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प्रसार भारती: सही और सटीक खबरों के लिए पहल, 'शब्द' के जरिये पारंपरिक भूमिका को निभाने की कोशिश
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विस्तार
सोशल मीडिया और टेलीविजन के चौतरफा वर्चस्व के दौर में तरह-तरह की समाचार बुलेटिनें प्रसारित हो रही हैं। एक समय, आकाशवाणी से रोजाना दोपहर बाद पहले अंग्रेजी और फिर हिंदी में धीमी गति में समाचार प्रस्तुत किए जाते थे। उस बुलेटिन की शुरुआत छोटी जगहों पर सुविधाहीन माहौल में प्रकाशित होने वाले अखबारों को ध्यान में रख कर की गई थी। 22 सितंबर, 1969 से प्रसारित होते इस बुलेटिन को सुनकर छोटे अखबारों के पत्रकार विशेष समाचारों को नोट करते थे और उसके आधार पर समाचार बनाकर अपने अखबारों में छापते थे।
धीमी गति की बुलेटिन की याद की वजह यह है कि आकाशवाणी की नियंत्रक संस्था प्रसार भारती ने बीते 13 मार्च को एक अनूठे प्लेटफॉर्म की शुरुआत की है। 'शब्द' नामक इस प्लेटफॉर्म पर टेक्स्ट, ऑडियो और वीडियो फॉर्मेट में समाचार होंगे। इसके साथ ही समाचारीय महत्व वाले फोटोग्राफ भी उपलब्ध होंगे। एक तरह से यह मंच अखबारों, रेडियो चैनलों और टीवी चैनलों के लिए बिना किसी फीस के समाचार मुहैया कराने का मंच है। शब्द के जरिये एक तरह से प्रसार भारती अपनी उसी पारंपरिक भूमिका को संचार क्रांति और टेक्नोलॉजी के विस्तार के दौर में निभाने की कोशिश कर रहा है, जिसकी शुरुआत धीमी गति के समाचारों के प्रसारण के साथ हुई थी। प्रसार भारती के सीईओ गौरव द्विवेदी का कहना है कि शब्द का मकसद समाचार संस्थानों को सटीक और सही समाचार उपलब्ध कराना है।
प्रसार भारती के शब्द मंच को एक तरह से समाचार एजेंसी भी कह सकते हैं। बस अंतर यह है कि समाचार एजेंसियां फीस के बदले अपने समाचारों और फीचर को ग्राहकों को उपलब्ध कराती हैं, जबकि प्रसार भारती का यह मंच बिल्कुल नि:शुल्क है। हालांकि अभी यह अंग्रेजी और हिंदी में ही शुरू हुआ है, लेकिन इसे धीरे-धीरे प्रमुख भारतीय भाषाओं में भी उपलब्ध कराया जाएगा। इस अनूठे मंच की शुरुआत करते हुए सूचना और प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि प्रसार भारती की शब्द सेवा पचास श्रेणियों में समाचार कहानियां प्रदान करेगी। समाचार संगठनों को साफ और सटीक जानकारी दी जाएगी और उन्हें दूरदर्शन या आकाशवाणी का लोगो लगाने की जरूरत नहीं होगी।
सोशल मीडिया और संचार क्रांति के दौर में आज ज्यादातर लोग पत्रकार जैसी भूमिकाएं निभा रहे हैं। लेकिन सोशल मीडिया या यूट्यूब जैसे मंचों पर उपलब्ध समाचार सेवाओं में खबरों की निष्पक्षता और सटीकता को लेकर निगरानी रखने वाली व्यवस्था खत्म हो गई है। इस वजह से कई बार झूठी या गलत सूचनाएं और समाचार प्रसारित-प्रकाशित होते रहे हैं। इसलिए अब सोशल मीडिया के मंचों को भी सरकारों से हिदायत दी जा रही है कि उनके मंचों के जरिये फेक न्यूज या गलत सूचनाएं प्रसारित न हों, इसके लिए चौकस निगरानी रखें।
ऐसा नहीं कि सोशल मीडिया मंचों या संचार क्रांति के नए माध्यमों में सिर्फ गड़बड़ी फैलाने वाले लोग ही हैं। अच्छे मानस वाले लोग भी हैं, मीडिया के छोटे स्टार्टअप भी हैं। संसाधनों की कमी के चलते वे अपने प्रकाशनों या चैनलों में विविधरंगी और ज्यादा समाचार या कार्यक्रम नहीं पेश कर पाते। उनके लिए प्रसार भारती का शब्द मंच बेहद सहयोगी होगा। इससे खासकर उन छोटे समाचार संस्थानों को सहूलियत होगी, जिनके पास न तो बड़ा नेटवर्क है और न ही समाचार इकट्ठा करने के लिए पर्याप्त संसाधन।
प्रसार भारती के पास देश भर में बारह सौ से ज्यादा संवाददाताओं का नेटवर्क है, जिसमें दूरदर्शन और आकाशवाणी-दोनों के संवाददाता शामिल हैं। इतनी बड़ी संख्या में संवाददाताओं का नेटवर्क शायद ही किसी और मीडिया संस्थान के पास होगा। फिर इनकी कवरेज हिंदी और अंग्रेजी के साथ कई क्षेत्रीय भाषाओं में होती है। प्रसार भारती के पास ऑडियो, वीडियो, टेक्स्ट और फोटो रूप में सामग्री की भरमार है। अगर इनका ठीक से इस्तेमाल हुआ, तो निश्चित तौर पर इस नेटवर्क की कवरेज को मात दे पाना संभव नहीं होगा।
प्रसार भारती पर प्रसारित होने वाले समाचारों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं। जब तक तथ्य जांच न लिए जाएं, तब तक समाचार का प्रसारण न हो। यही वजह है कि शब्द पर उपलब्ध सामग्री साफ और फेक न्यूज की गड़बड़ियों दूर होगी। शब्द पर भी यह परंपरा बनी रहेगी और यही इसकी ताकत होगी, जिसका फायदा साधनहीन समाचार संस्थान सहज ही उठा सकते हैं।
(-लेखक प्रसार भारती के कंसल्टेंट हैं।)
Prasar Bharati SHABD platform aim to provide accurate and correct news to media organisations free of cost