसी भी तरह की लापरवाही या अनियमितता की गुंजाइश होनी ही नहीं चाहिए। श्रद्धालुओं का चढ़ावा सिर्फ धनराशि नहीं होती, बल्कि वह उनके विश्वास, समर्पण और भावनात्मक जुड़ाव का भी प्रतीक होता है। चाहे मन में चोरी हो या मन भर चोरी हो, सबसे बड़ा सवाल यह है कि आस्था के ऐसे केंद्रों में लोगों को निजी लाभ के लिए नैतिक सीमाएं लांघने में आखिर संकोच क्यों नहीं होता। दुर्भाग्य से, देश के कई बड़े धार्मिक संस्थानों में समय-समय पर चढ़ावे और संपत्ति प्रबंधन को लेकर सवाल उठते रहे हैं। हर बार विवाद सामने आने के बाद कुछ समय के लिए सख्ती दिखाई जाती है, लेकिन व्यवस्थागत सुधारों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जाता। अब समय आ गया है कि इस पूरे तंत्र की व्यापक समीक्षा की जाए। दान राशि की गिनती, भंडारण और उपयोग की प्रक्रिया को पूरी तरह तकनीक आधारित और पारदर्शी बनाया जाना चाहिए। अच्छी बात है कि प्रदेश सरकार ने ट्रस्ट के अनुरोध पर पूरे मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है, लेकिन यह भी सुनिश्चित करना होगा कि जांच निष्पक्ष, समयबद्ध और पूरी पारदर्शिता से हो। इस मामले में जो भी दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई भी हो, ताकि एक संदेश दिया जा सके। आस्था के केंद्रों से जुड़े मामलों में जवाबदेही का पैमाना कठोर होना ही चाहिए, क्योंकि यहां सवाल केवल धन के दुरुपयोग का नहीं, बल्कि लोगों के भरोसे का भी है।
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