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बोल कि लब आजाद हैं तेरे

Tue, 09 Jul 2013 10:42 PM IST
राजेंद्र शर्मा
राजेंद्र शर्मा Updated Tue, 09 Jul 2013 10:42 PM IST
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rajendra sharma satire

बोल कि लब आजाद हैं तेरे-फैज साहब ने लिखा और अमर हो गए। बेनी प्रसाद वर्मा बोलकर अपने लबों की आजादी का सुबूत दे रहे हैं, तो उन्हें टोका जा रहा है। सिर्फ टोका ही नहीं, बाकायदा रोका जा रहा है। वह भी अपनी ही पार्टी वालों द्वारा। बहुत नाइंसाफी है भाई!

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खैर! बेनी बाबू ने भी साफ-साफ कह दिया है। यह जुबान तो अब नहीं रुकेगी; पार्टी को जो करना हो कर ले। आखिरकार, इस्पात के मंत्री हैं। लौह पुरुष ही कहिए। वह लौह पुरुष ही क्या, जो संभल-संभलकर मुंह खोले। फिर पूर्व हुए तो क्या हुआ, आखिरकार बेनी बाबू हैं तो पुराने समाजवादी। समाजवादी का और कुछ चले न चले, पर जुबान जरूर चलती है। बोलना उनके डीएनए में है।
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फिर खादी पार्टी वालों का उन्हें चुप कराने  का हक ही क्या बनता है। माना कि पार्टी ने ही उन्हें लाल बत्तीवाली गाड़ी दी है, मंत्री बनाया है। पर इतने भर से तो वह पार्टी के चुप कराए चुप नहीं हो जाएंगे। वैसे भी पार्टी उनके साथ चुप कराने की मनमानी कर कैसे सकती है? वह डेमोक्रेसी में विश्वास करते हैं या नहीं?
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हमें तो अचरज इस बात पर है कि जरा-जरा सी बात पर अभिव्यक्ति की आजादी का झंडा उठाने वाले लोग बेनी बाबू के बोलने के अधिकार के मुद्दे पर एकदम चुप्पी साधे बैठे हैं। क्या सिर्फ इसलिए कि बेनी बाबू मंत्री हैं? क्या मंत्री इंसान नहीं होता? डेमोक्रेसी में सब बराबर होते हैं, मंत्री से लेकर संतरी तक। फिर बाकी सब के लिए अपने मन की भड़ास निकालने की पूरी आजादी और मंत्री के लिए रोक-टोक; यह तो डेमोक्रेसी नहीं हुई भाई।


फिर बेनी बाबू सिर्फ दिल की भड़ास थोड़े ही निकाल रहे हैं, सिद्धांत का पालन कर रहे हैं। और सिद्धांत के मामले में समझौता करने के लिए उनसे कोई न कहे। सिद्धांत के लिए वह बड़ी से बड़ी कुर्बानी देने से पीछे नहीं हटेंगे। मंत्रिपद तो क्या, सिद्धांत के लिए वह पार्टी भी छोड़ सकते हैं। पहले समाजवादी छोड़ी थी, अब खादीवादी छोड़ देंगे, पर सिद्धांत नहीं छोड़ेंगे। क्या हुआ कि उनका सिद्धांत पुराने नेता को जब-तब गरियाने की मांग करता है। सिद्धांत हर तरह के होते हैं, गरियाने के भी। विविधताओं का मामला है भाई!

लब, जुबां, दिल, सब बेनी बाबू के अपने हैं, सो जी भरकर बोल रहे हैं। उन्हें रोकने की कोशिश कोई न करे। वर्ना डेमोक्रेसी खतरे में पड़ जाएगी।

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