बेतरतीब फैलते शहर की मुश्किल
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डेट्रॉयट शहर पुरानी अर्थव्यवस्था के पतन का एक प्रतीक है। यह सिर्फ एक परित्यक्त केंद्र नहीं है, जिसने वर्ष 2000 से 2010 के दौरान लगभग पूरी आबादी खो दी, बल्कि प्रमुख शहरों में इसका प्रदर्शन सबसे खराब रहा। इसके विपरीत अटलांटा सन बेल्ट क्षेत्र (दक्षिणी अमेरिका) के उदय का प्रतीक बन गया है, जहां इसी अवधि के दौरान आबादी में दस लाख से ज्यादा की बढ़ोतरी तो हुई ही, मोटे तौर पर यह तेल से अतिरिक्त प्रोत्साहन पाए बगैर डलास और ह्यूसटन के प्रदर्शन की बराबरी भी कर रहा है। फिर भी तेजी से विकास करता अटलांटा एक अहम मामले में गुब्बारे की तरह फट चुके डेट्रॉयट की तरह लगता है। ये दोनों ऐसी जगहें हैं, जहां अमेरिकी स्वप्न मरता दिख रहा है, जहां गरीबों के बच्चों को आर्थिक सोपानों पर चढ़ने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। वास्तव में अटलांटा सामाजिक गतिशीलता के विकास यानी बच्चों के द्वारा अभिभावकों के मुकाबले उच्च सामाजिक-आर्थिक हैसियत हासिल करने की सीमा के मामले में डेट्रॉयट से पीछे है। और ये दोनों शहर इस मामले में बोस्टन या सैन फ्रांसिस्को की तुलना में काफी नीचे हैं, जबकि बोस्टन और सैन फ्रांसिस्को विकास के मामले में अटलांटा से काफी सुस्त हैं।
तो अटलांटा के साथ परेशानी क्या है? एक नया अध्ययन बताता है कि शहर अभी और भी फैल सकता है, जिससे रोजगार के अवसर दूरस्थ इलाकों में बसे लोगों की पहुंच से और दूर हो सकते हैं। शहर का अनियंत्रित फैलाव उन अपेक्षाकृत कमजोर लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है, जो मेहनत कर अमेरिकी सपने को हकीकत में बदलते रहे हैं। यह नया अध्ययन हार्वर्ड एवं बर्कले के अर्थशास्त्रियों की अगुवाई में चल रहे इक्वालिटी ऑफ अपार्चूनिटी प्रोजेक्ट की तरफ से जारी किया गया है। देश भर में सामाजिक गतिशीलता के कई तुलनात्मक अध्ययन किए गए हैं। सभी अध्ययनों में पाया गया है कि खुद को अब भी अवसरों की भूमि कहने वाले अमेरिका में इन दिनों अन्य विकसित देशों की तुलना में वंशानुगत वर्ग-व्यवस्था ज्यादा है। नए प्रोजेक्ट में इसकी पड़ताल की गई है कि कैसे अमेरिकी शहरों में सामाजिक गतिशीलता में अंतर है और यह पाया गया है कि यह अंतर बहुत ज्यादा है। मसलन, सैन फ्रांसिस्को में आय वितरण के नीचे से पांचवे पायदान पर स्थित परिवार में जन्मे बच्चे के शीर्ष पांचवें पायदान पर पहुंचने की संभावना 11 फीसदी है, जबकि अटलांटा में इसी पायदान पर जन्मे के लिए मात्र चार फीसदी।
शोधकर्ताओं ने जब निम्न या उच्च सामाजिक गतिशीलता से संबंधित कारकों की पड़ताल की, तो उन्होंने आश्चर्यजनक ढंग से पाया कि इसमें वंश की कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है। उन्होंने पाया कि असमानता के मौजूदा स्तर का इससे बहुत बड़ा संबंध है- ऐसे इलाके जहां मध्यवर्ग की आबादी कम थी, वहां जीवन स्तर ऊपर उठने की दर भी कम थी। यह उन अंतरराष्ट्रीय तुलनाओं से मेल खाती है, जहां अपेक्षाकृत बराबरी के समाज वाले स्वीडन में उच्च असमानता वाले अमेरिका की तुलना में गतिशीलता बहुत ज्यादा है। लेकिन शोधकर्ताओं ने विभिन्न सामाजिक वर्ग के लोगों के रहने की जगहों में अंतर के साथ ही गरीबों के ऊपर उठने की क्षमता के बीच नकारात्मक संबंध पाया। अटलांटा में गरीबों और अमीरों की बसावट में फर्क साफ देखा जा सकता है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि उनमें बुनियादी रूप से हर चीज में अंतर है।
अटलांटा अव्यवस्थित ढंग से बसे शहरों का बादशाह है, सन बेल्ट इलाके के अन्य प्रमुख शहरों के मुकाबले इसका फैलाव बहुत ज्यादा है। इसके लिए एक प्रभावी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था संचालित करनी होगी, जो निकट भविष्य में असंभव दिख रही है। हालांकि राजनेताओं ने इसके लिए खर्च करने की इच्छाशक्ति जताई थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। नतीजतन वंचित वर्ग के श्रमिक खुद को अक्सर असहाय पाते हैं, और कहीं रोजगार उपलब्ध भी हो सकता है, तो वे वहां जा नहीं सकते।
शहरों के फैलाव और सामाजिक गतिशीलता का प्रतिकूल संबंध शहरों के लिए विकास की नई रणनीति बनाए जाने पर जोर देता है, जिसमें ऐसे सुविधायुक्त सिटी सेंटर बनाए जाने पर जोर दिया जाए, जो सार्वजनिक परिवहन से जुड़े हों।
प्रसिद्ध समाजशास्त्री विलियम जूलियस विल्सन ने 25 वर्ष पहले कहा था कि युद्ध के बाद सिटी सेंटरों से रोजगारों का उपनगरों में स्थानांतरण होने से उन सेंटरों से आर्थिक अवसर निकल गए, मगर इससे अफ्रीकी-अमेरिकी परिवारों को लाभ हुआ, और यह ठीक उसी तरह से था, जैसे नागरिक अधिकार आंदोलन ने अंततः भेदभाव खत्म कर दिया।
इन दिनों आप कथित अफ्रीकी-अमेरिकी सामाजिक रोगों के बारे में उतना नहीं सुनते, जिसके आप आदी हैं, क्योंकि कामकाजी श्वेत समूहों में भी पारंपरिक परिवार बेहद कमजोर हो गए हैं। क्यों? खैर, बढ़ती असमानता और रोजगार बाजार का सामान्य खोखलापन शायद इसके लिए जिम्मेदार है। पर सामाजिक गतिशीलता पर नया शोध बताता है कि शहर के विस्तार के कारण न केवल शहर से बाहर नौकरियों का स्थानांतरण होता है, बल्कि उन तक उपनगरीय क्षेत्र के कम संपन्न लोगों की पहुंच भी दूर होती है।
जैसा कि मैंने कहा, यह अवलोकन स्पष्ट रूप से ऐसी नीतियों पर जोर देता है, जिसमें उन परिवारों की फिक्र भी शामिल हो, जिनके पास एकाधिक कारें नहीं हैं। लेकिन आपको इसे राष्ट्र के व्यापक संदर्भ में देखना चाहिए, जिसने अपना रास्ता खो दिया है, जो अवसरों की समानता का उपदेश तो देता है, मगर उन लोगों के लिए निरंतर अवसर कम करता जा रहा है, जिन्हें इसकी सबसे अधिक जरूरत है।