बहुलतावाद को वरीयता
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यह ब्रिटेन और स्पेन की यात्रा का दिलचस्प सप्ताह था। पहले तो स्कॉटलैंड के अलगाववादियों को स्वाधीनता के लिए जनमत संग्रह में शामिल होते देखा, फिर बास्क और कैटलन के अलगाववादियों को मतदान के नतीजे से निराश देखा। एक प्रतिक्रिया थी- मुझे खुशी है कि स्कॉटलैंड की बहुसंख्यक आबादी ने स्वाधीनता को खारिज कर दिया। अगर उन्होंने स्वाधीनता के पक्ष में मतदान किया होता, तो वे दुनिया में अमेरिका के सबसे बड़े समर्थक ब्रिटेन के पंख कतर देते। दूसरी प्रतिक्रिया थी-ईश्वर अमेरिका का भला करे। हमारे पास शक्ति के कई स्रोत हैं, लेकिन आज हमारी सबसे बड़ी पूंजी बहुलतावाद है, जिसने विविधतापूर्ण संस्कृति के तमाम फायदों और एकसाथ काम करने में सक्षम होने से मिली ताकत के साथ विभिन्न समाजों में बंटे हम सबको एक राष्ट्र बना दिया है।
यह बहुलतावाद का ही उदाहरण है कि अमेरिका ने राष्ट्रपति के रूप में दो बार एक अश्वेत व्यक्ति को चुना, जिसका मध्य नाम हुसैन है और जिसके दादा मुस्लिम थे, जिसने पहले एक महिला और बाद में एक मॉरमोन (एक ईसाई धार्मिक समूह) को हराया। शायद मैं तब तक जीवित न रह सकूं कि किसी पाकिस्तानी को ब्रिटेन का या मोरक्को के किसी आप्रवासी को फ्रांस का राष्ट्रपति बनते देख सकूं। हां, फर्ग्यूसन, मिसौरी की अशांति जरूर याद दिलाती है कि बहुलतावाद के क्षेत्र में हमें अभी और काम करना होगा।
बहुलतावाद आज एक बड़ी उपलब्धि क्यों है? इसके दो कारण हैं-राजनीति और नवोन्मेष। हॉर्वर्ड के 'प्लुरलिज्म प्रोजेक्ट' की वेबसाइट पर बहुलतावाद की परिभाषा इस तरह दी गई है, 'बहुलतावाद सिर्फ विविधता नहीं है, बल्कि यह विविधता के साथ धनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ है, क्योंकि संबंधों और वास्तविक मुठभेड़ के बगैर विविधता समाज में तनाव ही बढ़ाएगी।' सीरिया और इराक में समाज का बहुलतावादी होना वास्तविकता है, तो अमेरिका में बहुलतावादी समाज एक उपलब्धि। यह भी ध्यान रखना चाहिए कि बहुलतावाद हमें अपनी पहचान या प्रतिबद्धताओं को पीछे छोड़ने के लिए नहीं कहता। हम अपने गहरे मतभेदों, यहां तक कि धार्मिक मतभेदों को भी कायम रखें, पर अलग-थलग होकर नहीं, बल्कि एक-दूसरे के साथ सौहार्दपूर्ण रिश्ते बनाकर।
पहले की तुलना में बहुलतावाद आज ज्यादा महत्वपूर्ण है। इसे पश्चिम एशिया पर नजर डालने से आसानी से समझा जा सकता है। इराक और सीरिया बहुलतावादी समाज थे, पर वहां बहुलतावाद का अभाव था। एक ताकतवर व्यक्ति वहां पूरे समाज को एकजुट किए रखता था। लेकिन सूचना तकनीक के विस्तार और भूमंडलीकरण ने उस नियंत्रण को कमजोर और अप्रासंगिक बना दिया।
यह अप्रत्याशित नहीं है कि पश्चिम एशिया के दो लोकतांत्रिक इलाके-ट्यूनीशिया और कुर्दिस्तान, आज बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। बेशक उन्हें अभी बहुलतावाद में महारत हासिल नहीं है, लेकिन स्व-शासन में उन्होंने श्रेष्ठता हासिल कर ली है। यह एक ऐसी व्यवस्था है, जिसमें हर किसी के हित का ख्याल रखा जाता है। इराक यहां तक पहुंचने के लिए संघर्ष कर रहा है, जबकि सीरिया तो इसके करीब भी नहीं है। सोशल नेटवर्क और भूमंडलीकरण बहुलतावाद के आर्थिक फायदों में भी बढ़ोतरी कर रहे हैं। समाज जितना बहुलतावादी होगा, उसमें आपसी विश्वास उतना ही अधिक होगा। बेशक, ऐसे समाज में टकराव भी होते हैं, पर बहुलतावादी नैतिकता से संचालित ऐसे टकरावों से जो ऊर्जा पैदा होती है, उससे इन्कार करना भी कठिन है। अप्रैल, 2013 के द इकोनॉमिस्ट की एक रिपोर्ट बताती है कि फॉर्च्यून 500 फर्म्स के 40 फीसदी की स्थापना आप्रवासियों या उनके बच्चों ने की।
लोकतांत्रिक स्पेन ने पिछले एक दशक में चालीस लाख से अधिक आप्रवासियों को अपने यहां जगह दी है, जिनमें से कई इक्वाडोर, रोमानिया और मोरक्को के हैं। आप्रवासियों की यह आबादी उसकी कुल आबादी का दस फीसदी है। वे आर्थिक तेजी के दौरान आए थे और अब तक वहां आप्रवासी-विरोधी पार्टी नहीं बनी है। आश्चर्य नहीं कि स्पेन के राष्ट्रीय नेता स्कॉटलैंड के जनमत संग्रह के नतीजे से राहत महसूस कर रहे हैं। लेकिन कैटलान की क्षेत्रीय सरकार ने कहा है कि वे नवंबर में अलगाववादी जनमत संग्रह करवाएंगे।
इससे वहां तेज हलचल होगी। अपनी विविधता को संभालने के लिए स्पेन ने पहले ही अपने 17 क्षेत्रों को काफी स्वायत्तता दे रखी है। यूरोपीय परिषद के विदेशी संबंधों के मैड्रिड कार्यालय के प्रमुख जोस इग्नासियो टोरेब्लांका बताते हैं कि ज्यादातर स्पेनवासी अलगाव में धकेला जाना पसंद नहीं करते। 'आप बर्सिलोना में पाएंगे कि लोगों ने अपनी बालकनी में कैटलान की स्वाधीनता के झंडे लगा रखे हैं। यदि आप ऐसा नहीं करते, तो इसका मतलब है कि आप स्वाधीनता के पक्ष में नहीं हैं।' वहां अनेक लोग सोचते हैं कि आप एक साथ एक अच्छे स्पेनवासी, अच्छे कैटलान और अच्छे यूरोपीय हो सकते हैं।
लेकिन टोरेब्लांका के मुताबिक, अलगाववादी आंदोलन राजनीतिक बहस की दिशा बदल देते हैं। राजनीति को वाम या दक्षिणपंथी होना चाहिए। दक्षिणपंथी पार्टियों ने यूरोप में विकास और असमानता को जन्म दिया, जबकि वामपंथी पार्टियों ने पुनर्वितरण का काम किया। उससे ऐसे समाज का निर्माण हुआ, जो प्रतिस्पर्धी और एकजुट, दोनों हैं। मगर अलगाववादी आंदोलन आपको पटरी से उतारते हैं और पहचान की राजनीति में डालते हैं। सीरिया और इराक जैसे देश विकास नहीं कर पाए हैं, तो इसकी यही वजह है।
अमेरिका हमेशा से ‘नागरिकों का देश’ रहा है। यूरोपीय संघ राष्ट्र-राज्यों का समूह है। लेकिन सीरिया और इराक में न तो नागरिक हैं, न ही राज्य। वहां वंश, संप्रदाय और जनजातियां हैं, जिन्हें राज्य के तौर पर खुद को पुनर्गठित करना है। इस लिहाज से अमेरिका अपने बहुलतावाद के साथ लाभ की स्थिति में है और स्कॉटलैंडवासी अपनी बहुलतावाद को बचाने का साहस दिखाते हैं। वहीं स्पेन के लोग अपनी बहुलता को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तो इराकी इसकी तलाश में है।