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मटका भर चिंतन

Thu, 09 May 2013 11:39 PM IST
प्रकाश पुरोहित
प्रकाश पुरोहित Updated Thu, 09 May 2013 11:39 PM IST
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pot in protest

नेता खुद हैरान थे कि प्रदर्शन में इतने मटके आखिर आ कैसे गए! उन्हें तो याद नहीं कि मटका आखिरी बार कब देखा था। दस साल सत्ता में रहे, तो मटके की आदत ही फूट गई।

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बोतलबंद पानी के सिवा कहीं पीने का मौका ही कहां मिलता है। जो भी मिलता है, बोतलबंद, इसलिए यह भी पता नहीं था कि अब इस शहर में मटके मिलते भी हैं या नहीं, बल्कि यही अंदेशा था कि गांव में शायद मिल जाएं मटके।
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पहले तो यही विचार आया था कि अपने घर के बर्तन लेकर ही प्रदर्शन किया जाए...मगर इसमें झंझट बहुत था। किसी का स्टील या पीतल का गगरा फूट या छूट गया, तो भुगतान कौन करेगा।
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फिर इतने सारे बर्तन-भांडे किराये पर भी नहीं मिलते हैं। एक टेंट वाले से बात की थी, तो उसने ‘शादी का सीजन है’ कहकर हाथ ऊंचे कर दिए थे। खरीद भी लें, मगर रखें कहां...! अपने घर में तो वैसे ही न जगह है और न जरूरत।

फिर यह भी चिंतन हुआ कि पूरे समय भांडे लेकर घूमने के अलग से पैसे देने पड़ेंगे। वैसे ही ऐसी तपती-जलती गरमी में लोग घर से निकलने के दोगुने पैसे और ‘ठंडे का इंतजाम’ चाहते हैं।

पानी की कमी गरमी में ही क्यों होती है, नेताओं की यह आम शिकायत थी। ठंड में आप हर दिन प्रदर्शन-आंदोलन करवा लो, कोई मुश्किल नहीं, मगर गरमी में तो आधे नेता ठंडी जगहों पर निकल जाते हैं। जब इन्हें इकट्ठा करना मुश्किल है, तो पब्लिक को ढोकर लाना तो और भी जानलेवा होता है।

पार्टी ने तो कह दिया कि बस प्रदर्शन करना है, मगर करें कहां से। भीड़ तो फिर भी जमा कर लें, मगर ये मटके कहां से लाएं! ये मटके मिलते कहां हैं? क्या आज भी लोग इन मटकों में ही पानी भरते हैं या सिर्फ शो-पीस की तरह।

सभी हैरान-परेशान कि पानी की बात हो, तो मटके जरूरी हैं। किसी ने कहा, पानी की खाली बोतलें दे देंगे, मगर आइडिया जमा नहीं। मटकों की जगह पानी की टंकियां रखने की बात यह कहकर उड़ा दिया कि टेंट वालों का प्रदर्शन लगेगा।


फिर यही तय किया गया कि उन्हीं दिहाड़ी मजदूरों को लाया जाए, जिनके अपने मटके हैं। डर था कि शायद ही मिलें, मगर बाद में इतने आ गए कि वापस करना पड़ा।

और अच्छा यह भी रहा कि पुराने मटके प्रदर्शन में फोड़ दिए, इससे इंपेक्ट भी बना और गरीबों को पानी भले ही न मिल पाए, अब नए मटके जरूर मिल जाएंगे। इससे पार्टी की भी साख बनेगी कि मटका तो दिया।

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