राहुल गांधी वहीं के वहीं हैं

तवलीन सिंह Updated Sun, 27 Sep 2015 08:05 PM IST
Rahul gandhi stuck with old days
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राहुल गांधी ने पिछले सप्ताह चंपारण में अपने भाषण में इतनी बार 'सूट-बूट' कहा कि ट्विटर पर उनका मजाक उड़ने लगा। ट्वीट करने वालों में से कुछ ने पूछा कि राहुल गांधी अमेरिका क्या पहनकर गए हैं। एक ट्वीट में पैंट-शर्ट में विमान की सीढ़ी चढ़ते हुए उनकी एक्सक्लूसिव तस्वीर दी गई। कुछ शरारती लोगों ने राहुल की उनके पिता और नाना के साथ तस्वीरें ट्वीट कीं। तीनों का लिबास सूट-बूट था। कुछ ऐसे भी ट्वीट आए, जिनमें याद दिलाया गया कि जवाहरलाल नेहरू के सूट पेरिस से धुलकर आते थे।
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बिहार में चुनाव घोषित होने के बाद राहुल गांधी का पहला भाषण मैंने टीवी पर ध्यान से देखा। फिर यू-ट्यूब पर इसलिए देखा, क्योंकि मैं कांग्रेस उपाध्यक्ष का संदेश अच्छी तरह समझना चाहती थी। दोबारा देखने पर दो-तीन बातें स्पष्ट हो गईं। एक यह कि राहुल गांधी ने बीस मिनट के अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा कोई दूसरा मुद्दा नहीं उठाया। दूसरा यह कि राहुल किसी पुराने समय में अटक-से गए हैं। नहीं तो उनको यह दिखता कि बिहार जैसे गरीब, पिछड़े राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में भी अधिक लड़के जींस पहने दिखते हैं। राहुल गांधी ने अपने भाषण में 'सूट-बूट' पर जोर दिया, क्योंकि वह साबित करना चाहते थे कि मोदी सरकार धनवानों की सरकार है, जबकि वह स्वयं किसानों-मजदूरों के मसीहा हैं।


राहुल गांधी शायद भूल गए कि पिछले वर्ष तक केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी। इसलिए देश के किसान-मजदूर बेहाल दिखते हैं अभी, तो दोष मोदी का नहीं हो सकता। जब से राहुल गांधी लंबी छुट्टी से लौटे हैं, तब से बार-बार यह कहते फिर रहे हैं कि नरेंद्र मोदी किसानों की जमीन कौड़ियों के भाव खरीदकर उद्योगपतियों को देना चाहते हैं।

पहली बात तो यह है कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में जमीन का अधिग्रहण न पहले आसान था, न अब आसान है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह कि बिना जमीन के वे विशाल कारखाने नहीं बन सकते, जिनमें तीस-चालीस हजार नौकरियां देने की गुंजाइश हो। मोदी के 'मेक इन इंडिया' सपने का मतलब यही है कि ऐसे कारखानों का निर्माण हो, जिनके जरिये हर वर्ष एक करोड़ नौकरियां पैदा हों, जिनकी इस देश के नौजवानों को गंभीर आवश्यकता है। प्रधानमंत्री मोदी जानते हैं कि भविष्य में रोजगार के अवसर ज्यादातर निजी क्षेत्र से ही आएंगे। क्या राहुल गांधी नहीं जानते कि सूट-बूट वाले लोग ही रोजगार के अवसर पैदा कर सकते हैं? क्या राहुल गांधी नहीं जानते कि आज के भारत में सूट-बूट पहनना कोई गुनाह नहीं है? चंपारण में उन्होंने कहा कि एक तरफ गांधी जी थे, जिन्होंने चंपारण की हालत देख सूट-बूट पहनना छोड़ दिया, दूसरी तरफ मोदी हैं, जिन्होंने प्रधानमंत्री बनने के बाद सूट-बूट पहनना शुरू किया है। इससे भी साबित होता है कि कांग्रेस उपाध्यक्ष किसी पुराने समय की कड़ी में अटक गए हैं। माना कि बिहार की गिनती गरीब राज्यों में होती है, पर वहां का हाल क्या अब भी इतना बुरा है, जितना गांधी जी के समय था?

लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी को इसलिए पूर्ण बहुमत मिला, क्योंकि आज के भारत में गरीब भी संपन्नता के सपने देखते हैं। लेकिन कांग्रेस के बड़े नेता 'गरीबी हटाओ' के उस नारे से अभी तक निकल ही नहीं पाए हैं, जो राहुल गांधी की दादी ने करीब चार दशक पहले दिया था। देश आगे निकल गया है, मतदाता आगे निकल गए हैं, लेकिन राहुल गांधी अभी वहीं के वहीं हैं।

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